लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों के पुनर्नियोजन की अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष करने का फैसला किया है। सरकार के अनुसार इस व्यवस्था के तहत 500 निःसंवर्गीय पदों पर सेवानिवृत्त विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं ली जाएंगी। यह फैसला 9 सितंबर 2026 को सामने आया और 10 सितंबर को भी इसकी जानकारी प्रमुख रूप से रिपोर्ट की गई।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पुनर्नियुक्ति अनुबंध के आधार पर वॉक-इन इंटरव्यू के जरिए होगी। डॉक्टरों को नियमित संवर्गीय पद देने के बजाय कन्सलटेन्ट या परामर्शी के रूप में तैनात किया जाएगा। उनका पुनर्नियोजन संबंधित पद पर नियमित चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति होने या एक वर्ष की अवधि पूरी होने, इनमें से जो पहले हो, तक रहेगा। इसके बाद जरूरत और निर्धारित शर्तों के आधार पर अवधि वर्ष-दर-वर्ष बढ़ाई जा सकती है, लेकिन अधिकतम आयु सीमा 70 वर्ष रहेगी।
500 निःसंवर्गीय पदों पर नियुक्ति
अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष के हवाले से प्रकाशित जानकारी के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 500 निःसंवर्गीय पद तय किए गए हैं। नियमित विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति होने पर संबंधित निःसंवर्गीय पद समाप्त हो जाएंगे और किसी भी स्थिति में पुनर्नियोजन की संख्या 500 से अधिक नहीं होगी।
पुनर्नियुक्त विशेषज्ञ डॉक्टरों को अस्पताल की आवश्यकता के अनुसार आपातकालीन और आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं में भी योगदान देना होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों के बढ़ते दबाव के बीच अनुभवी विशेषज्ञों की उपलब्धता बनाए रखना है।
प्राइवेट प्रैक्टिस पर रहेगा प्रतिबंध
सरकार की शर्तों के अनुसार पुनर्नियुक्त विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं होगी। अस्पताल में सरकारी नियमों के तहत उपलब्ध दवाओं की ही संस्तुति की जा सकेगी। निर्धारित शर्तों का उल्लंघन होने पर पुनर्नियोजन समाप्त किया जा सकता है।
इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सरकार ने इसे स्थायी भर्ती का विकल्प नहीं बताया है। नियमित नियुक्तियां होने तक अनुभवी डॉक्टरों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए यह अस्थायी व्यवस्था है। इसलिए इसका वास्तविक असर अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता और नियमित भर्ती की गति, दोनों पर निर्भर करेगा।
सेवानिवृत्त डॉक्टरों के अनुभव का इस्तेमाल
स्वास्थ्य व्यवस्था में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के बीच सरकार का यह कदम उपलब्ध अनुभवी मानव संसाधन का उपयोग करने की कोशिश है। खासकर उन सरकारी अस्पतालों में, जहां विशेषज्ञ सेवाओं की मांग अधिक है, पुनर्नियुक्त डॉक्टर तत्काल सेवा क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि मरीजों के लिए इसका लाभ अस्पताल-वार नियुक्तियों और स्थानीय जरूरत के अनुसार तय होगा।
स्रोत: उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय पर आधारित जानकारी की पुष्टि के लिए Times of India, Amar Ujala और Free Press Journal की 9-10 सितंबर 2026 की रिपोर्टों का मिलान किया गया है।