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PM मोदी का वीडियो फेसबुक से हटने पर विवाद, Meta ने तकनीकी गड़बड़ी

संपादक: Ghar Tak Express News | प्रकाशित: 28 जुलाई 2026, 07:28 अपराह्न
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नई दिल्ली, 28 जुलाई 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक आधिकारिक वीडियो कुछ समय के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक से हटाए जाने के बाद केंद्र सरकार और Meta के बीच जवाब-तलब का दौर शुरू हो गया है। घटना के सामने आने के बाद सरकार ने Meta से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा। जवाब में कंपनी ने कहा कि वीडियो किसी नीति के तहत नहीं हटाया गया था, बल्कि एक तकनीकी त्रुटि (Technical Glitch) के कारण वह अस्थायी रूप से प्लेटफॉर्म से हट गया था। Meta ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया और वीडियो को पुनः बहाल कर दिया।

हालांकि, सरकार ने केवल माफी को पर्याप्त नहीं माना है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार संबंधित मंत्रालयों ने Meta से विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि वीडियो किन परिस्थितियों में हटा, तकनीकी गड़बड़ी कैसे हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कंपनी कौन-कौन से सुधारात्मक कदम उठाएगी। यह मामला केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता, सरकारी संचार की सुरक्षा और सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

कैसे सामने आया पूरा मामला

जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक पर उपलब्ध था, लेकिन कुछ समय बाद वह उपयोगकर्ताओं को दिखाई देना बंद हो गया। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा की और वीडियो हटाए जाने को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कुछ ही समय में यह मुद्दा व्यापक चर्चा का विषय बन गया। घटना की जानकारी मिलते ही केंद्र सरकार ने Meta से संपर्क कर कारण पूछा। प्रारंभिक जांच के बाद Meta ने बताया कि वीडियो हटाने के पीछे कोई मानवीय निर्णय या नीतिगत कार्रवाई नहीं थी, बल्कि तकनीकी प्रणाली में आई अस्थायी गड़बड़ी इसका कारण बनी। कंपनी ने यह भी कहा कि समस्या का पता चलते ही इंजीनियरिंग टीम ने तुरंत कार्रवाई की और वीडियो को दोबारा बहाल कर दिया।

दूसरकार ने क्यों दिखाई गंभीरता

सरकारी सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों से जुड़े आधिकारिक संदेश करोड़ों नागरिकों तक पहुंचते हैं। ऐसे में यदि किसी तकनीकी कारण से ऐसी सामग्री हट जाती है तो इससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसी कारण सरकार ने Meta से विस्तृत रिपोर्ट है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट में यह बताया जाना चाहिए कि तकनीकी गड़बड़ी किस स्तर पर हुई, उसे ठीक करने में कितना समय लगा और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए कौन-से सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म अब केवल निजी कंपनियों के माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि सार्वजनिक सूचना प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इसलिए उनकी तकनीकी विश्वसनीयता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

तकनीकी विशेषज्ञों की राय

सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार फेसबुक जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर हर मिनट लाखों पोस्ट, वीडियो और तस्वीरें अपलोड होती हैं। इन्हें व्यवस्थित करने और नियमों के अनुरूप रखने के लिए अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा स्वचालित कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम का उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कभी-कभी एल्गोरिद्म किसी सामग्री की गलत पहचान कर लेते हैं, जिसके कारण वैध पोस्ट भी अस्थायी रूप से हट सकती हैं। हालांकि इस प्रकार की घटनाएं कम होती हैं, लेकिन जब मामला किसी राष्ट्रीय महत्व की सामग्री से जुड़ा हो, तब इसकी गंभीरता कई गुना बढ़ जाती है। उनका मानना है कि Meta जैसी कंपनियों को ऐसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए और प्रभावित उपयोगकर्ताओं के साथ-साथ संबंधित संस्थाओं को भी स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

डिजिटल जवाबदेही पर नई बहस

इस घटना के बाद एक बार फिर सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही पर बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म लोकतांत्रिक संवाद का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। सरकारी घोषणाएं, सार्वजनिक हित के संदेश और राष्ट्रीय महत्व की सूचनाएं बड़ी संख्या में इन्हीं माध्यमों से नागरिकों तक पहुंचती हैं।

ऐसे में यदि किसी तकनीकी त्रुटि के कारण महत्वपूर्ण सामग्री हट जाती है तो उसका प्रभाव व्यापक हो सकता है। यही कारण है कि विभिन्न देशों में सोशल मीडिया कंपनियों की पारदर्शिता, एल्गोरिद्म की कार्यप्रणाली और तकनीकी जवाबदेही को लेकर लगातार नए नियमों पर चर्चा हो रही है। विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना के बाद Meta अपने आंतरिक सिस्टम की समीक्षा करेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू कर सकता है। वहीं सरकार भी यह सुनिश्चित करना चाहेगी कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सरकारी संचार निर्बाध रूप से उपलब्ध रहे।

Report : GT Express