नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026। यूरो जोन की महंगाई अगस्त में फिर 3 प्रतिशत के ऊपर पहुंच गई है। Reuters के अनुसार ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी ने महंगाई को ऊपर धकेला है, जिससे यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की सितंबर बैठक में ब्याज दर बढ़ाने की बाजार उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।
अगस्त की महंगाई में ऊर्जा लागत की भूमिका अहम रही। मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने यूरोप के लिए आयातित ऊर्जा लागत बढ़ाने का जोखिम पैदा किया है।
बाजार अब सितंबर में ECB की दर वृद्धि को लगभग पूरी तरह कीमतों में शामिल कर रहा है। अगर ऊर्जा कीमतों का दबाव लंबे समय तक बना रहता है, तो यूरोप में महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सख्त मौद्रिक नीति अधिक समय तक जारी रह सकती है।
भारत के लिए भी इसका अप्रत्यक्ष महत्व है। यूरोप भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार है और यूरोपीय ब्याज दरों में बदलाव से वैश्विक बॉन्ड यील्ड, मुद्रा बाजार और निवेश प्रवाह प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि इसका भारतीय बाजार पर असर कई अन्य वैश्विक कारकों के साथ मिलकर तय होगा।
स्रोत: Reuters, 1 सितंबर 2026।