जर्जर नाव हादसा: ठेकेदार की लापरवाही से बच्चे की मौत, विधायक ई. सरवन निषाद बोले—दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा

गोरखपुर।
गोरखपुर जिले के झंगहा करही क्षेत्र में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब ठेकेदार की लापरवाही के चलते एक जर्जर नाव नदी में पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में एक मासूम बच्चे की मौत हो गई, जबकि कई लोग बाल-बाल बच गए। घटना से पूरा इलाका शोक और आक्रोश में है।
हादसे की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय विधायक ई. सरवन निषाद तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्यों की निगरानी की। उन्होंने NDRF टीम, सीओ, और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को तुरंत घटनास्थल पर बुलाया और स्थिति का जायजा लिया।

विधायक सरवन निषाद ने कहा कि “इस हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी अधिकारी या ठेकेदार को बख्शा नहीं जाएगा। ठेकेदार की लापरवाही से निर्दोष बच्चे की जान गई है, इसलिए जवाबदेही तय की जाएगी।”
विधायक ने दिए कड़े निर्देश
विधायक ने जिलाधिकारी (डीएम) और वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर बात कर विभागीय मुकदमा दर्ज करने, ठेकेदार और इंजीनियरों की जांच कराने, और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि “लापरवाही और भ्रष्टाचार का नतीजा है।”
विधायक ने कहा कि वह स्वयं इस मामले की निगरानी करेंगे और इसे विधानसभा में भी उठाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।
NDRF टीम ने दो घंटे में बरामद किया शव
हादसे की खबर मिलते ही राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम मौके पर पहुँची। टीम ने नदी में तलाश अभियान चलाकर लगभग दो घंटे की मशक्कत के बाद बच्चे का शव बरामद किया।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नाव काफी पुरानी और टूटी हुई थी। उन्होंने कई बार ठेकेदार और अधिकारियों से शिकायत की थी कि नाव में दरारें हैं और पानी भर जाता है, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।

ग्रामीणों का आक्रोश: हमने चेताया था, किसी ने नहीं सुना
ग्रामीण महिला माया देवी ने कहा, “हमने कई बार कहा कि नाव टूट रही है, लेकिन ठेकेदार ने खर्च से बचने के लिए पुरानी नाव को ही चलाया। अब एक बच्चे की जान चली गई।”
गाँव के लोगों ने मांग की है कि ठेकेदार और विभागीय अभियंताओं पर सख्त कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।
विधायक की संवेदनशीलता की सराहना
विधायक सरवन निषाद ने मृतक बच्चे के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि परिवार को आपदा राहत योजना के तहत तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए।
उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार के किसी सदस्य को रोजगार दिलाने की पहल की जाएगी।
“मेरे लिए राजनीति से बड़ा इंसान का जीवन है। मैं यह सुनिश्चित करूँगा कि परिवार को न्याय और मदद दोनों मिले,” विधायक ने कहा।
प्रशासनिक जांच शुरू, ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज
डीएम ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जिसमें अपर उपजिलाधिकारी, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता, और सीओ (पुलिस उपाधीक्षक) शामिल हैं।
समिति को तीन दिनों में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नाव का ठेका एक निजी ठेकेदार को दिया गया था, जिसने तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया। विभाग ने अब ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज कर नाव संचालन की अनुमति अस्थायी रूप से निरस्त कर दी है।
सिस्टम पर उठे सवाल
इस हादसे ने स्थानीय प्रशासन और ठेका व्यवस्था की पोल खोल दी है। लोग पूछ रहे हैं कि जर्जर नाव को बार-बार शिकायतों के बावजूद क्यों चलने दिया गया?
क्या इंजीनियरों ने निरीक्षण किया था?
क्या मरम्मत प्रक्रिया में भ्रष्टाचार हुआ?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ नाव का हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी है, जहाँ मानव जीवन की कीमत ठेके के लाभ से कम आँकी जा रही है।


