नई दिल्ली: भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी के बीच भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने कर्मचारियों और सार्वजनिक स्तर पर यह भरोसा दिलाया है कि देश की अंतरिक्ष अनुसंधान और तकनीकी क्षमता में उसकी केंद्रीय भूमिका बनी रहेगी।
रॉयटर्स की 7 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरिक्ष क्षेत्र में कुछ जिम्मेदारियां निजी और सरकारी कंपनियों को सौंपने की योजनाओं को लेकर ISRO के कर्मचारियों में चिंता सामने आई थी। कर्मचारियों ने बदलावों को लेकर औपचारिक संवाद की कमी पर स्पष्टीकरण मांगा था।
भारत ने 2020 से अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया है। इसके तहत निजी कंपनियों को उपग्रह, प्रक्षेपण और अन्य अंतरिक्ष गतिविधियों में अधिक अवसर मिल रहे हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और लार्सन एंड टुब्रो जैसी कंपनियां भी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के कुछ निर्माण कार्यों में भूमिका निभा रही हैं।
ISRO की ओर से दिए गए संदेश का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी का मतलब राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी की भूमिका को कम करना नहीं है। IN-SPACe के अध्यक्ष पवन गोयनका ने भी कहा है कि सुधारों के व्यापक ढांचे में ISRO की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।
भारत अपने मानव अंतरिक्ष मिशन समेत कई महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों पर काम कर रहा है। ऐसे में सरकार की नीति का जोर एक ऐसे अंतरिक्ष इकोसिस्टम पर है जिसमें ISRO अनुसंधान और प्रमुख तकनीकी क्षमता को आगे बढ़ाए और निजी क्षेत्र निर्माण, संचालन तथा व्यावसायिक सेवाओं में अधिक योगदान दे।