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इंडोनेशिया में Anak Krakatau ज्वालामुखी फटा, जकार्ता एयरपोर्ट पर 209 उड़ानें प्रभावित

संपादक: Arvind Kumar Sahani |प्रकाशित: 06 सितम्बर 2026, 10:47 पूर्वाह्न
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जकार्ता, 6 सितंबर 2026: इंडोनेशिया में Anak Krakatau ज्वालामुखी की बढ़ी हुई गतिविधि ने रविवार को हवाई यातायात पर बड़ा असर डाला। ज्वालामुखी से निकली राख के हवाई मार्गों तक पहुंचने के बाद राजधानी जकार्ता के प्रमुख Soekarno-Hatta International Airport पर उड़ान संचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। ताजा रिपोर्टों के अनुसार इस व्यवधान से 209 उड़ानें प्रभावित हुईं और करीब 22,800 यात्रियों पर असर पड़ा।

इंडोनेशिया की परिवहन व्यवस्था और हवाईअड्डा प्रशासन ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उड़ानों को रोकने का फैसला किया। Reuters और Associated Press की रिपोर्ट के मुताबिक ज्वालामुखी की राख विमान के इंजन और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। इसी वजह से राख की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद एयरपोर्ट संचालन को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया।

50 हजार फीट तक पहुंचा राख का गुबार

रिपोर्टों के अनुसार Anak Krakatau से निकले राख के गुबार अलग-अलग दिशाओं में फैल रहे हैं। एक राख का गुबार करीब 20 हजार फीट तक पहुंचा, जबकि दूसरा लगभग 50 हजार फीट की ऊंचाई तक दर्ज किया गया। इसके चलते जकार्ता, बैंटन, पश्चिमी जावा और सुमात्रा के कुछ हिस्सों में विमानन गतिविधियों पर असर पड़ा। कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी इसका प्रभाव पड़ा है।

अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे एयरलाइन से अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि करने के बाद ही एयरपोर्ट के लिए निकलें। कई यात्रियों को उड़ानों के रद्द होने या समय बदलने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा। इंडोनेशिया के अन्य हवाई अड्डों पर भी ज्वालामुखीय राख के कारण कुछ उड़ानों के रद्द या प्रभावित होने की सूचना है।

स्थानीय इलाकों में राख और स्वास्थ्य को लेकर चिंता

ज्वालामुखीय राख का असर केवल विमानन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। स्थानीय लोगों ने आंखों में जलन और राख के कारण असुविधा की शिकायत की है। अधिकारियों ने लोगों को अनावश्यक रूप से खुले में जाने से बचने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षात्मक मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। कुछ क्षेत्रों में स्कूल और मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों को भी एहतियात के तौर पर प्रभावित किया गया है।

इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार फिलहाल इस विस्फोट से तत्काल सुनामी का खतरा नहीं बताया गया है। हालांकि, ज्वालामुखी की गतिविधि पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। लोगों और पर्यटकों को सक्रिय क्रेटर के आसपास कम से कम 3 किलोमीटर की दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।

2018 की घटना की वजह से बढ़ी सतर्कता

Anak Krakatau सुंडा जलडमरूमध्य में जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच स्थित है। यह क्षेत्र प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ में आता है और यहां ज्वालामुखीय गतिविधियां आम हैं। दिसंबर 2018 में Anak Krakatau की गतिविधि के बाद हुए भूस्खलन ने समुद्र में सुनामी पैदा की थी, जिसमें 430 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इसी पुराने हादसे को देखते हुए मौजूदा गतिविधि के दौरान अधिकारी विमानन, समुद्री क्षेत्र और स्थानीय आबादी की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

ताजा घटनाक्रम में फिलहाल सबसे बड़ी चिंता राख के फैलाव और हवाई यातायात पर उसके असर को लेकर है। अधिकारियों और विमानन एजेंसियों की निगरानी जारी है तथा उड़ानों की स्थिति ज्वालामुखी की गतिविधि और हवा की दिशा के अनुसार बदल सकती है।

स्रोत: Reuters, Associated Press, Al Jazeera और इंडोनेशिया के संबंधित विमानन/आपदा प्रबंधन अधिकारियों से प्राप्त जानकारी।