मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोमवार, 7 सितंबर 2026 को बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त नकदी को संभालने के लिए 5 लाख करोड़ रुपये की overnight variable rate reverse repo (VRRR) operation की घोषणा की। यह कदम 30 दिन की लंबी अवधि वाली VRRR नीलामी में अपेक्षाकृत कम भागीदारी के बाद उठाया गया है।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, 30 दिन की नीलामी में बैंकों की ओर से कुल 2.59 लाख करोड़ रुपये की बोलियां मिलीं। इस नीलामी में बैंकों को समय से पहले धन निकालने का विकल्प भी दिया गया था। कम भागीदारी के बाद RBI ने overnight operation का सहारा लिया, ताकि बैंकिंग व्यवस्था में मौजूद अतिरिक्त तरलता को अस्थायी रूप से सोखा जा सके।
इस पूरी प्रक्रिया में तकनीकी समस्या भी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक सामान्य ई-कुबेर प्लेटफॉर्म में तकनीकी दिक्कत के कारण बोली प्रक्रिया दूसरे प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करनी पड़ी। इससे कुछ बैंक प्रक्रिया के बदलाव के लिए तैयार नहीं थे और उनकी भागीदारी प्रभावित हुई।
RBI की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब बैंकिंग प्रणाली में तरलता का स्तर काफी ऊंचा बना हुआ है। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य ब्याज दरों और अल्पकालिक बाजार दरों पर अनावश्यक दबाव को रोकते हुए नकदी प्रबंधन को संतुलित रखना है।
बाजार के लिए इस कदम का महत्व इसलिए भी है क्योंकि RBI की liquidity management strategy पर बैंकों, बॉन्ड बाजार और मुद्रा बाजार की नजर रहती है। overnight VRRR के जरिए केंद्रीय बैंक को कम अवधि के लिए अतिरिक्त धनराशि को अपने पास खींचने का साधन मिलता है।
यह कदम किसी बैंक की वित्तीय कमजोरी का संकेत नहीं है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह मुख्य रूप से बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त तरलता के प्रबंधन से जुड़ा मौद्रिक संचालन है। आगे की नीलामियों में बैंकों की भागीदारी और बाजार दरों की प्रतिक्रिया से पता चलेगा कि RBI को इस व्यवस्था का कितनी बार इस्तेमाल करना पड़ता है।
स्रोत: Reuters, 7 सितंबर 2026.