नई दिल्ली: मध्य पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंता के बीच गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी गई। बाजार में सऊदी अरब की ओर से ओमान के रास्ते अतिरिक्त कच्चा तेल उपलब्ध कराने की खबर से आपूर्ति बाधित होने की आशंका कुछ कम हुई है।
Reuters की 17 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, एशियाई कारोबार में ब्रेंट और WTI दोनों में शुरुआती गिरावट दर्ज हुई और दोनों प्रमुख बेंचमार्क में एक समय 1 डॉलर प्रति बैरल से अधिक की कमी आई। इसके बावजूद कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहीं, क्योंकि मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने की आशंका पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
सऊदी सप्लाई रणनीति पर बाजार की नजर
रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने ओमान के जरिए अतिरिक्त कच्चे तेल की खेप उपलब्ध कराने की पेशकश की है। इससे बाजार को संकेत मिला कि कुछ आपूर्ति मार्गों में व्यवधान की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है।
भारत पर क्या असर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आयात बिल, परिवहन लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, कीमतों में नरमी रहने पर आयात लागत में कुछ राहत मिल सकती है। घरेलू पेट्रोल-डीजल कीमतों पर असर कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
तथ्य-जांच: तेल बाजार की ताजा दिशा और सऊदी अतिरिक्त आपूर्ति संबंधी जानकारी Reuters की 17 सितंबर 2026 की रिपोर्ट से सत्यापित की गई है।