📅 03 Jul 2026 | 📍 नई दिल्ली, भारत

GHAR TAK EXPRESS NEWS

भारत का अपना नंबर 1 न्यूज़ पोर्टल

ब्रेकिंग न्यूज़
🔴 FAO नेपाल की LGBTQIA+ कार्यशाला: समावेशी कार्यस्थल और टिकाऊ🔴 जापान-भारत के बीच हरित ऊर्जा में ऐतिहासिक समझौता, एसीएमई ने जापान को हरित अमोनिया और मेथनॉल आपूर्ति🔴 प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक शुरू, विकास और आर्थिक मुद्दों पर मंथन🔴 पिपराइच थाने में पिटाई का आरोप: साले-बहनोई विवाद के बाद घायल युवक अस्पताल में भर्ती, दीवान निलंबित🔴 कॉकरोच जनता पार्टी का अनिश्चितकालीन धरना, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग🔴 सिद्धार्थनगर में अभय समाज पार्टी का जनसंपर्क अभियान, डॉ. घनश्याम निषाद के नेतृत्व में ग्रामीणों🔴 बाराबंकी: जलांचल प्रगति पथ संस्थान ने शुरू किया पर्यावरण संरक्षण अभियान, जल संरक्षण और वृक्षारोपण पर रहेगा फोकस🔴 ग्राम सभा महराजी में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती धूमधाम से संपन्न🔴 श्री श्री सत चंडी महायज्ञ अवरही कृतपुरा पड़खोरी माता स्थान पर भव्य जलयात्रा श्रद्धा और आस्था का उमड़ा सैलाब🔴 इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन से मिले वैश्विक सीईओ स्वास्थ्य और शिक्षा में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका पर जोर

FAO नेपाल की LGBTQIA+ कार्यशाला: समावेशी कार्यस्थल और टिकाऊ

संपादक: Ansh Nishad | प्रकाशित: 03 Jul 2026, 02:54 PM
WhatsApp Facebook

काठमांडू। खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) नेपाल ने समावेशी कार्यस्थल और न्यायसंगत एग्रीफूड सिस्टम के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए LGBTQIA+ लर्निंग एवं सेंसिटाइज़ेशन वर्कशॉप का आयोजन किया। जुलाई माह की शुरुआत के साथ आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य कर्मचारियों, विकास साझेदारों और हितधारकों के बीच लैंगिक विविधता, यौन अभिविन्यास, जेंडर आइडेंटिटी एवं एक्सप्रेशन, सेक्स कैरेक्टरिस्टिक्स (SOGIESC) तथा सक्रिय सहयोग (Active Allyship) के प्रति समझ को और अधिक गहरा करना था।

कार्यशाला के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि किसी भी संस्थान में वास्तविक समावेशन केवल प्रतिनिधित्व (Representation) तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार किया जाना चाहिए जहाँ प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और समान अवसरों का अधिकारी महसूस करे। वक्ताओं ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को अपनी पहचान छिपाकर काम करना पड़े या भेदभाव का भय बना रहे, तो समावेशी विकास का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। कार्यक्रम में भूटान और नेपाल के लिए FAO के प्रतिनिधि केन शिमिज़ु, नेपाल की पहली ट्रांसजेंडर सांसद माननीय भूमिका श्रेष्ठ, ब्लू डायमंड सोसाइटी, रेनबो डिसेबिलिटी नेपाल, द फैमिली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ नेपाल तथा कैंपेन फॉर चेंज सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी वक्ताओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि समावेशी नीतियाँ केवल सामाजिक न्याय का प्रश्न नहीं, बल्कि टिकाऊ विकास, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक प्रगति की भी अनिवार्य शर्त हैं।


प्रतिनिधित्व से आगे बढ़कर वास्तविक समावेशन की आवश्यकता कार्यशाला को संबोधित करते हुए भूटान और नेपाल के लिए FAO के प्रतिनिधि केन शिमिज़ु ने कहा कि किसी भी संगठन की सफलता उसकी विविधता को सम्मान देने की क्षमता पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि केवल अलग-अलग समुदायों की उपस्थिति सुनिश्चित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है जहाँ वह बिना किसी भेदभाव, डर या पूर्वाग्रह के अपने विचार रख सके और संस्थान की प्रगति में समान रूप से योगदान दे सके।

उन्होंने कहा कि FAO नेपाल एक ऐसे कार्यस्थल के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है जहाँ विविध लैंगिक पहचान, यौन अभिविन्यास और सामाजिक पृष्ठभूमि वाले सभी कर्मचारी समान सम्मान और अवसर प्राप्त करें। उनका कहना था कि समावेशी वातावरण केवल कर्मचारियों के कल्याण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे संस्थान की कार्यक्षमता, नवाचार और निर्णय प्रक्रिया भी मजबूत होती है। केन शिमिज़ु ने यह भी स्पष्ट किया कि FAO नेपाल भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों और संवादों का आयोजन जारी रखेगा ताकि संगठन के भीतर समावेशी संस्कृति को और अधिक मजबूत बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि समावेशन एक बार का कार्यक्रम नहीं बल्कि सतत प्रक्रिया है, जिसे संगठन की नीतियों और कार्यसंस्कृति का स्थायी हिस्सा बनाया जाना चाहिए।


SOGIESC और एक्टिव एलायशिप पर गहन चर्चा कार्यशाला में विशेषज्ञों ने SOGIESC अर्थात Sexual Orientation, Gender Identity and Expression तथा Sex Characteristics की अवधारणा को विस्तार से समझाया। प्रतिभागियों को बताया गया कि प्रत्येक व्यक्ति की पहचान और अभिव्यक्ति अलग हो सकती है तथा इन विविधताओं का सम्मान करना मानवाधिकारों के मूल सिद्धांतों का हिस्सा है।

सत्र के दौरान एक्टिव एलायशिप (Active Allyship) की भूमिका पर भी विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि केवल भेदभाव का विरोध करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज और संस्थानों में ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो समानता और न्याय के पक्ष में सक्रिय रूप से आवाज़ उठाएँ। प्रतिभागियों ने विभिन्न समूह चर्चाओं और व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया कि कार्यस्थल पर समावेशी व्यवहार किस प्रकार विकसित किया जा सकता है। प्रशिक्षण में संवाद, सम्मानजनक भाषा, संवेदनशील नेतृत्व और समान अवसरों पर आधारित संस्थागत संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया।


भूमिका श्रेष्ठ सहित विभिन्न संगठनों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम की प्रमुख वक्ताओं में नेपाल की पहली ट्रांसजेंडर सांसद माननीय भूमिका श्रेष्ठ शामिल रहीं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि सामाजिक स्वीकृति और समान अवसर प्राप्त करने के लिए LGBTQIA+ समुदाय को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि नेपाल ने कानून और नीतिगत स्तर पर कई सकारात्मक कदम उठाए हैं, लेकिन सामाजिक व्यवहार और संस्थागत सोच में अभी भी व्यापक परिवर्तन की आवश्यकता है। उनके अनुसार वास्तविक समानता तभी संभव होगी जब समाज विविध पहचानों को सामान्य मानते हुए सम्मानपूर्वक स्वीकार करेगा।

कार्यशाला में ब्लू डायमंड सोसाइटी, रेनबो डिसेबिलिटी नेपाल, द फैमिली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ नेपाल और कैंपेन फॉर चेंज के प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने इंटरसेक्शनल डायवर्सिटी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके लैंगिक अभिविन्यास तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसमें दिव्यांगता, जातीयता, आर्थिक स्थिति, आयु और अन्य सामाजिक पहलू भी शामिल होते हैं। इसलिए समावेशन की नीतियाँ भी व्यापक और बहुआयामी होनी चाहिए।


समावेशी एग्रीफूड सिस्टम ही टिकाऊ विकास की आधारशिला

कार्यक्रम के समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि खाद्य और कृषि क्षेत्र का वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है जब उत्पादन, वितरण और निर्णय प्रक्रिया में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिले। किसानों, श्रमिकों, महिला समूहों, युवाओं तथा लैंगिक एवं यौन विविधता वाले समुदायों की भागीदारी के बिना टिकाऊ एग्रीफूड सिस्टम की कल्पना अधूरी रहेगी।

FAO नेपाल ने दोहराया कि वह नेपाल सरकार, नागरिक समाज संगठनों, स्थानीय समुदायों और अंतरराष्ट्रीय विकास साझेदारों के साथ मिलकर ऐसे विकास मॉडल को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है जिसमें किसी भी व्यक्ति को उसकी पहचान के कारण पीछे न छोड़ा जाए। संगठन का मानना है कि समावेशी विकास केवल सामाजिक न्याय का विषय नहीं बल्कि खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि, आर्थिक समृद्धि और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति का भी महत्वपूर्ण आधार है। आने वाले समय में FAO नेपाल इस दिशा में क्षमता विकास, नीति सहयोग, जागरूकता कार्यक्रम और साझेदारी आधारित पहलों को और अधिक मजबूत करेगा।

Report : GT Express