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ISRO ने EOS-05 को सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचाया, GSLV-F17 मिशन से भारत की अर्थ-निगरानी क्षमता को बढ़ावा

संपादक: Arvind Kumar Sahani |प्रकाशित: 05 सितम्बर 2026, 12:47 पूर्वाह्न
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श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 की सुबह GSLV-F17 रॉकेट से EOS-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया। मिशन की उड़ान सुबह 2:55 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से शुरू हुई। ISRO के अनुसार उपग्रह को लगभग 18 मिनट बाद उसकी निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।

2,367 किलोग्राम का EOS-05 मिशन क्यों अहम है?

EOS-05 को जियोसिंक्रोनस कक्षा से पृथ्वी की इमेजिंग करने के लिए तैयार किया गया है। इसकी खासियत यह है कि ऐसी कक्षा से किसी बड़े क्षेत्र पर लगातार और बार-बार निगरानी करना संभव होता है। इससे सामान्य अर्थ-ऑब्जर्वेशन उपग्रहों की तुलना में तेजी से बदलने वाली परिस्थितियों पर अधिक लगातार नजर रखने में मदद मिल सकती है।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 2,367 किलोग्राम का EOS-05 भारत का अब तक का सबसे भारी पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है जिसे GSLV के जरिए इस मिशन में भेजा गया। GSLV-F17 की यह 19वीं GSLV उड़ान थी। ISRO ने बताया कि प्रक्षेपण के बाद उपग्रह की स्थिति सामान्य रही और सौर पैनल भी सफलतापूर्वक तैनात हुआ।

कृषि और आपदा प्रबंधन में मिल सकता है फायदा

EOS-05 से मिलने वाली उच्च-आवृत्ति इमेजिंग का उपयोग कृषि, जल संसाधन, जंगलों और प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। बाढ़, जंगल की आग या तेजी से बदलते मौसम तंत्र जैसी घटनाओं में लगातार उपलब्ध पृथ्वी-अवलोकन डेटा प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के लिए उपयोगी हो सकता है।

GSLV-F17 की सफलता से ISRO को मजबूती

यह मिशन GSLV कार्यक्रम के लिए भी महत्वपूर्ण है। सफल प्रक्षेपण के बाद ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने मिशन को सफल बताते हुए कहा कि EOS-05 को निर्धारित कक्षा में सटीक रूप से स्थापित किया गया। मिशन की सफलता ऐसे समय में आई है जब अंतरिक्ष एजेंसी आगे कई महत्वपूर्ण प्रक्षेपणों की तैयारी कर रही है।

ISRO के आधिकारिक अपडेट और उपलब्ध स्वतंत्र रिपोर्टों के अनुसार EOS-05 को पहले सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया गया है। इसके बाद कक्षा को आवश्यक जियो प्लेटफॉर्म तक उठाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसलिए उपग्रह के अंतिम परिचालन चरण के बारे में उपलब्ध जानकारी को इसी संदर्भ में समझना जरूरी है।

स्रोत: ISRO के आधिकारिक मिशन अपडेट तथा 4 सितंबर 2026 की स्वतंत्र समाचार रिपोर्टों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।