नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026: भारत के बिजली क्षेत्र में अगस्त के दौरान एक अहम बदलाव दर्ज हुआ। ग्रिड-इंडिया के आंकड़ों के आधार पर Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कोयले से बनने वाली बिजली की वार्षिक वृद्धि दर धीमी पड़ी, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में बढ़ोतरी हुई। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब बिजली की मांग ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
आंकड़े बताते हैं कि बिजली की बढ़ती जरूरत पूरी करने में कोयला अब भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, लेकिन सौर और पवन ऊर्जा समेत नवीकरणीय स्रोतों का उत्पादन बढ़ने से कुल बिजली मिश्रण में उनका योगदान मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों के लिए यह बदलाव भारत के ऊर्जा संक्रमण की दिशा को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना भारत के लिए बड़ी चुनौती है। उद्योग, घरेलू उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र में बिजली की जरूरत बढ़ने के साथ उत्पादन क्षमता में लगातार विस्तार जरूरी है। वहीं, नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते हिस्से के कारण ग्रिड प्रबंधन, भंडारण क्षमता और ट्रांसमिशन नेटवर्क पर भी ध्यान देना होगा।
अगस्त के ये आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत की ऊर्जा व्यवस्था में पारंपरिक ईंधन और नवीकरणीय स्रोत दोनों फिलहाल साथ-साथ महत्वपूर्ण हैं। आने वाले महीनों में मांग, मौसम और नवीकरणीय उत्पादन की स्थिति इस मिश्रण को प्रभावित कर सकती है।
स्रोत: Grid-India के आंकड़ों पर आधारित Reuters रिपोर्ट।