नई दिल्ली: नेपाल में हालिया विनाशकारी बाढ़ से जलविद्युत ढांचे को हुए नुकसान के बाद भारत ने 654 मेगावाट तक बिजली निर्यात की मंजूरी दी है। 14 सितंबर 2026 की Reuters रिपोर्ट के अनुसार यह बिजली 31 दिसंबर 2026 तक रोजाना 18 घंटे उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
भारत के बिजली मंत्रालय के अनुसार अधिकतम 600 MW बिजली मुजफ्फरपुर-ढलकेबर 400 kV लाइन के जरिए और 54 MW तनकपुर-महेंद्रनगर 132 kV लाइन के जरिए दी जा सकती है। यह व्यवस्था नेपाल की घरेलू बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी।
नेपाल के बिजली क्षेत्र पर बाढ़ का असर
Reuters के मुताबिक ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ ने नेपाल और तिब्बत में बड़े पैमाने पर नुकसान किया। कई जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुईं और नेपाल को अपनी घरेलू जरूरतों के लिए बिजली आयात पर निर्भर होना पड़ा।
भारत-नेपाल ऊर्जा सहयोग के लिए क्यों अहम?
भारत और नेपाल के बीच बिजली व्यापार पहले से बढ़ रहा है। मौजूदा व्यवस्था संकट के दौरान नेपाल को तत्काल ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ दोनों देशों के क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग को भी मजबूत कर सकती है।
तथ्य-जांच: 654 MW, रोजाना 18 घंटे और 31 दिसंबर 2026 तक की समयसीमा Reuters तथा भारत सरकार से संबंधित रिपोर्टों से मिलाई गई है।
अस्वीकरण: आपूर्ति की वास्तविक मात्रा और अवधि ग्रिड स्थिति तथा संबंधित प्राधिकरणों के परिचालन निर्णयों के अनुसार बदल सकती है।