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पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर लगी पाबंदी हटाने का निर्देश, निजी कंपनियों से बोला भारत सरकार

संपादक: Arvind Kumar Sahani |प्रकाशित: 01 अक्टूबर 2026, 05:35 अपराह्न
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नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026: देश में ईंधन आपूर्ति को लेकर सरकार ने निजी पेट्रोलियम कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लगाए गए किसी भी तरह के राशनिंग या सीमा-निर्धारण को खत्म करने का निर्देश देने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को ईंधन की उपलब्धता प्रभावित करने वाली बिक्री सीमा स्वीकार्य नहीं है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने गुरुवार को कहा कि सरकार निजी ईंधन विक्रेताओं से बिक्री राशनिंग समाप्त करने के लिए कहेगी। रिपोर्ट में Reliance Industries और Nayara Energy जैसी निजी कंपनियों द्वारा कुछ पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल की बिक्री सीमित किए जाने का उल्लेख है।

इस कदम की पृष्ठभूमि में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बढ़ी अस्थिरता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं ने भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर दबाव बढ़ाया है। भारत में घरेलू पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में मई के बाद से बदलाव नहीं हुआ है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लागत बढ़ी है।

सरकार के सामने चुनौती यह है कि उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता सामान्य रखी जाए और साथ ही तेल विपणन कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव को संभाला जाए। रॉयटर्स के अनुसार, सरकारी ईंधन कंपनियों को डीजल की बिक्री पर प्रति लीटर लगभग 50 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सरकार के इस निर्देश का असर देशभर में ईंधन की उपलब्धता पर पड़ सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां निजी कंपनियों के पंपों पर बिक्री सीमित होने की शिकायतें सामने आई हैं, वहां आपूर्ति व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर किसी पंप पर स्टॉक की उपलब्धता अलग-अलग हो सकती है।

भारत की अर्थव्यवस्था में पेट्रोल और डीजल की कीमत तथा उपलब्धता का सीधा असर परिवहन, कृषि, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत पर पड़ता है। इसलिए सरकार का यह फैसला उपभोक्ताओं के साथ-साथ कारोबार और महंगाई के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

क्या आगे होगा? निजी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को बिक्री सीमा हटाने के निर्देश के बाद निगरानी बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें, घरेलू ईंधन कीमतों की नीति और तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति आने वाले दिनों में इस मामले के प्रमुख संकेतक होंगे।

स्रोत: Reuters; रिपोर्ट में उपलब्ध आधिकारिक और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर तथ्यों को प्रस्तुत किया गया है। किसी अपुष्ट स्थानीय कमी या कीमत संबंधी दावे को तथ्य के रूप में नहीं लिखा गया है।