नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बुधवार को और गंभीर हो गया। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य इस्तेमाल वाले एक ठिकाने पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 10 जहाजों को निशाना बनाया। यह घटनाक्रम अमेरिका की ओर से पांच ईरानी तेल टैंकरों को नष्ट किए जाने के बाद सामने आया है।
Reuters के अनुसार, जॉर्डन ने बताया कि उसकी वायु रक्षा ने अधिकांश मिसाइलों को रोक दिया। अमेरिकी अधिकारियों ने भी कहा कि अमेरिकी सैनिक सुरक्षित हैं और हमले से कोई प्रभावी सैन्य क्षति नहीं हुई। ईरान ने अपने हमले को अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में की गई कार्रवाई बताया है।
होर्मुज में बढ़ा समुद्री जोखिम
IRGC के मुताबिक उसके बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 10 जहाजों को निशाना बनाया, जिनमें दो अमेरिकी जहाज और आठ तेल टैंकर शामिल बताए गए हैं। ईरान ने संबंधित समुद्री क्षेत्र को असुरक्षित बताते हुए जहाजों के आवागमन पर चेतावनी दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, इसलिए यहां सैन्य तनाव बढ़ने का असर तेल और शिपिंग बाजार पर पड़ सकता है।
अमेरिका ने पांच ईरानी तेल टैंकर नष्ट किए
अमेरिकी सेना ने मंगलवार को पांच ईरानी तेल टैंकरों को नष्ट करने की जानकारी दी थी। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक यह कार्रवाई ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर मिसाइल हमलों के जवाब में की गई। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि कार्रवाई से पहले टैंकरों के चालक दल को जहाज खाली करने के निर्देश दिए गए थे।
तेल बाजार पर भी असर
मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियां बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। Strait of Hormuz के आसपास किसी भी लंबे व्यवधान से वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन लागत प्रभावित हो सकती है। Reuters और Financial Times की रिपोर्टों के अनुसार, Brent crude की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास या उससे ऊपर पहुंची है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए लंबे समय तक महंगा कच्चा तेल महंगाई, ईंधन लागत और व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ा सकता है।
क्षेत्रीय संघर्ष फैलने की आशंका
तनाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। यमन के हूती समूह ने भी सऊदी अरब में ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं, जिनमें तेल प्रतिष्ठानों को नुकसान और दर्जनों लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है। इन घटनाओं से पश्चिम एशिया में समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।
महत्वपूर्ण: जॉर्डन और अमेरिकी पक्ष ने ईरान के दावों के विपरीत हमले की प्रभावशीलता को सीमित बताया है। इसलिए इस रिपोर्ट में किसी कथित बड़े नुकसान या अमेरिकी ठिकाने के नष्ट होने का दावा नहीं किया गया है। स्थिति तेजी से बदल रही है और आगे की सैन्य कार्रवाई तथा कूटनीतिक प्रतिक्रिया पर नजर बनी हुई है।
स्रोत: Reuters, Associated Press और Financial Times की प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर तथ्य सत्यापित किए गए हैं।