नई दिल्ली, 8 सितंबर 2026: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर भारतीय रुपये पर मंगलवार को दिखाई दिया। कारोबार के दौरान रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.69 तक कमजोर हुआ। Reuters की बाजार रिपोर्ट के मुताबिक रुपये में करीब 0.2 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि Brent crude 97 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया।
बाजार में दबाव की प्रमुख वजह मध्य-पूर्व से जुड़ा भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। तेल की कीमत बढ़ने पर भारत जैसे बड़े कच्चा तेल आयातक देश का आयात बिल बढ़ सकता है, जिससे डॉलर की मांग और रुपये पर दबाव बढ़ने की संभावना रहती है।
RBI के हस्तक्षेप से गिरावट सीमित
Reuters के अनुसार Reserve Bank of India ने सरकारी बैंकों के माध्यम से विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया, जिससे रुपये की गिरावट सीमित रही। कारोबारियों का अनुमान है कि निकट अवधि में USD/INR लगभग 94.50 से 95 के दायरे में रह सकता है, हालांकि तेल की कीमत और वैश्विक घटनाक्रम दिशा तय करने में अहम रहेंगे।
यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब RBI हाल के सप्ताहों में रुपये को स्थिर रखने के लिए सक्रिय रहा है। इससे पहले बैंकिंग और बाजार सूत्रों ने बताया था कि केंद्रीय बैंक ने पिछले सप्ताह कम से कम 8 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा बिक्री की थी। हालांकि यह आंकड़ा आधिकारिक तौर पर RBI द्वारा जारी साप्ताहिक हस्तक्षेप संख्या नहीं है और इसे बाजार सूत्रों का अनुमान समझना चाहिए।
आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार मजबूती बनी रहती है तो भारत के पेट्रोलियम आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर आगे चलकर मुद्रास्फीति, व्यापार घाटे और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। हालांकि पेट्रोल-डीजल या घरेलू गैस की खुदरा कीमतों में तत्काल बदलाव का अनुमान केवल इस एक दिन के रुपये-तेल उतार-चढ़ाव से लगाना उचित नहीं होगा।
बाजार की नजर अब मध्य-पूर्व की स्थिति, तेल की अगली चाल और RBI के विदेशी मुद्रा बाजार में रुख पर रहेगी। सितंबर में विदेशी निवेशकों की भारतीय इक्विटी और बॉन्ड बाजार से निकासी भी रुपये के लिए अतिरिक्त दबाव का कारण बनी हुई है।
स्रोत: Reuters और उपलब्ध बाजार रिपोर्ट। आंकड़े कारोबार के दौरान बदल सकते हैं।