कीर्तिपुर काठमांडू | नेपाल में मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक सहायता (Mental Health and Psychosocial Support–MHPSS) को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी (NRCS) और त्रिभुवन विश्वविद्यालय के केंद्रीय मनोविज्ञान विभाग के अंतर्गत संचालित काउंसलिंग साइकोलॉजी प्रोग्राम, कीर्तिपुर के बीच एक कार्यगत समझ (Working Understanding) के लिए औपचारिक समझौते (Agreement) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना, मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा (Psychological First Aid) को बढ़ावा देना, स्वयंसेवकों एवं पेशेवरों की क्षमता विकसित करना तथा समुदाय स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब नेपाल सहित पूरी दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियाँ लगातार बढ़ रही हैं। प्राकृतिक आपदाएँ, महामारी, सामाजिक-आर्थिक दबाव, पलायन, बेरोजगारी और अन्य मानवीय संकटों के कारण लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ा है। ऐसे परिदृश्य में नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी और त्रिभुवन विश्वविद्यालय का यह संयुक्त प्रयास न केवल नेपाल बल्कि दक्षिण एशिया में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक प्रभावी मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

समझौता हस्ताक्षर समारोह में नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. बिशाल कुमार भंडारी, महासचिव ऋषिरमन खनल, त्रिभुवन विश्वविद्यालय के केंद्रीय मनोविज्ञान विभाग के प्रमुख एसोसिएट प्रोफेसर संजेश श्रेष्ठ, काउंसलिंग साइकोलॉजी प्रोग्राम के समन्वयक डॉ. संदेश ढकाल, डेनिश रेड क्रॉस के प्रतिनिधि, नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी की केंद्रीय कार्यकारी समिति के सदस्य, विभिन्न निदेशक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में दोनों संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि समाज में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान केवल चिकित्सकीय व्यवस्था से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों, मानवीय संगठनों और समुदायों के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। इसी सोच के साथ दोनों संस्थाओं ने दीर्घकालिक सहयोग का निर्णय लिया है।

समझौते के तहत मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक सहायता सेवाओं में सहयोग को मजबूत किया जाएगा। इसके अंतर्गत स्वयंसेवकों, छात्रों, शिक्षकों, पेशेवरों तथा समुदाय के विभिन्न वर्गों को मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक सहायता संबंधी प्रशिक्षण दिया जाएगा। विशेष रूप से मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा (Psychological First Aid) को आपदा एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया का अनिवार्य हिस्सा बनाने पर बल दिया जाएगा। नेपाल जैसे आपदा-प्रभावित देश में भूकंप, बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्रभावित लोगों को त्वरित मानसिक एवं भावनात्मक सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना इस साझेदारी का प्रमुख उद्देश्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आपदा के बाद केवल शारीरिक सहायता पर्याप्त नहीं होती, बल्कि मानसिक और भावनात्मक सहयोग भी उतना ही आवश्यक होता है।

दोनों संस्थाओं के बीच हुए समझौते में सहयोगात्मक अनुसंधान, मूल्यांकन, दस्तावेज़ीकरण तथा साक्ष्य-आधारित गतिविधियों के संचालन पर भी विशेष बल दिया गया है। मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित नीतियों और प्रक्रियाओं के विकास के लिए संयुक्त अध्ययन किए जाएंगे, जिनके आधार पर सरकार तथा संबंधित संस्थाओं को आवश्यक सुझाव दिए जाएंगे। विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं और रेड क्रॉस के फील्ड अनुभवों का समन्वय करके ऐसे मॉडल विकसित किए जाएंगे जो समुदाय की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप हों। इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज में व्याप्त भ्रांतियों और सामाजिक कलंक (Stigma) को दूर करने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे, ताकि लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को छिपाने के बजाय समय पर विशेषज्ञों से सहायता प्राप्त कर सकें।

समझौते के अनुसार आने वाले दिनों में नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी और त्रिभुवन विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएँ, शोध परियोजनाएँ, सामुदायिक जागरूकता अभियान और क्षमता विकास कार्यक्रम संचालित करेंगे। इसके माध्यम से मानवीय संगठनों, साझेदार एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों तथा पेशेवर विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। दोनों पक्षों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी नेपाल में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और वैज्ञानिक बनाएगी। साथ ही यह सहयोग विद्यार्थियों को व्यवहारिक अनुभव प्रदान करेगा और समुदाय को गुणवत्तापूर्ण मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस मॉडल को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो भविष्य में यह अन्य विश्वविद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।
Report : GT Express
