बाराबंकी, 28 जून 2026 | समाज के समग्र विकास, मानवीय मूल्यों के संरक्षण तथा जन-जागरूकता के क्षेत्र में पिछले तीन दशकों से निरंतर कार्य कर रहा जलांचल प्रगति पथ संस्थान अब पर्यावरण संरक्षण को अपने सामाजिक अभियानों का प्रमुख आधार बनाते हुए व्यापक जन-जागरूकता अभियान शुरू करने जा रहा है। संस्था ने शिक्षा, नशामुक्ति, महिला सशक्तिकरण, युवा नेतृत्व विकास, सामाजिक न्याय एवं सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने के बाद अब जल संरक्षण, वृक्षारोपण, मृदा संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का संकल्प लिया है। संस्था का कहना है कि वर्तमान समय में पर्यावरणीय संकट केवल प्रकृति का नहीं बल्कि मानव सभ्यता के अस्तित्व का सबसे बड़ा प्रश्न बन चुका है। यदि समय रहते समाज नहीं जागा तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले 30 वर्षों में संस्था ने ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार, नशे के विरुद्ध जागरूकता, महिला अधिकारों की रक्षा, युवा नेतृत्व विकास, सामाजिक समरसता तथा जनहित से जुड़े अनेक कार्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित किए हैं। संस्था का उद्देश्य हमेशा समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की धारा पहुंचाना रहा है। इसी सोच के साथ विभिन्न जिलों में कार्यशालाएं, संगोष्ठियां, जनसंवाद, प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान तथा सामाजिक सहभागिता आधारित गतिविधियां आयोजित की जाती रही हैं। संस्था का मानना है कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल आर्थिक संसाधनों में नहीं बल्कि जागरूक नागरिकों, शिक्षित समाज, सशक्त महिलाओं और जिम्मेदार युवाओं में निहित होती है। संस्था के अनुसार युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि युवाओं को सही दिशा, उचित मार्गदर्शन तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से जोड़ा जाए तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन के सबसे बड़े वाहक बन सकते हैं। इसी उद्देश्य से संस्था निरंतर युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने तथा सामाजिक सेवा की भावना को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है।

संस्था ने वर्तमान समय की सबसे गंभीर चुनौती के रूप में पर्यावरण संरक्षण को चिन्हित किया है। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जलस्रोतों का लगातार सूखना, भूजल स्तर का गिरना, जंगलों की अंधाधुंध कटाई, वायु एवं जल प्रदूषण, मृदा की उर्वरता में कमी तथा जैव विविधता का तेजी से समाप्त होना पूरी मानव सभ्यता के लिए खतरे की घंटी है। यदि अभी भी समाज नहीं जागा तो भविष्य में जल संकट, खाद्य संकट तथा जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएं और विकराल रूप धारण कर सकती हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए संस्था ने अपने सामाजिक अभियानों में पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में वृक्षारोपण अभियान, जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम, मृदा संरक्षण अभियान, पर्यावरणीय संवाद, स्वच्छता अभियान, विद्यालय आधारित जागरूकता कार्यक्रम, युवा सहभागिता अभियान तथा सामुदायिक जनसंवाद आयोजित किए जाएंगे। संस्था का मानना है कि केवल सरकारी योजनाओं के भरोसे पर्यावरण संरक्षण संभव नहीं है। जब तक प्रत्येक नागरिक स्वयं जिम्मेदारी नहीं निभाएगा तब तक प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण संभव नहीं हो सकेगा।
बैठक में जिला अध्यक्ष अंगद कुमार कश्यप, राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी उज्ज्वल राज निषाद, संतोष कश्यप, प्रिन्स, डॉ. उमेश कश्यप, श्याम सुन्दर कश्यप, राम किशन, मुन्ना लाल, शिवम कश्यप, जितेन्द्र कश्यप, सुनील कश्यप, राज करन, दिलीप निषाद, कन्हैयालाल निषाद तथा मनोज कश्यप सहित संस्था के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक आंदोलन बनाने पर बल दिया तथा जनभागीदारी बढ़ाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों, विभागों अथवा सामाजिक संस्थाओं का दायित्व नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक एवं सामाजिक जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिवर्ष कम से कम एक पौधा लगाए, जल की एक-एक बूंद बचाने का प्रयास करे, प्लास्टिक के उपयोग को कम करे तथा प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करे तो आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य प्रदान किया जा सकता है। संस्था ने समाज के सभी वर्गों, युवाओं, महिलाओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया है। संस्था ने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में शिक्षा, नशामुक्ति, महिला सशक्तिकरण, युवा नेतृत्व विकास, सामाजिक जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए प्रदेशव्यापी अभियान संचालित किए जाएंगे, जिससे समाज में जागरूकता के साथ-साथ जनसहभागिता भी बढ़े।
