📅 16 Sep 2026 | 📍 नई दिल्ली, भारत

GHAR TAK EXPRESS NEWS

भारत का अपना नंबर 1 न्यूज़ पोर्टल

ब्रेकिंग न्यूज़
🔴 ईरान के क़ेश्म द्वीप पर कई धमाकों की आवाज, IRNA की रिपोर्ट; कारण अभी स्पष्ट नहीं🔴 Apple के iOS 18 सॉफ्टवेयर पर भारत में जांच तेज, CCPA ने विस्तृत जांच के लिए मामला बढ़ाया🔴 टेस्ला Cybercab पर अमेरिकी जांच तेज, NHTSA ने 30 सितंबर तक मांगा जवाब🔴 लखनऊ की रुकी टाउनशिप को LDA पूरा करेगा, करीब 5,000 खरीदारों को राहत की उम्मीद🔴 यूपी के छोटे किसानों को 6 लाख तक का कर्ज, 6% ब्याज पर योजना को मंजूरी🔴 यूपी के 14,429 प्राथमिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, कैबिनेट ने ₹300 करोड़ मंजूर किए🔴 यूपी में ₹100 करोड़ के कथित मेडिकल खरीद घोटाले की ED जांच शुरू🔴 यूपी में 15,012 शिक्षकों की भर्ती, आज से आवेदन प्रक्रिया शुरू🔴 नाबालिगों की शादी के रजिस्ट्रेशन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, उम्र की जांच अनिवार्य करने का निर्देश🔴 रूस की आधी बड़ी डीजल रिफाइनरियां ड्रोन हमलों से प्रभावित, वैश्विक ईंधन बाजार पर बढ़ा दबाव

नाबालिगों की शादी के रजिस्ट्रेशन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, उम्र की जांच अनिवार्य करने का निर्देश

संपादक: Arvind Kumar Sahani | प्रकाशित: 15 सितम्बर 2026, 07:18 अपराह्न
WhatsApp Facebook

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में नाबालिगों की शादी के पंजीकरण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने विवाह पंजीकरण अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी विवाह का रजिस्ट्रेशन करने से पहले वर और वधू की उम्र की अनिवार्य रूप से जांच की जाए।

यह निर्देश गाजियाबाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया, जहां अधिकारियों द्वारा एक नाबालिग लड़की का विवाह पंजीकृत किए जाने पर अदालत ने चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में उम्र संबंधी दस्तावेजों की सावधानीपूर्वक जांच जरूरी है।

बाल विवाह रोकने पर जोर

अदालत की टिप्पणी का उद्देश्य विवाह पंजीकरण व्यवस्था में ऐसी खामियों को रोकना है, जिनका फायदा उठाकर बाल विवाह को वैध दिखाने की कोशिश हो सकती है। पंजीकरण अधिकारियों को कानून में तय उम्र सीमा और उपलब्ध दस्तावेजों का पालन करने को कहा गया है।

अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ी

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद विवाह पंजीकरण कार्यालयों में उम्र सत्यापन की प्रक्रिया पर अधिक सतर्कता की जरूरत होगी। किसी मामले में उम्र को लेकर संदेह होने पर अधिकारियों को रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद ही आगे बढ़ना होगा।

तथ्य-जांच: रिपोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़ी रिपोर्टिंग और उपलब्ध न्यायिक जानकारी पर आधारित है।