नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026: भारत में बिजली आपूर्ति और मांग के बीच दबाव सितंबर में और बढ़ गया। सरकारी आंकड़ों के आधार पर Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में देश में बिजली की कमी 560 मिलियन किलोवॉट-घंटे (kWh) तक पहुंच गई, जो अगस्त 2023 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है।
बिजली की कमी ऐसे समय बढ़ी जब कोयला आधारित बिजली उत्पादन लगातार छठे महीने ऊंचे स्तर पर बना रहा। सितंबर में कोयला आधारित उत्पादन पिछले साल के समान महीने की तुलना में 13.3 प्रतिशत बढ़ा और कुल बिजली उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 66.03 प्रतिशत रही। अगस्त में यह हिस्सेदारी 64.6 प्रतिशत थी।
इस दबाव की एक बड़ी वजह कमजोर बारिश और उससे प्रभावित जलविद्युत उत्पादन रही। कम बारिश के कारण हाइड्रो पावर की उपलब्धता पर असर पड़ा, जबकि दिन में बनने वाली अक्षय ऊर्जा को बाद के घंटों के लिए सुरक्षित रखने की पर्याप्त बैटरी स्टोरेज क्षमता नहीं होने से शाम और रात के समय ग्रिड पर दबाव बढ़ा।
उधर, सितंबर में अक्षय ऊर्जा उत्पादन भी बढ़ा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इसमें सालाना आधार पर 25.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 29.62 अरब kWh तक पहुंचा। इसके बावजूद कुल बिजली उत्पादन में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत रही, जो अगस्त के लगभग 19.5 प्रतिशत से कम थी।
सरकारी आंकड़ों से यह भी संकेत मिलता है कि करीब दो-पांचवां हिस्सा कोयला आधारित बिजली संयंत्रों का ईंधन भंडार गंभीर रूप से कम स्तर पर चल रहा था। इससे यह साफ होता है कि मांग बढ़ने की स्थिति में उत्पादन बढ़ाने की क्षमता के बावजूद ईंधन उपलब्धता और ग्रिड प्रबंधन बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
सितंबर में भारत का कुल बिजली उत्पादन सालाना आधार पर 11.3 प्रतिशत बढ़कर 174.17 अरब kWh रहा। विश्लेषकों के मुताबिक औद्योगिक खपत में बढ़ोतरी, ऊंची पीक डिमांड और कुछ बिजली संयंत्रों के रखरखाव ने भी आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया।
आम लोगों पर क्या असर? बिजली की कमी का सीधा असर हर राज्य में एक जैसा नहीं होता, क्योंकि स्थानीय उत्पादन, ट्रांसमिशन क्षमता और वितरण व्यवस्था अलग-अलग है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों को किसी एक राज्य में अनिवार्य बिजली कटौती के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आने वाले समय में मांग, बारिश, कोयला आपूर्ति और ग्रिड की स्थिति यह तय करेगी कि दबाव कितना बना रहता है।
स्रोत: Grid-India के सरकारी आंकड़ों पर आधारित Reuters रिपोर्ट।