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कुशीनगर कस्तूरबा गांव का 205 नंबर नलकूप दो साल से शोपीस विभागीय उदासीनता पर ग्रामीणों में गहरा रोष

संपादक: Vipendra Yadav |प्रकाशित: 28 नवम्बर 2025, 10:52 पूर्वाह्न
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कुशीनगर कस्तूरबा गांव का 205 नंबर नलकूप दो साल से शोपीस विभागीय उदासीनता पर ग्रामीणों में गहरा रोष

कुशीनगर जिले के फाजिलनगर ब्लॉक के कस्तूरबा गांव में वर्ष 2023-24 में निर्मित 2100 नलकूप परियोजना का नलकूप संख्या 205 आज भी शोपीस बना हुआ है। दो वर्ष बीत जाने के बावजूद विभाग इसकी विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित नहीं कर सका है जिसके कारण यह नलकूप सिर्फ कागजों में चालू और जमीन पर बेकार पड़ा है। सैकड़ों किसानों की उम्मीदें अधर में लटकी हैं और खेतों की सिंचाई आज भी निजी साधनों पर टिकी हुई है।

दो साल पहले बना नलकूप, पर बिजली कनेक्शन आज तक नहीं

स्थलीय निरीक्षण में पता चला है कि विद्युत ट्रांसफार्मर लगाया जा चुका है, लेकिन मेन लाइन से जोड़ने के लिए न बिजली पोल लगाए गए हैं और न ही विद्युत तार, आवश्यक उपकरणों के अभाव में नलकूप चालू नहीं हो पा रहा है सरकार की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने की मंशा के बीच विभागीय लापरवाही किसानों के लिए बड़ी समस्या पैदा कर रही है।

किसानों की 100+ एकड़ भूमि सिंचाई के लिए अभी भी निजी साधनों पर निर्भर

कस्तूरबा गांव और आसपास के किसानों का कहना है कि नलकूप लगने से सिंचाई आसान होने की आशा थी, लेकिन दो साल से बिजली न मिलने के कारण किसान डीजल पंप और निजी मोटरों पर निर्भर हैं, अतिरिक्त खर्च के कारण खेती लागत बढ़ गई है, धान-गेहूं जैसी फसलों की समय पर सिंचाई नहीं हो पा रही ग्रामीणों में विभाग के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

पूर्व ग्राम प्रधान व भाजपा नेता सहाजन गोंड ने दिया था निजी जमीन

कस्तूरबा गांव के पूर्व प्रधान और भाजपा नेता सहाजन गोंड ने बड़ी नाराजगी जताते हुए कहा इस नलकूप के लिए मैंने अपनी निजी जमीन दी और विभाग से प्रयास कर इसे लगवाया था। लेकिन विद्युत व्यवस्था के लिए लगने वाले खंभों को गांव के कुछ दबंगों ने अपने खेत के किनारे से नहीं लगने दिया। इसी कारण आज तक बिजली की सप्लाई नहीं हो पाई। सहाजन गोंड के अनुसार: ग्रामीणों ने विभाग को लिखित शिकायत दी, मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की,लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई इस उदासीनता के कारण नलकूप का संचालन अधर में लटका हुआ है।

छलावा बनकर रह गया है नलकूप ग्रामीण

नलकूप के पास अपने खेतों में काम कर रहे ग्रामीण मित्रसेन यादव, रघुवंशी यादव, सुभाष गोंड, राहुल सिंह, रामचंद्र, रामाकांत आदि ने कड़ी नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना है: नलकूप से सुलभ सिंचाई की आस जगी थी, लेकिन यह छलावा साबित हो रहा है। न बिजली पोल, न तार… और न ही कोई विभागीय अधिकारी सुनने वाला। अगर तत्काल बिजली कनेक्शन नहीं दिया गया तो हम आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों के अनुसार, बिजली सप्लाई होते ही पूरे इलाके की सिंचाई समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है।

सरकारी योजनाओं पर प्रश्नचिह्न

2100 नलकूप परियोजना सरकार की महत्वपूर्ण सिंचाई योजना है, जिसमें उद्देश्य: ग्रामीण किसानों को निःशुल्क या कम लागत में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना खेतों में फसल उत्पादन बढ़ाना निजी पंपिंग सेट पर किसानों की निर्भरता कम करना लेकिन कस्तूरबा गांव का मामला दिखाता है कि: विभागीय भ्रष्टाचार, उदासीनता, और स्थानीय दबंगई जैसी समस्याओं के कारण सरकारी योजनाएं जमीन पर सही रूप से लागू नहीं हो पा रही हैं।

ग्रामीणों की मांग तुरंत विद्युत पोल लगाकर सप्लाई सुनिश्चित की जाए

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें: नलकूप संख्या 205 को तत्काल मुख्य बिजली लाइन से जोड़ा जाए, विद्युत पोलों की स्थापना बिना देरी के कराई जाए, तार, मीटर और सुरक्षा उपकरण तुरंत लगाए जाएं, नलकूप का परिचालन शुरू कर किसानों की सुविधा बहाल की जाए ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक आंदोलन करेंगे।

विभागीय अधिकारियों की चुप्पी सवालों के घेरे में

पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों का रवैया बेहद लापरवाह रहा है। कई बार शिकायतों के बावजूद: न कोई स्थलीय निरीक्षण, न कोई लिखित जवाब, न कोई कार्रवाई की प्रक्रिया इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और वे इसे सरकारी धन की बर्बादी बताते हैं।

1. नलकूप संख्या 205 कब बनाया गया था?

वर्ष 2023-24 में 2100 नलकूप योजना के तहत इसका निर्माण हुआ था।

2. नलकूप चालू क्यों नहीं हो पाया?

बिजली पोल और मेन लाइन से कनेक्शन न होने के कारण।

3. क्या ग्रामीणों ने शिकायत की है?

हाँ, विभाग को लिखित शिकायत और मुख्यमंत्री पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दोनों की गई हैं।

4. किसने नलकूप के लिए निजी जमीन दी थी?

पूर्व प्रधान और भाजपा नेता सहाजन गोंड ने।

5. आगे ग्रामीण क्या करेंगे?

यदि जल्द समाधान न मिला तो ग्रामीण आंदोलन करेंगे।