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नेपाल में FAO और चीन के सहयोग से ‘Strengthening Agrifood Systems’ परियोजना का शुभारंभ, कृषि क्षेत्र को मिलेगी नई मजबूती

संपादक: By Reporter | प्रकाशित: 21 Jul 2026, 02:55 PM
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काठमांडू, नेपाल | नेपाल सरकार, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) तथा चीन सरकार की साझेदारी में “Strengthening Agrifood Systems in Nepal” परियोजना का औपचारिक शुभारंभ किया गया। यह महत्वाकांक्षी परियोजना नेपाल की कृषि व्यवस्था को आधुनिक, जलवायु-अनुकूल, समावेशी और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा बाजार तक पहुंच को मजबूत करना है।

उद्घाटन समारोह में नेपाल सरकार की कृषि, वन एवं पर्यावरण मंत्री माननीय गीता चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। समारोह में नेपाल में चीन के राजदूत एच.ई. झांग माओमिंग, FAO के South-South and Triangular Cooperation Division की निदेशक सुश्री हुआ यांग तथा भूटान एवं नेपाल के लिए FAO के प्रतिनिधि केन शिमिजू सहित नेपाल सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, विकास साझेदार, कृषि विशेषज्ञ और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।


नेपाल की कृषि व्यवस्था को मिलेगा नया आधार

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कृषि, वन एवं पर्यावरण मंत्री माननीय गीता चौधरी ने कहा कि यह परियोजना नेपाल की कृषि व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन लाने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि नेपाल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का गंभीर रूप से सामना कर रहा है, जिसके कारण कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से जलवायु-स्मार्ट कृषि तकनीकों, आधुनिक खेती, बेहतर सिंचाई व्यवस्था, डिजिटल कृषि सेवाओं, उन्नत बीज, कृषि नवाचार तथा बाजार आधारित उत्पादन प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा भी मजबूत होगी। मंत्री चौधरी ने कहा कि नेपाल सरकार का लक्ष्य कृषि क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और समावेशी बनाना है, ताकि ग्रामीण समुदायों का जीवन स्तर बेहतर हो सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि FAO और चीन सरकार का सहयोग इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।


South-South Cooperation बनेगा परिवर्तन का माध्यम

FAO की South-South and Triangular Cooperation Division की निदेशक सुश्री हुआ यांग ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी देश की कृषि प्रणाली में स्थायी परिवर्तन के लिए स्थानीय नेतृत्व, साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि FAO का मानना है कि ज्ञान, तकनीक और अनुभव का आदान-प्रदान विकासशील देशों के लिए सबसे प्रभावी मॉडल है। इसी सोच के तहत South-South Cooperation की अवधारणा को बढ़ावा दिया जा रहा है। सुश्री हुआ यांग ने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से नेपाल को आधुनिक कृषि तकनीक, डिजिटल नवाचार, कृषि अनुसंधान, किसानों के प्रशिक्षण तथा तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इससे कृषि उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता विकसित होगी। उन्होंने कहा कि मजबूत साझेदारी ही किसानों और ग्रामीण समुदायों तक वास्तविक लाभ पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।


चीन करेगा तकनीक और नवाचार का हस्तांतरण

नेपाल में चीन के राजदूत एच.ई. झांग माओमिंग ने कहा कि चीन सरकार नेपाल की कृषि प्रगति को अपनी विकास साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है। उन्होंने कहा कि South-South Cooperation के माध्यम से चीन आधुनिक कृषि तकनीकों, डिजिटल कृषि सेवाओं, स्मार्ट खेती, कृषि अनुसंधान और नवाचार से जुड़े अपने अनुभव नेपाल के साथ साझा करेगा।राजदूत ने कहा कि यह परियोजना केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार, खाद्य सुरक्षा और कृषि मूल्य श्रृंखला को भी मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि चीन का उद्देश्य नेपाल को आत्मनिर्भर, आधुनिक और जलवायु-अनुकूल कृषि प्रणाली विकसित करने में सहयोग देना है ताकि भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।


FAO ने समावेशी और टिकाऊ कृषि विकास

भूटान एवं नेपाल के लिए FAO के प्रतिनिधि केन शिमिजू ने कहा कि यह परियोजना साझेदारी, नवाचार और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने पर आधारित है। उन्होंने कहा कि FAO का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि ऐसी कृषि व्यवस्था विकसित करना है जो हर किसान, विशेषकर महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण समुदायों को समान अवसर प्रदान करे। उन्होंने कहा कि डिजिटल कृषि सेवाएं, बाजार तक बेहतर पहुंच, कृषि नवाचार, क्षमता विकास और आधुनिक तकनीकों का उपयोग किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।उन्होंने कहा कि परियोजना के माध्यम से ग्रामीण आजीविका मजबूत होगी, खाद्य सुरक्षा बेहतर होगी और “Leave No One Behind” की भावना के अनुरूप समाज के सभी वर्गों को विकास का लाभ मिलेगा।

Report : GT Express