सांफेबगर। नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी अछाम जिला शाखा की ओर से सांफेबगर म्युनिसिपैलिटी की म्युनिसिपल पुलिस के लिए आपदा प्रबंधन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े विषयों पर एक दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का तकनीकी सहयोग नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी की सेफ नेपाल परियोजना के माध्यम से प्रदान किया गया। ओरिएंटेशन का उद्देश्य नगर क्षेत्र में किसी भी प्रकार की आपदा या आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होने पर म्युनिसिपल पुलिस की भूमिका, जिम्मेदारी, समन्वय और प्रारंभिक प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को रेड क्रॉस अभियान, रेड क्रॉस के मूल सिद्धांतों, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, आपदा प्रबंधन तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई। इसके साथ ही सांफेबगर म्युनिसिपैलिटी के स्थानीय आपातकालीन संचालन केंद्र में उपलब्ध आपदा प्रतिक्रिया सामग्री की पहचान, उपयोग और आवश्यकता के समय उसके प्रभावी इस्तेमाल के बारे में भी व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई।
नेपाल के पर्वतीय और भौगोलिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा का जोखिम लगातार महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। अछाम जैसे पहाड़ी जिले में भूस्खलन, बाढ़, भारी वर्षा, सड़क दुर्घटना, आगजनी और अन्य स्थानीय आपात स्थितियों के दौरान समय पर प्रतिक्रिया बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर काम करने वाली सुरक्षा एवं आपदा प्रतिक्रिया टीमों को नियमित प्रशिक्षण और अभ्यास उपलब्ध कराना आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

ओरिएंटेशन कार्यक्रम में म्युनिसिपल पुलिस के सदस्यों को रेड क्रॉस के अभियान और उसके मूल सिद्धांतों के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान मानवीय सहायता, निष्पक्षता, तटस्थता, स्वतंत्रता, स्वैच्छिक सेवा, एकता और सार्वभौमिकता जैसे रेड क्रॉस के मूल सिद्धांतों की भूमिका पर चर्चा की गई। आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्य में मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने तथा प्रभावित समुदाय तक आवश्यकता के आधार पर सहायता पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। नगर पुलिस स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थितियों में प्रारंभिक प्रतिक्रिया देने वाली महत्वपूर्ण इकाइयों में शामिल होती है। किसी दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा या अन्य संकट के दौरान प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित करना, लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित करना, सूचना के आदान-प्रदान में सहयोग करना और संबंधित निकायों के साथ समन्वय स्थापित करना महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल हो सकता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण में स्थानीय स्तर की प्रतिक्रिया प्रणाली को प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

कार्यक्रम में डिजास्टर रिस्क रिडक्शन यानी आपदा जोखिम न्यूनीकरण को भी प्रमुख विषय के रूप में शामिल किया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि आपदा आने के बाद प्रतिक्रिया करने के साथ-साथ आपदा से पहले जोखिम की पहचान और उसे कम करने के उपायों पर काम करना भी आवश्यक है। किसी क्षेत्र में संभावित खतरे, कमजोर स्थान, संवेदनशील आबादी और उपलब्ध संसाधनों की जानकारी पहले से होना आपदा के दौरान बेहतर निर्णय लेने में सहायता करता है। आपदा जोखिम न्यूनीकरण के तहत स्थानीय समुदाय, स्थानीय सरकार, सुरक्षा निकाय, स्वास्थ्य संस्थान, स्वयंसेवी संस्थाएं और अन्य संबंधित पक्षों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताया गया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों की जानकारी और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था को मजबूत रखने से किसी संकट की स्थिति में प्रतिक्रिया का समय कम किया जा सकता है।
ओरिएंटेशन में आपदा प्रबंधन के विभिन्न चरणों पर भी चर्चा की गई। आपदा से पहले तैयारी, आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया और आपदा के बाद राहत एवं पुनर्बहाली के कार्यों को आपस में जोड़कर देखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों में केवल सैद्धांतिक जानकारी विकसित करना नहीं, बल्कि वास्तविक आपात स्थिति में उपलब्ध संसाधनों और संस्थागत व्यवस्था का सही उपयोग करने की क्षमता को मजबूत करना भी रहा।

प्रशिक्षण के दौरान जलवायु परिवर्तन और इसके कारण बढ़ते संभावित जोखिमों पर भी जानकारी दी गई। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव मौसम के स्वरूप, अत्यधिक वर्षा, गर्मी, सूखा तथा अन्य प्राकृतिक घटनाओं के रूप में स्थानीय स्तर पर दिखाई दे सकता है। ऐसे बदलते जोखिमों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रतिक्रिया से जुड़े कर्मियों की तैयारी को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई। अछाम जैसे पहाड़ी क्षेत्र में भौगोलिक परिस्थितियां आपदा प्रबंधन को और चुनौतीपूर्ण बना सकती हैं। दुर्गम स्थानों तक पहुंच, सड़क संपर्क में बाधा, वर्षा के दौरान रास्तों का प्रभावित होना तथा सीमित संसाधनों की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पूर्व तैयारी आवश्यक हो जाती है। इसी संदर्भ में स्थानीय आपातकालीन संचालन केंद्र की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। ओरिएंटेशन के दौरान म्युनिसिपैलिटी के लोकल इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर में उपलब्ध आपदा प्रतिक्रिया सामग्री के बारे में भी जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को उपलब्ध सामग्री की पहचान तथा आवश्यकता पड़ने पर उसके उपयोग के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। इस तरह का प्रशिक्षण स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को केवल संग्रहित रखने के बजाय आपातकालीन परिस्थिति में व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित करने में सहायक हो सकता है।

नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी अछाम जिला शाखा ने सेफ नेपाल परियोजना के सहयोग से इस सप्ताह सांफेबगर क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों पर सिम्युलेटेड इंसिडेंट एक्सरसाइज कार्यक्रम भी आयोजित किया। इस प्रकार के अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक आपदा या आपातकालीन घटना जैसी परिस्थिति का अनुकरण करते हुए संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया क्षमता, समन्वय और तैयारी का अभ्यास करना होता है। सिम्युलेटेड इंसिडेंट एक्सरसाइज के माध्यम से आपदा के समय विभिन्न संस्थाओं के बीच सूचना प्रवाह, जिम्मेदारियों के विभाजन, उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल और प्रारंभिक प्रतिक्रिया की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलता है। ऐसे अभ्यास वास्तविक घटना के समय होने वाली संभावित कठिनाइयों की पहचान करने और भविष्य में तैयारी को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकते हैं। सांफेबगर में आयोजित ओरिएंटेशन और सिम्युलेटेड अभ्यास को स्थानीय स्तर पर आपदा तैयारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। रेड क्रॉस, स्थानीय सरकार, म्युनिसिपल पुलिस और अन्य संबंधित निकायों के बीच बेहतर समन्वय से आपदा के समय प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
Report :GT Express
