नई दिल्ली। जमानत मिलने के बाद कथित तौर पर ‘विजय जुलूस’ निकालने और गवाहों को धमकाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने हरियाणा पुलिस को निर्देश दिया है कि चरखी दादरी जिले के पुलिस अधीक्षक गैर-जमानती वारंट के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करें और आरोपी को 21 सितंबर 2026 को अगली सुनवाई में अदालत के सामने पेश करें।nnन्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले में दर्ज किया कि आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद उसे अब तक हिरासत में लेकर अदालत में पेश नहीं किया गया। शिकायतकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद आरोपी ने कथित तौर पर विजय जुलूस निकाला और गवाहों को धमकाया।nnसुप्रीम कोर्ट ने पहले की सुनवाई के दौरान भी जमानत मिलने के बाद विजय जुलूस निकालने को अनुचित बताया था। अदालत ने आरोपी को पहले आत्मसमर्पण करने और फिर जमानत मांगने का निर्देश दिया था। अब शीर्ष अदालत ने हरियाणा पुलिस को गैर-जमानती वारंट पर कार्रवाई करते हुए आरोपी को अगली सुनवाई में पेश करने को कहा है।nnमामला 27 अक्टूबर 2022 की घटना से जुड़ा है। आरोप है कि एक विवाद के दौरान कई लोगों पर लाठी और कुल्हाड़ी से हमला किया गया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। आरोपी तीन साल से अधिक समय तक हिरासत में रहा था। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल को उसे जमानत दी थी।nnसुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश की प्रति 24 घंटे के भीतर चरखी दादरी के पुलिस अधीक्षक तक पहुंचाने के लिए रजिस्ट्री को भी निर्देश दिया है। अदालत के इस रुख से स्पष्ट है कि जमानत को किसी आरोपी के लिए कानून से ऊपर होने या न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का आधार नहीं माना जा सकता।nnयह खबर उपलब्ध न्यायिक आदेश और प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित है। मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।