भारत के वित्तीय बाजार में डिजिटल प्रतिभूतियों की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने ‘Demat 2.0’ पायलट शुरू किया है। इसका उद्देश्य कॉरपोरेट बॉन्ड के निपटान को अधिक तेज, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाना है।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार पायलट में कॉरपोरेट बॉन्ड को टोकनाइज करने और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के जरिए सेटलमेंट की संभावनाएं परखी जा रही हैं। डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट जैसी तकनीकें इस मॉडल का हिस्सा हैं।
पायलट में CDSL, NSDL, BSE, NSE, HDFC Bank, ICICI Bank और NPCI जैसे प्रमुख संस्थानों की भागीदारी बताई गई है। शुरुआती चरण में तीन बॉन्ड इश्यू शामिल किए गए, जिनमें Larsen & Toubro का 500 करोड़ रुपये का बॉन्ड भी बताया गया है।
यदि मॉडल बड़े स्तर पर सफल रहता है तो भविष्य में टोकनाइजेशन का उपयोग अन्य परिसंपत्ति वर्गों में भी बढ़ सकता है। इसका संभावित लाभ तेज सेटलमेंट, स्वामित्व का बेहतर रिकॉर्ड और कुछ मामलों में लेनदेन लागत में कमी के रूप में देखा जा रहा है।
स्रोत: Indian Express की 10 सितंबर 2026 की रिपोर्ट।