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जापान-भारत के बीच हरित ऊर्जा में ऐतिहासिक समझौता, एसीएमई ने जापान को हरित अमोनिया और मेथनॉल आपूर्ति

संपादक: Ansh Nishad | प्रकाशित: 03 Jul 2026, 12:48 PM
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जापान | भारत ने स्वच्छ ऊर्जा और हरित ईंधन के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत देश की अग्रणी स्वच्छ ऊर्जा कंपनी एसीएमई क्लीनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (एक्मे ग्रुप) ने जापान की दो प्रमुख औद्योगिक कंपनियों—आईएचआई कॉर्पोरेशन तथा मित्सुबिशी गैस केमिकल कंपनी (एमजीसी)—के साथ हरित अमोनिया एवं हरित मेथनॉल की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण खरीद समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। नई दिल्ली स्थित अटल अक्षय ऊर्जा भवन में आयोजित समारोह में हुए इन समझौतों को भारत-जापान के बीच स्वच्छ ऊर्जा सहयोग के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। इन समझौतों के माध्यम से भारत न केवल हरित हाइड्रोजन आधारित उत्पादों के निर्यात में अपनी स्थिति मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर कम-कार्बन अर्थव्यवस्था की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के हरित हाइड्रोजन उद्योग में बड़े पैमाने पर निवेश, रोजगार, तकनीकी नवाचार और निर्यात के नए अवसर खुलेंगे।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में एसीएमई ग्रुप ने जापान की प्रतिष्ठित कंपनी आईएचआई कॉर्पोरेशन के साथ प्रति वर्ष 4.05 लाख टन (405 केटीपीए) हरित अमोनिया की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके अतिरिक्त मित्सुबिशी गैस केमिकल कंपनी (एमजीसी) के साथ 10 वर्षों के लिए प्रति वर्ष 1 लाख टन (100 केटीपीए) हरित मेथनॉल की आपूर्ति का अनुबंध भी किया गया। यह समझौता ओडिशा के पारादीप स्थित एक्मे के संयंत्र से आपूर्ति पर आधारित होगा।

इन समझौतों को जापान सरकार के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय (METI) द्वारा संचालित कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस (CFD) योजना का समर्थन प्राप्त है, जिसके तहत जापानी खरीदारों को मूल्य सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इससे इन परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होगी।

भारत सरकार ने जनवरी 2023 में 19,744 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दी थी। इस मिशन का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग, नवाचार और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। मिशन के अंतर्गत संचालित स्ट्रैटेजिक इंटरवेंशंस फॉर ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांजिशन (SIGHT) कार्यक्रम के तहत भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) पारदर्शी बोली प्रक्रिया के माध्यम से कंपनियों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। इसी कार्यक्रम के तहत एसीएमई ग्रुप को प्रति वर्ष 3.70 लाख टन हरित हाइड्रोजन आधारित उत्पादों के उत्पादन की क्षमता आवंटित की गई थी, जिसके आधार पर ये अंतरराष्ट्रीय निर्यात समझौते संभव हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत अब केवल घरेलू आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी हरित ईंधन का विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि जापान द्वारा एक्मे-आईएचआई परियोजना को सीएफडी सहायता देना भारत के हरित हाइड्रोजन इकोसिस्टम में वैश्विक विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन भारत को भविष्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था का अग्रणी देश बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है। उनके अनुसार मिशन न केवल अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित कर रहा है बल्कि नई वैश्विक साझेदारियां स्थापित करते हुए भारतीय हरित ईंधन के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार भी तैयार कर रहा है। मंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व नेतृत्व की भूमिका निभाने की क्षमता रखता है और ऐसे समझौते इस दिशा में निर्णायक साबित होंगे।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि इन समझौतों से तीन महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं। पहला, जापान के साथ हरित अमोनिया एवं हरित मेथनॉल के लिए स्थायी बाजार संपर्क स्थापित हुआ है जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। दूसरा, भारतीय हरित हाइड्रोजन उद्योग अब व्यावसायिक रूप से परिपक्व हो रहा है और वैश्विक बाजार में विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर रहा है। तीसरा, इन समझौतों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया मूल्य श्रृंखला का निर्माण प्रारंभ हो गया है कार्यक्रम में जापान सरकार के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय के उप-मंत्री ताकेहिको मात्सुओ ने भी कहा कि ये समझौते भारत-जापान स्वच्छ ऊर्जा सहयोग के इतिहास में ऐतिहासिक उपलब्धि हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों की साझेदारी भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु संरक्षण और हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में और अधिक मजबूत होगी। कार्यक्रम के दौरान एक्मे ग्रुप ने अपनी परियोजनाओं की विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसके बाद औपचारिक रूप से समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। समारोह में भारत और जापान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा उद्योग जगत के अनेक प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

Report : GT Express