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श्री श्री सत चंडी महायज्ञ अवरही कृतपुरा पड़खोरी माता स्थान पर भव्य जलयात्रा श्रद्धा और आस्था का उमड़ा सैलाब

संपादक: Arvind Kumar Sahani |प्रकाशित: 18 मार्च 2026, 05:26 अपराह्न
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श्री श्री सत चंडी महायज्ञ अवरही कृतपुरा पड़खोरी माता स्थान पर भव्य जलयात्रा श्रद्धा और आस्था का उमड़ा सैलाब

अवरही कृतपुरा पड़खोरी माता स्थान पर आयोजित श्री श्री सत चंडी महायज्ञ के शुभ अवसर पर निकाली गई भव्य जलयात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में रंग दिया। सुबह से ही गांव और आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु एकत्रित होने लगे थे। जैसे ही जलयात्रा का शुभारंभ हुआ पूरा वातावरण जय माता दी के जयकारों से गूंज उठा।

विधि-विधान से हुआ जलयात्रा का शुभारंभ

जलयात्रा की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और पूजन-अर्चन के साथ हुई। यज्ञाचार्यों और पंडितों ने पहले विधिपूर्वक पूजा संपन्न कराई इसके बाद कलश में पवित्र जल भरकर श्रद्धालुओं के साथ यात्रा निकाली गई। महिलाएं सिर पर कलश लेकर कतारबद्ध तरीके से चल रही थीं वहीं पुरुष श्रद्धालु भक्ति गीतों और भजनों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना रहे थे।

गांव-गांव से उमड़ा जनसैलाब

इस धार्मिक आयोजन में केवल अवरही कृतपुरा ही नहीं बल्कि आसपास के कई गांवों के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। छोटे-छोटे बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी इस पावन अवसर के साक्षी बने। जलयात्रा के दौरान मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया।

माता पड़खोरी के प्रति अटूट आस्था

पड़खोरी माता स्थान क्षेत्र के लोगों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। यही कारण है कि महायज्ञ और जलयात्रा जैसे आयोजनों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस महायज्ञ में भाग लेने से सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त होती है।

भक्ति गीतों और झांकियों ने बांधा समां

जलयात्रा के दौरान भक्ति गीतों की धुन पर लोग झूमते नजर आए। कई जगहों पर आकर्षक झांकियां भी प्रस्तुत की गईं जिनमें देवी-देवताओं के स्वरूप को दर्शाया गया। ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजों की गूंज ने पूरे माहौल को उत्सव में बदल दिया।

प्रशासन और समिति का सराहनीय योगदान

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में यज्ञ समिति और स्थानीय प्रशासन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सुरक्षा व्यवस्था के लिए स्वयंसेवकों के साथ पुलिस बल भी तैनात रहा जिससे यात्रा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सकी। जगह-जगह पेयजल और प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई थी।

स्वच्छता और व्यवस्था पर विशेष ध्यान

आयोजन के दौरान स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखा गया। समिति के सदस्यों ने साफ-सफाई और यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की। इससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।

धार्मिक और सामाजिक समरसता का संदेश

श्री श्री सत चंडी महायज्ञ और जलयात्रा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं बल्कि सामाजिक एकता और समरसता का भी प्रतीक है। इस आयोजन में सभी वर्गों के लोग बिना किसी भेदभाव के शामिल हुए जिससे समाज में एकता और भाईचारे का संदेश गया।

कई दिनों तक चलेगा महायज्ञ

जानकारी के अनुसार, यह महायज्ञ कई दिनों तक चलेगा जिसमें रोजाना हवन पूजन, कथा और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। अंतिम दिन भव्य भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे। इस आयोजन के चलते पूरे क्षेत्र में मेले जैसा माहौल बन गया है। छोटे-बड़े दुकानदारों की दुकानें सज गई हैं और लोगों में उत्साह साफ देखा जा सकता है। बच्चों के लिए झूले और मनोरंजन के साधन भी लगाए गए हैं।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

1. श्री श्री सत चंडी महायज्ञ क्या होता है?
यह एक विशेष वैदिक अनुष्ठान है, जिसमें मां दुर्गा के चंडी स्वरूप की पूजा-अर्चना और हवन किया जाता है। इसे सुख-शांति और समृद्धि के लिए आयोजित किया जाता है।

2. जलयात्रा का क्या महत्व है?
जलयात्रा महायज्ञ का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसमें पवित्र जल को कलश में भरकर यात्रा निकाली जाती है, जो शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

3. यह आयोजन कहां हुआ?
यह आयोजन अवरही कृतपुरा के पड़खोरी माता स्थान पर आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

4. जलयात्रा में कौन-कौन शामिल होते हैं?
इसमें महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग सभी भाग लेते हैं। महिलाएं सिर पर कलश रखकर यात्रा में शामिल होती हैं।

5. महायज्ञ कितने दिनों तक चलता है?
यह महायज्ञ कई दिनों तक चलता है, जिसमें प्रतिदिन पूजा, हवन, कथा और भजन-कीर्तन होते हैं।

6. क्या इसमें भाग लेने के लिए कोई शुल्क लगता है?
नहीं, यह धार्मिक आयोजन सभी श्रद्धालुओं के लिए खुला होता है और इसमें भाग लेने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता।

7. महायज्ञ का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य समाज में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार करना होता है।

8. क्या अंतिम दिन कोई विशेष कार्यक्रम होता है?
हां, अंतिम दिन भव्य भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं।

9. क्या बाहर के लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं?
जी हां, यह आयोजन सभी के लिए खुला होता है, कोई भी श्रद्धालु इसमें शामिल हो सकता है।

10. इस तरह के आयोजन का सामाजिक महत्व क्या है?
ऐसे आयोजन समाज में एकता, भाईचारा और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने का काम करते हैं।