काठमांडू। नेपाल में इस वर्ष मॉनसून के आगमन के बाद प्राकृतिक आपदाओं ने देश के विभिन्न हिस्सों में जनजीवन को प्रभावित किया है। बाढ़, भूस्खलन, बिजली गिरने, नदी कटान तथा अन्य प्राकृतिक घटनाओं के कारण अब तक सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए नेपाल सरकार ने मॉनसून सीजन की पहली व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित की, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों, सुरक्षा निकायों, सरकारी विभागों, निजी क्षेत्र तथा मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में मॉनसून शुरू होने के बाद अब तक हुई आपदाओं, मानवीय क्षति, आर्थिक नुकसान, राहत एवं बचाव कार्यों की प्रगति तथा भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार ने संबंधित एजेंसियों को आगामी दिनों में संभावित भारी वर्षा और उससे उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रस्तुत आधिकारिक विवरण के अनुसार, 5 दिसंबर 2083 (नेपाली संवत) को मॉनसून की शुरुआत होने के बाद से अब तक पूरे देश में 913 आपदा संबंधी घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं में 36 लोगों की मौत हो चुकी है अथवा वे लापता हैं, जबकि 84 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा 1,089 परिवार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। प्रभावित परिवारों में कई ऐसे हैं जिनके मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं, कृषि भूमि बह गई है तथा आजीविका के साधनों पर भी गंभीर असर पड़ा है। सरकार ने बताया कि अधिकतर घटनाएं लगातार बारिश, अचानक आई बाढ़, पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन तथा नदी किनारे बसे इलाकों में जलस्तर बढ़ने के कारण हुई हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क टूटने से राहत पहुंचाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

समीक्षा बैठक में आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी प्रमुख मंत्रालयों (लीड्स) और सहयोगी एजेंसियों (को-लीड्स) ने अपने-अपने कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके अलावा गृह प्रशासन, मौसम विज्ञान विभाग, सड़क विभाग, स्वास्थ्य सेवाएं, स्थानीय प्रशासन, नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल, नेपाली सेना, रेडक्रॉस, निजी क्षेत्र तथा मीडिया संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आपदा के समय विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय जितना मजबूत होगा, राहत एवं बचाव कार्य उतने ही प्रभावी होंगे। कई स्थानों पर स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई से लोगों की जान बचाई जा सकी। वहीं, हेलीकॉप्टर, नाव और अन्य आधुनिक संसाधनों का उपयोग कर दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई गई। विशेषज्ञों ने कहा कि मॉनसून के दौरान सूचना का तेज आदान-प्रदान और समय पर चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) जनहानि को कम करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए स्थानीय स्तर तक मौसम संबंधी सूचनाओं को शीघ्र पहुंचाने की व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

बैठक में मानव जीवन के साथ-साथ आर्थिक क्षति की भी समीक्षा की गई। भारी वर्षा के कारण कई स्थानों पर पुल, सड़कें, सिंचाई नहरें तथा अन्य सार्वजनिक संरचनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। कृषि क्षेत्र को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है। धान, मक्का और सब्जियों की खेती प्रभावित होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री वितरण, अस्थायी आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और खाद्यान्न उपलब्ध कराने के कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कही। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए मेडिकल टीमों को तैनात किया गया है तथा आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडारण किया गया है। समीक्षा बैठक में निजी क्षेत्र और गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका की भी सराहना की गई। कई स्वयंसेवी संगठनों ने भोजन, कपड़े, पेयजल, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर राहत कार्यों में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। मीडिया संस्थानों ने भी समय-समय पर लोगों तक सही सूचना पहुंचाने तथा जोखिम वाले क्षेत्रों के प्रति जागरूकता फैलाने में अहम योगदान दिया।

बैठक के अंत में सरकार ने सभी संबंधित एजेंसियों को आगामी सप्ताहों के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए। मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि मॉनसून अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में कई क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है। ऐसे में बाढ़, भूस्खलन और नदी कटान की घटनाएं बढ़ सकती हैं। सरकार ने स्थानीय प्रशासन को राहत सामग्री का पर्याप्त भंडारण रखने, संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने तथा आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की तैयारी बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही नागरिकों से भी अपील की गई कि वे मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें तथा अफवाहों से बचें।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण नेपाल में अत्यधिक वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है। इसलिए दीर्घकालिक समाधान के रूप में मजबूत पूर्व चेतावनी प्रणाली, टिकाऊ आधारभूत संरचना, नदी प्रबंधन, पहाड़ी क्षेत्रों में भू-संरक्षण और समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन कार्यक्रमों को प्राथमिकता देना आवश्यक है। यदि सरकार, स्थानीय निकाय, सुरक्षा एजेंसियां निजी क्षेत्र और नागरिक समाज मिलकर कार्य करें, तो भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नेपाल सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि राहत एवं पुनर्वास कार्यों की नियमित निगरानी जारी रहेगी और प्रत्येक संबंधित एजेंसी को अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करना होगा। समीक्षा बैठक में प्राप्त सुझावों के आधार पर आगामी कार्ययोजना तैयार की जाएगी ताकि मॉनसून के शेष अवधि में किसी भी आपात स्थिति का तेजी से सामना किया जा सके।
Report : GT Express
