भोपाल/ललितपुर: मध्य प्रदेश के सागर जिले में कथित नकली शराब पीने से कम से कम 12 लोगों की मौत के मामले की जांच में उत्तर प्रदेश तक फैले सप्लाई नेटवर्क के संकेत सामने आए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकली शराब की बोतलें और उनका वितरण तंत्र किस तरह कई इलाकों तक पहुंचा।
इंडियन एक्सप्रेस की 7 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों ने ऐसी शराब का सेवन किया था जिसे वे असली मान रहे थे, लेकिन जांच में बोतलों के नकली होने की बात सामने आई। अधिकारियों को संदेह है कि अवैध शराब की सप्लाई मध्य प्रदेश से लगी उत्तर प्रदेश की सीमा के रास्ते भी संचालित हुई हो सकती है।
मामले की गंभीरता इस वजह से बढ़ गई है क्योंकि नकली शराब का कारोबार केवल एक जिले तक सीमित रहने के बजाय कई स्तरों वाले नेटवर्क के जरिए संचालित होने की आशंका है। जांच में सप्लायर, परिवहन करने वालों और नकली पैकेजिंग से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पूरे नेटवर्क का संचालन किस जगह से किया जा रहा था। जांच एजेंसियों को शराब की बोतलों, लेबल, बैच संबंधी जानकारी और सप्लाई चैन के अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कड़ियां जोड़नी होंगी। इसी आधार पर यह भी तय होगा कि नकली शराब किन इलाकों में पहुंचाई गई थी और इसमें कितने लोग शामिल थे।
यूपी कनेक्शन क्यों महत्वपूर्ण है?
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे जिलों में अवैध शराब की आवाजाही पर निगरानी हमेशा महत्वपूर्ण रहती है। इस मामले में जांच का यूपी तक पहुंचना यह संकेत देता है कि पुलिस को सिर्फ स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय सप्लाई चैन की भी जांच करनी पड़ रही है। हालांकि, किसी व्यक्ति या समूह की जिम्मेदारी जांच पूरी होने से पहले तय नहीं की जा सकती।
नकली शराब में जहरीले या अनुपयुक्त रसायन होने का खतरा रहता है, जिससे कम समय में बड़ी संख्या में लोगों की तबीयत बिगड़ सकती है। यही कारण है कि ऐसे मामलों में अस्पतालों में उपचार के साथ-साथ नमूनों की फॉरेंसिक जांच और सप्लाई नेटवर्क की पहचान भी अहम होती है।
फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों का लक्ष्य मौतों के कारण की पुष्टि करने के साथ नकली शराब के पूरे नेटवर्क तक पहुंचना है।
स्रोत: 7 सितंबर 2026 की The Indian Express रिपोर्ट और जांच से जुड़ी उपलब्ध आधिकारिक जानकारी।