चेन्नई, तमिलनाडु | तमिलनाडु के महान जननायक, स्वतंत्रता सेनानी, दूरदर्शी राजनेता और “कर्मवीर” के नाम से विख्यात कामराज की जयंती के अवसर पर पूरे राज्य में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और जनसेवा के आदर्शों को स्मरण करते हुए उन्हें आधुनिक तमिलनाडु का निर्माता बताया गया।
वक्ताओं ने कहा कि कामराज केवल एक सफल मुख्यमंत्री ही नहीं थे, बल्कि ऐसे जननेता थे जिन्होंने सत्ता को सेवा का माध्यम बनाया। उन्होंने शिक्षा, कृषि, उद्योग, सिंचाई और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में जो ऐतिहासिक कार्य किए, उनका लाभ आज भी करोड़ों लोगों को मिल रहा है। विशेष रूप से गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए उठाए गए उनके कदम आज भी प्रेरणास्रोत माने जाते हैं।

शिक्षा क्रांति के महानायक
कर्मवीर कामराज का नाम भारतीय इतिहास में शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले नेताओं में सबसे प्रमुखता से लिया जाता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने यह महसूस किया कि गरीबी और अशिक्षा एकदूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। यदि गरीब परिवारों के बच्चे विद्यालय नहीं जाएंगे तो समाज कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा। इसी सोच के साथ उन्होंने तमिलनाडु के हजारों गाँवों में नए विद्यालयों की स्थापना कराई। उनका स्पष्ट निर्देश था कि कोई भी बच्चा केवल इसलिए शिक्षा से वंचित न रहे क्योंकि उसके गाँव में स्कूल नहीं है। उनके कार्यकाल में हजारों प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय खोले गए। परिणामस्वरूप लाखों बच्चों को पहली बार विद्यालय जाने का अवसर मिला। कामराज का मानना था कि शिक्षा किसी भी समाज के विकास की सबसे बड़ी कुंजी है। उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति, विद्यालय भवनों के निर्माण, ग्रामीण शिक्षा के विस्तार तथा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष बल दिया। यही कारण है कि तमिलनाडु आज शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता है।

मिड-डे मील योजना से बदली लाखों बच्चों की जिंदगी
कामराज की सबसे ऐतिहासिक उपलब्धियों में से एक गरीब बच्चों के लिए विद्यालयों में भोजन उपलब्ध कराने की योजना थी। उस समय बड़ी संख्या में गरीब परिवारों के बच्चे भूख और आर्थिक तंगी के कारण विद्यालय नहीं जा पाते थे। उन्होंने इस समस्या को समझते हुए विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) की व्यवस्था प्रारंभ की। इस योजना का उद्देश्य केवल बच्चों को भोजन उपलब्ध कराना नहीं था, बल्कि उन्हें नियमित रूप से विद्यालय आने के लिए प्रेरित करना भी था। इस योजना के कारण विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ी, पढ़ाई छोड़ने वालों की संख्या घटी और गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिली। बाद में इसी विचार ने पूरे देश में मध्याह्न भोजन योजना का स्वरूप ग्रहण किया और आज यह भारत की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक योजनाओं में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि कामराज की इस पहल ने शिक्षा और पोषण दोनों क्षेत्रों में ऐतिहासिक परिवर्तन लाने का कार्य किया।

उद्योग, सिंचाई और कृषि विकास के निर्माता
कामराज ने केवल शिक्षा पर ही ध्यान नहीं दिया बल्कि तमिलनाडु के आर्थिक विकास को भी नई दिशा दी। उनके नेतृत्व में अनेक बड़े उद्योग स्थापित हुए, जिनसे लाखों लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ। उन्होंने औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए नई फैक्ट्रियों की स्थापना, औद्योगिक क्षेत्रों का विकास और निवेश को प्रोत्साहित करने जैसी अनेक योजनाएं लागू कीं। इसके साथ ही उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं और जल संरक्षण पर भी विशेष बल दिया। उनके कार्यकाल में अनेक बांध, तालाब और जलाशयों का निर्माण तथा पुनर्जीवन कराया गया। इन योजनाओं से किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिली और कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से उन्होंने विकास को गाँव-गाँव तक पहुंचाने का प्रयास किया। आज भी तमिलनाडु के अनेक विकास कार्यों की नींव उनके शासनकाल में रखी गई मानी जाती है।
सादगी, ईमानदारी और जनसेवा की अमिट विरासत
कामराज भारतीय राजनीति में सादगी और ईमानदारी के प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर केवल जनता की सेवा को प्राथमिकता दी। उनका जीवन अत्यंत सरल था। सत्ता के सर्वोच्च पद पर रहते हुए भी उन्होंने कभी वैभव और दिखावे को महत्व नहीं दिया। वे आम लोगों के बीच सहज रूप से पहुंचते थे और उनकी समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से सुनते थे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार कामराज ने यह सिद्ध किया कि प्रभावी नेतृत्व का आधार केवल सत्ता नहीं बल्कि जनविश्वास, ईमानदारी और दूरदर्शिता होती है। उनका जीवन आज भी सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
उनकी जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहा कि समाज को शिक्षा, समान अवसर, सामाजिक न्याय और जनसेवा के उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि कामराज द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
Report : GT Express
