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नेपाल में शिक्षा सुधार पर जोर: नई शिक्षा नीति, शिक्षा अधिनियम और गुणवत्तापूर्ण

संपादक: Ansh Nishad | प्रकाशित: 05 Jul 2026, 12:17 PM
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काठमांडू | नेपाल की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, नई शिक्षा नीति, आधुनिक शिक्षा कानून और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रणाली को लेकर नेपाली कांग्रेस के सेंट्रल पॉलिसी, रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित ग्रीन टेबल सीरीज़ के दसवें संस्करण में विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने गंभीर मंथन किया। “एजुकेशनल अपग्रेडेशन के लिए समय पर उपाय” विषय पर आयोजित इस पैनल चर्चा में यह निष्कर्ष सामने आया कि यदि नेपाल को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप शिक्षा प्रणाली विकसित करनी है तो केवल नीतिगत घोषणाएं पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि शिक्षा कानून, पाठ्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधन और प्रशासनिक समन्वय में व्यापक सुधार अनिवार्य होंगे। सनेपा स्थित नेपाली कांग्रेस के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष गगन कुमार थापा की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में देश के प्रमुख शिक्षाविदों, शिक्षा नीति विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों तथा विद्यार्थियों ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी मौजूदा समस्याओं और संभावित समाधानों पर विस्तार से अपने विचार रखे।

शिक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव की आवश्यकता

कार्यक्रम की शुरुआत में वक्ताओं ने नेपाल की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था का विश्लेषण करते हुए कहा कि वर्षों से लागू शिक्षा प्रणाली अब बदलते सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी परिवेश के अनुरूप नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं बल्कि विद्यार्थियों को जीवन, रोजगार और समाज के लिए तैयार करना होना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना था कि नेपाल की शिक्षा प्रणाली अभी भी पारंपरिक ढांचे पर आधारित है, जहां रटने की प्रवृत्ति अधिक है जबकि विश्लेषणात्मक सोच, समस्या समाधान, नवाचार और व्यावहारिक ज्ञान पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा। ऐसे में शिक्षा सुधार को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित करते हुए समयबद्ध कार्ययोजना लागू करना आवश्यक है। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा सुधार केवल शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी नहीं बल्कि संघीय, प्रांतीय और स्थानीय सरकारों के साझा प्रयासों से ही संभव होगा। यदि तीनों स्तर की सरकारें समन्वित रूप से कार्य करेंगी तो शिक्षा नीति का प्रभाव धरातल तक पहुंचेगा।

नया शिक्षा अधिनियम और आधुनिक पाठ्यक्रम की मांग

कार्यक्रम में प्रमुख वक्ताओं ने नेपाल में एक नया और व्यापक शिक्षा अधिनियम लागू करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उनका कहना था कि वर्तमान कानून बदलते समय की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। शिक्षाविद प्रो. डॉ. बिद्यानाथ कोइराला ने कहा कि शिक्षा प्रणाली को केवल कानूनी संशोधन से नहीं बल्कि सोच में परिवर्तन से भी मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को समाज, अर्थव्यवस्था और तकनीक से जोड़ना होगा ताकि विद्यार्थी भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। शिक्षाविद डॉ. बिष्णु कार्की ने कहा कि पाठ्यक्रम को समयानुकूल बनाया जाना चाहिए। वर्तमान शिक्षा प्रणाली में व्यवहारिक ज्ञान और कौशल आधारित शिक्षा का अभाव दिखाई देता है। यदि विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध करानी है तो पाठ्यक्रम में उद्योग, उद्यमिता, डिजिटल तकनीक और नवाचार से जुड़े विषयों को प्राथमिकता देनी होगी। डॉ. कृष्ण प्रसाद पौडेल ने कहा कि विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में अनुसंधान संस्कृति को विकसित करना आवश्यक है। शिक्षा केवल प्रमाणपत्र देने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि नए ज्ञान के निर्माण का माध्यम भी बननी चाहिए।

तकनीक, शिक्षक प्रशिक्षण और विद्यार्थियों की भागीदारी पर जोर

कार्यक्रम में टीच फॉर नेपाल की प्रतिनिधि स्वास्तिका श्रेष्ठा ने कहा कि आधुनिक शिक्षा में तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुकी है। डिजिटल लर्निंग, स्मार्ट क्लास, ऑनलाइन संसाधन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे नए उपकरणों का उपयोग विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को बेहतर बना सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में तकनीक का उपयोग तभी सफल होगा जब शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाए। शिक्षकों का पेशेवर विकास शिक्षा सुधार की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि शिक्षक आधुनिक शिक्षण पद्धति अपनाने में सक्षम होंगे तो विद्यार्थी भी अधिक प्रभावी ढंग से सीख सकेंगे। वक्ताओं ने यह भी कहा कि विद्यालयों में विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने, प्रयोगात्मक शिक्षा, परियोजना आधारित अध्ययन और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि केवल परीक्षा परिणामों के आधार पर शिक्षा की गुणवत्ता का मूल्यांकन करना उचित नहीं होगा। विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी और व्यावहारिक कौशल को भी मूल्यांकन प्रणाली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

कक्षा 12 के परिणामों में त्रुटियों पर छात्रों की नाराजगी

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने हाल ही में घोषित कक्षा 12 के परीक्षा परिणामों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। विद्यार्थियों का कहना था कि परिणाम जल्दबाजी में प्रकाशित किए गए, जिसके कारण कई तकनीकी और प्रशासनिक त्रुटियां सामने आईं। छात्र प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि गलत अंक परिणामों में विसंगतियां तथा पुनः जांच की प्रक्रिया में देरी के कारण अनेक विद्यार्थियों को मानसिक तनाव और शैक्षिक नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने मांग की कि भविष्य में परीक्षा परिणाम जारी करने से पहले पूरी प्रक्रिया का सावधानीपूर्वक सत्यापन किया जाए ताकि किसी भी विद्यार्थी के साथ अन्याय न हो। विद्यार्थियों ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और डिजिटल प्रबंधन प्रणाली को मजबूत बनाया जाना चाहिए जिससे परीक्षा संचालन और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बन सके।

Report : GT Express