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रूस की आधी बड़ी डीजल रिफाइनरियां ड्रोन हमलों से प्रभावित, वैश्विक ईंधन बाजार पर बढ़ा दबाव

संपादक: Arvind Kumar Sahani | प्रकाशित: 15 सितम्बर 2026, 07:18 अपराह्न
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नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026: रूस की छह प्रमुख डीजल उत्पादन करने वाली रिफाइनरियों में से आधी सितंबर में यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बाद उत्पादन में बड़ी कटौती या अस्थायी बंदी का सामना कर रही हैं। Reuters की 15 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, इन छह संयंत्रों की क्षमता रूस के कुल डीजल उत्पादन का करीब आधा हिस्सा है। घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब रूस पहले ही घरेलू ईंधन उपलब्धता बनाए रखने के लिए ईंधन निर्यात पर पाबंदियां लगा चुका है।

Reuters ने ईंधन बाजार से जुड़े सूत्रों और उत्पादन संबंधी उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर बताया कि Kirishi रिफाइनरी बंद रही, जबकि Volgograd और NORSI जैसी इकाइयों में उत्पादन क्षमता काफी कम हुई। इन संयंत्रों में हुई क्षति का असर केवल रूस के घरेलू बाजार तक सीमित नहीं माना जा रहा, क्योंकि रूस लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय डीजल और गैसोइल कारोबार का बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है।

रूस में ईंधन आपूर्ति पर क्यों बढ़ी चिंता?

रिफाइनरियों पर लगातार ड्रोन हमलों ने रूसी तेल प्रसंस्करण ढांचे पर दबाव बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, 2026 के पहले आठ महीनों में रूसी रिफाइनरियों को औसतन हर तीन दिन में ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा। हमलों से कई जगहों पर उत्पादन इकाइयों की मरम्मत लंबी हुई और कुछ संयंत्रों को अपनी परिचालन क्षमता घटानी पड़ी।

घरेलू बाजार को प्राथमिकता देने के लिए मॉस्को ने पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए हैं। Reuters के मुताबिक, प्रतिबंध लागू होने से पहले रूस से डीजल और गैसोइल का मासिक निर्यात औसतन 33 से 34 लाख टन के आसपास था। तुर्किये और ब्राजील रूसी ईंधन के प्रमुख खरीदारों में शामिल रहे हैं।

वैश्विक ईंधन बाजार पर क्या असर?

रूस की रिफाइनिंग क्षमता में कटौती ऐसे समय हुई है जब मध्य पूर्व में भी ऊर्जा आपूर्ति को लेकर जोखिम बढ़े हुए हैं। सऊदी अरब की East-West तेल पाइपलाइन पर हमले और क्षेत्रीय समुद्री मार्गों में तनाव के कारण कच्चे तेल तथा परिष्कृत ईंधन बाजार पहले से दबाव में हैं। Reuters ने 15 सितंबर को बताया कि रूस की रिफाइनरियों में उत्पादन कटौती और मध्य पूर्व की आपूर्ति चिंताओं ने वैश्विक ईंधन बाजार की तंग स्थिति को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

हालांकि किसी एक घटना से वैश्विक ईंधन कीमतों में कितनी बढ़ोतरी होगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना अभी संभव नहीं है। कीमतों पर रूस की रिफाइनिंग क्षमता, सऊदी तेल आपूर्ति, समुद्री परिवहन, भंडार और आगे होने वाले हमलों समेत कई कारकों का संयुक्त असर पड़ेगा।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?

भारत एक बड़ा ऊर्जा आयातक है और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल तथा ईंधन बाजार में होने वाला बड़ा बदलाव घरेलू परिवहन, औद्योगिक लागत और महंगाई के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट रूस की रिफाइनिंग और वैश्विक ईंधन बाजार पर प्रभाव को लेकर है; इससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत तुरंत बढ़ने का कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। घरेलू कीमतों पर सरकार की कर नीति, तेल विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति और वैश्विक बाजार समेत कई कारक असर डालते हैं।

यूक्रेन-रूस युद्ध में ऊर्जा ढांचे पर बढ़ता दबाव

रूस की रिफाइनरियों पर हमले यूक्रेन की उस रणनीति का हिस्सा हैं जिसमें वह रूस की ईंधन और ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाकर सैन्य तथा आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यूक्रेन ऐसे हमलों को अपने खिलाफ रूसी हमलों के जवाब में वैध सैन्य कार्रवाई बताता है, जबकि रूस इन हमलों से अपने नागरिक और ऊर्जा ढांचे को हुए नुकसान की बात करता है।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन से रूसी डीजल अवसंरचना को निशाना नहीं बनाने की अपील की है। दूसरी ओर, ऊर्जा बाजार पर इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रभावित रिफाइनरियां कितनी जल्दी मरम्मत के बाद सामान्य उत्पादन पर लौटती हैं और रूस घरेलू ईंधन आपूर्ति को किस तरह स्थिर रखता है।

स्रोत: Reuters, 15 सितंबर 2026; International Energy Agency (IEA) से संबंधित रिपोर्टिंग। यह रिपोर्ट उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर स्वतंत्र रूप से तैयार की गई है।