काठमांडू | नेपाल में आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं समन्वित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत कर्णाली प्रदेश और सुदूरपश्चिम प्रांत की सीमा पर एक काल्पनिक भीषण भूकंप की घटना को आधार बनाकर वर्चुअल टेबल-टॉप सिमुलेशन एक्सरसाइज का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य किसी बड़े भूकंप की स्थिति में सरकारी तंत्र, सुरक्षा एजेंसियों, स्थानीय निकायों तथा अन्य संबंधित संस्थाओं की तैयारी का परीक्षण करना, संभावित चुनौतियों की पहचान करना तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था। यह अभ्यास नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यह सिमुलेशन अथॉरिटी के मीटिंग हॉल में आयोजित किया गया, जिसमें संघीय मंत्रालयों, विभिन्न सरकारी एजेंसियों तथा नेपाल की तीनों सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया। वहीं कर्णाली, लुंबिनी और सुदूरपश्चिम प्रांतों के मंत्रालयों, जिला प्रशासन, स्थानीय निकायों तथा अन्य संबंधित अधिकारियों वर्चुअल माध्यम से अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। अभ्यास के दौरान विभिन्न स्तरों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया, संसाधनों के समन्वय, सूचना आदान-प्रदान और राहत कार्यों की गति का भी मूल्यांकन किया गया।
सिमुलेशन में यह मानकर चलाया गया कि पश्चिमी नेपाल में अत्यंत विनाशकारी भूकंप आया है और उसके 48 घंटे बीत चुके हैं। इस दौरान छह अलग-अलग काल्पनिक घटनाओं (इंजेक्शन) को क्रमवार प्रस्तुत किया गया, जिनके आधार पर संबंधित एजेंसियों को तत्काल निर्णय लेने, खोज एवं बचाव अभियान चलाने, घायलों के उपचार, राहत सामग्री वितरण, अस्थायी आश्रय की व्यवस्था तथा संचार व्यवस्था को बहाल करने जैसे विषयों पर अपनी रणनीति प्रस्तुत करनी थी। प्रत्येक चरण में विशेषज्ञों ने एजेंसियों की प्रतिक्रिया का विश्लेषण किया और आवश्यक सुधारों पर चर्चा की।

इस अभ्यास में आपदा प्रबंधन से जुड़े केंद्र सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों के अतिरिक्त नेपाल सेना, नेपाल पुलिस तथा सशस्त्र पुलिस बल के अधिकारी भी शामिल हुए। इसके साथ ही लुंबिनी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम प्रांतों के संबंधित मंत्रालयों, राज्य स्तरीय सुरक्षा एजेंसियों, गोदावरी नगर पालिका, नेपालगंज उपमहानगरपालिका तथा बीरेंद्रनगर नगरपालिकाओं के स्थानीय प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। विषयगत समितियों और सहयोगी संस्थाओं ने भी विभिन्न परिस्थितियों में अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए समन्वित कार्यप्रणाली पर सुझाव दिए।
आपदा प्रबंधन की वास्तविक चुनौतियों का अभ्यास
टेबल-टॉप एक्सरसाइज वास्तविक आपदा के दौरान सामने आने वाली परिस्थितियों का पूर्वाभ्यास होती है। इसमें किसी वास्तविक घटना के बजाय काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया जाता है, ताकि संबंधित संस्थाएं बिना किसी जोखिम के अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा कर सकें। इस अभ्यास में यह देखा गया कि यदि अत्यधिक तीव्रता का भूकंप कर्णाली और सुदूरपश्चिम क्षेत्र में आता है, तो प्रारंभिक 48 घंटों में कौन-कौन सी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि पश्चिमी नेपाल का भौगोलिक स्वरूप अत्यंत कठिन है। पहाड़ी एवं दुर्गम क्षेत्रों में सड़क संपर्क सीमित होने के कारण राहत एवं बचाव कार्यों में देरी की संभावना रहती है। ऐसे में हेलीकॉप्टर, ड्रोन, सैटेलाइट संचार तथा स्थानीय स्वयंसेवी नेटवर्क की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
छह चरणों में हुआ विस्तृत अभ्यास
सिमुलेशन को छह अलग-अलग घटनाओं के माध्यम से संचालित किया गया। प्रत्येक चरण में नई चुनौती प्रस्तुत की गई, जैसे—
बड़े पैमाने पर भवनों का ध्वस्त होना।
हजारों लोगों के घायल होने की स्थिति।
अस्पतालों पर अत्यधिक दबाव।
संचार नेटवर्क बाधित होना।
सड़क एवं पुल क्षतिग्रस्त होना।
राहत सामग्री के वितरण में समन्वय की चुनौती।
इन सभी परिस्थितियों में संबंधित एजेंसियों को अपनी रणनीति प्रस्तुत करनी थी। विशेषज्ञों ने प्रत्येक निर्णय की समीक्षा करते हुए सुझाव दिए कि वास्तविक आपदा के समय किस प्रकार त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है।
खोज एवं बचाव अभियान
अभ्यास के दौरान खोज एवं बचाव (Search and Rescue) को प्राथमिकता दी गई। सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि किसी भी बड़े भूकंप के बाद पहले 72 घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इसी अवधि में अधिकतम लोगों की जान बचाई जा सकती है। इसलिए आधुनिक उपकरणों, प्रशिक्षित टीमों तथा स्थानीय समुदाय की भागीदारी को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया गया। नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के प्रतिनिधियों ने संयुक्त अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि सभी एजेंसियों के बीच स्पष्ट कमांड एवं कंट्रोल व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।
चिकित्सा व्यवस्था और राहत वितरण
भूकंप के बाद बड़ी संख्या में घायलों के उपचार की चुनौती को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय और चिकित्सा विशेषज्ञों ने आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की रणनीति साझा की। इसमें अस्थायी फील्ड अस्पताल, मोबाइल मेडिकल यूनिट, रक्त आपूर्ति, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता तथा गंभीर मरीजों को एयरलिफ्ट करने की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। राहत वितरण के दौरान पारदर्शिता, प्राथमिकता निर्धारण तथा स्थानीय प्रशासन के समन्वय को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
स्थानीय सरकारों की अहम भूमिका
अभ्यास में शामिल गोदावरी नगर पालिका, नेपालगंज उपमहानगरपालिका और बीरेंद्रनगर नगरपालिकाओं के प्रतिनिधियों ने बताया कि किसी भी आपदा में सबसे पहले स्थानीय प्रशासन ही प्रभावित नागरिकों तक पहुंचता है। इसलिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवकों, राहत सामग्री के भंडारण, आपातकालीन संचार प्रणाली तथा सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
UNDP का तकनीकी सहयोग
यह संपूर्ण सिमुलेशन संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के Urban Disaster and Earthquake Preparedness Project (SUPER II) के तकनीकी सहयोग से आयोजित किया गया। परियोजना का उद्देश्य नेपाल के शहरी एवं संवेदनशील क्षेत्रों में भूकंप सहित अन्य प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संस्थागत तैयारी को मजबूत बनाना, जोखिम कम करना तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को बेहतर बनाना है। विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे अभ्यास केवल सरकारी एजेंसियों के लिए ही नहीं बल्कि स्थानीय समुदाय, नागरिक समाज तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के लिए भी उपयोगी होते हैं।
भविष्य की तैयारी
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि आपदा के समय त्वरित निर्णय, बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक का उपयोग तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी ही जनहानि और आर्थिक नुकसान को कम कर सकती है। भविष्य में इसी प्रकार के और अधिक व्यापक अभ्यास आयोजित करने तथा प्रत्येक स्तर पर आपदा तैयारी को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
Report : GT Express
