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भारत ने बाघ संरक्षण पर दुनिया के सामने रखा मजबूत पक्ष केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव कॉप 30 में शामिल

संपादक: Arvind Kumar Sahani |प्रकाशित: 18 नवम्बर 2025, 12:24 अपराह्न
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भारत ने बाघ संरक्षण पर दुनिया के सामने रखा मजबूत पक्ष केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव कॉप 30 में शामिल

भारत 2026 में नई दिल्ली में करेगा वैश्विक बिग कैट्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी

बेलेम, ब्राज़ील | 18 नवंबर 2025
केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ब्राज़ील के बेलेम शहर में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (UNFCCC) कॉप 30 में हिस्सा लिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाघ गठबंधन (IBCA) की उच्च-स्तरीय मंत्रिस्तरीय सभा में भारत का पक्ष रखते हुए वैश्विक समुदाय से पैंथेरा वंश की प्रजातियों और उनके आवासों को बचाने के लिए सामूहिक प्रयासों की अपील की। सभा में नेपाल सरकार के कृषि एवं पशुधन मंत्री डॉ. मदन प्रसाद परियार भी मौजूद थे। मंत्री ने इस आयोजन की मेजबानी के लिए ब्राज़ील सरकार का आभार जताया और कहा कि जलवायु तथा जैव विविधता की चुनौतियाँ आज पहले से अधिक जुड़ी हुई हैं, इसलिए समाधान भी जुड़े हुए होने चाहिए।

भारत ने दोहराया अपना वैश्विक नेतृत्व

भूपेंद्र यादव ने बताया कि पैंथेरा वंश की प्रजातियाँ यानी बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और जगुआर सिर्फ वन्यजीव नहीं हैं बल्कि पारिस्थितिक संतुलन और जंगलों के स्वास्थ्य के प्रमुख प्रहरी हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ ये बड़े मांसाहारी जीव पनपते हैं वहां जंगल अधिक स्वस्थ रहते हैं और कार्बन संग्रहण भी अधिक प्रभावी होता है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि इन प्रजातियों में गिरावट से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता प्रभावित होती है और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता भी कमजोर पड़ती है। उन्होंने घोषणा की कि भारत सरकार वर्ष 2026 में नई दिल्ली में वैश्विक बिग कैट्स शिखर सम्मेलन आयोजित करेगी जिसमें सभी देशों को आमंत्रित किया जाएगा।

बिग कैट लैंडस्केप्स को बताया प्रकृति आधारित जलवायु समाधान

कॉप 30 में मंत्री ने कहा कि बड़े बिल्ली प्रजाति वाले क्षेत्र जलवायु शमन और अनुकूलन के लिए सबसे असरदार प्रकृति-आधारित समाधान हैं।

उन्होंने कहा:
जिसे हम वन्यजीव संरक्षण कहते हैं, वह असल में सबसे सच्चे रूप में जलवायु कार्रवाई है।

यादव ने बताया कि बिग कैट लैंडस्केप्स का संरक्षण कार्बन पृथक्करण, जलग्रहण संरक्षण, सतत आजीविका, आपदा जोखिम में कमी और जलवायु अनुकूलन को मजबूत बनाता है। उन्होंने IBCA द्वारा तकनीकी सहायता, क्षमता-निर्माण, मानकीकृत उपकरण, दक्षिण-दक्षिण सहयोग और जैव विविधता-कार्बन क्रेडिट तंत्र के जरिए देशों को दी जा रही सहायता का उल्लेख किया।

भारत की सफलताएँ दुनिया के सामने रखीं

मंत्री ने बताया कि सात वैश्विक बिग कैट प्रजातियों में से पाँच भारत में पाई जाती हैं। भारत ने पिछले एक दशक में बाघ संरक्षण में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि भारत ने लक्ष्य समय-सीमा से पहले ही बाघों की आबादी दोगुनी कर दी है। एशियाई शेरों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। भारत बाघ, शेर, तेंदुआ और हिम तेंदुआ की आबादी का देशव्यापी आकलन करता है और उसके पास दुनिया के सबसे विस्तृत वन्यजीव डेटाबेस में से एक है। मंत्री ने यह भी बताया कि भारत ने संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार किया, वन्यजीव गलियारों को सुरक्षित किया और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर संरक्षण आधारित रोज़गार को मजबूत किया।

IBCA का विस्तार और भारत की भूमिका

भूपेंद्र यादव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित है जो विश्वास और साझी जिम्मेदारी पर आधारित है। यह गठबंधन एक पृथ्वी, एक विश्व, एक भविष्य के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने बताया कि:

  1. 17 देश औपचारिक रूप से IBCA से जुड़ चुके हैं
  2. 30 से अधिक देशों ने इसमें शामिल होने की इच्छा जताई है

भारत की महत्वाकांक्षा है कि पैंथेरा वंश की प्रजातियों वाले सभी देश और वे देश जो जैव विविधता तथा जलवायु सुरक्षा को महत्व देते हैं, इस वैश्विक साझेदारी का हिस्सा बनें।

वैश्विक एकता की अपील

मंत्री ने कहा कि दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां प्रकृति अपनी संरचना बदल रही है। ऐसे समय में देशों को प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहयोग की जरूरत है।

उन्होंने कहा
हमें अलग-अलग नहीं, बल्कि एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा। पैंथेरा वंश की रक्षा करना अपने ग्रह और अपने भविष्य की रक्षा करना है।