नई दिल्ली, 6 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति भवन ने 5 सितंबर की देर रात जारी आधिकारिक प्रेस कम्युनिके में इसकी पुष्टि की। नियुक्ति उस तारीख से प्रभावी होगी जिस दिन डॉ. शर्मा नए पद का कार्यभार संभालेंगे।
राष्ट्रपति भवन के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार का उपराज्यपाल नियुक्त करने को मंजूरी दी है। इस फैसले के साथ शर्मा की प्रशासनिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों का दायरा राष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ गया है। वह इससे पहले उत्तर प्रदेश में उपमुख्यमंत्री के पद पर रह चुके हैं और लखनऊ के महापौर के रूप में भी काम कर चुके हैं।
डॉ. दिनेश शर्मा वर्ष 2017 से 2022 के बीच उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री रहे। इसके बाद वह राज्यसभा के सदस्य बने। मौजूदा समय में वह उच्च सदन में भाजपा का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उनकी राज्यसभा सदस्यता की अवधि नवंबर 2026 में समाप्त होने वाली थी। अब उपराज्यपाल के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने के बाद उनके राजनीतिक और संवैधानिक दायित्वों में महत्वपूर्ण बदलाव होगा।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत का रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्रशासित प्रदेश है। हिंद महासागर में इसकी भौगोलिक स्थिति देश की समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम मानी जाती है। उपराज्यपाल केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासन और संवैधानिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नियुक्ति के बाद डॉ. शर्मा ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और भाजपा नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए केवल पद नहीं बल्कि संविधान, राष्ट्र और सार्वजनिक सेवा के प्रति जिम्मेदारी है। उन्होंने नई भूमिका को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने की बात कही।
इस नियुक्ति का उत्तर प्रदेश की राजनीति के संदर्भ में भी महत्व है, क्योंकि डॉ. शर्मा लंबे समय तक राज्य की सरकार और संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय रहे हैं। लखनऊ के महापौर से लेकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और फिर राज्यसभा सदस्य तक उनका राजनीतिक सफर रहा है। अब अंडमान और निकोबार का प्रशासन उनके सार्वजनिक जीवन का नया चरण होगा।
राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक सूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से लागू होगी। इसलिए औपचारिक रूप से नई जिम्मेदारी संभालने की तारीख आगे अलग से तय की जाएगी।
स्रोत: राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक प्रेस कम्युनिके, 5 सितंबर 2026; अन्य सार्वजनिक रिपोर्टों से तथ्य-जांच।