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कर्तव्य पथ के अमर बलिदानी: पुलिस स्मृति दिवस पर लखनऊ में शहीदों को श्रद्धांजलि

संपादक: Ghar Tak Express News | प्रकाशित: 21 Oct 2025, 02:36 PM
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लखनऊ, 21 अक्टूबर — उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज “पुलिस स्मृति दिवस” के अवसर पर आयोजित एक भावपूर्ण कार्यक्रम में उन सभी वीर पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिन्होंने अपने कर्तव्य पथ पर सर्वोच्च बलिदान देकर प्रदेश और देश की सुरक्षा सुनिश्चित की।

इस गरिमामयी अवसर पर प्रदेश सरकार की ओर से कार्यक्रम में सम्मिलित होकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई और शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों के साथ एकजुटता व्यक्त की गई। उपस्थित गणमान्य अधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, शहीद परिवारों और आम नागरिकों ने भी इस अवसर पर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।

कार्यक्रम में वक्तव्य देते हुए वक्ता (जिसने कार्यक्रम में सम्मिलित होकर यह बयान दिया) ने कहा:

“शहीद पुलिस जनों के परिवार के सदस्यों को मैं आश्वस्त करता हूं कि हमारी सरकार उनके कल्याण और उनकी सुविधाओं के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ हर जरूरी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।”

कर्तव्य की वेदी पर बलिदान: पुलिस स्मृति दिवस का महत्व

हर वर्ष 21 अक्टूबर को देशभर में ‘पुलिस स्मृति दिवस’ मनाया जाता है। यह दिन 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में चीनी सेना द्वारा किए गए हमले में शहीद हुए 10 भारतीय पुलिसकर्मियों की याद में समर्पित है। उस ऐतिहासिक बलिदान के बाद से यह दिन समर्पण, साहस और राष्ट्रसेवा की प्रतीक बन गया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस, जो भारत के सबसे बड़े राज्य की कानून व्यवस्था को संभालती है, हर वर्ष इस अवसर पर अपने वीर सपूतों को याद करती है, जिन्होंने राज्य की जनता की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

कार्यक्रम की झलकियां: सम्मान, श्रद्धा और संकल्प

लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम में शहीदों के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। उपस्थित पुलिस बल ने परेड के माध्यम से ‘सलामी’ दी। दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।

कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आए शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को सम्मानित भी किया गया। उनके प्रति सम्मान, सहानुभूति और आभार प्रकट करते हुए सरकार ने भरोसा दिलाया कि उनका कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है।

एक भावनात्मक क्षण तब देखने को मिला जब कुछ शहीदों के छोटे-छोटे बच्चों ने मंच पर आकर अपने पिता की वीरता का वर्णन किया। पूरे पंडाल में नमी और गर्व का मिश्रित भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था।

शहीद परिवारों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता

सरकार द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों के लिए योजनाओं को और अधिक सशक्त और पारदर्शी बनाया जा रहा है। इनमें प्रमुखतः निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  • आर्थिक सहायता: तत्काल राहत राशि के अलावा लंबी अवधि की पेंशन योजना।
  • शैक्षणिक सहायता: शहीदों के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा और छात्रवृत्ति योजना।
  • स्वास्थ्य सुविधाएं: परिवार के लिए विशेष हेल्थ कार्ड और सरकारी अस्पतालों में प्राथमिकता।
  • नौकरी में प्राथमिकता: योग्य परिजनों को राज्य सरकार की सेवाओं में विशेष प्राथमिकता।

संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन योजनाओं को शीघ्रातिशीघ्र लागू करें और हर परिवार तक पहुंच सुनिश्चित करें।

वीरता की अमर गाथाएं: कुछ शहीदों की संक्षिप्त झलक

कार्यक्रम में कुछ विशेष शहीदों का उल्लेख भी किया गया, जिनमें हाल ही में आतंकवाद, डकैत विरोधी अभियानों या संगठित अपराध के विरुद्ध लड़ते हुए शहीद हुए जवानों की वीरता का वर्णन हुआ।

एक युवा कांस्टेबल की कहानी जिसने अकेले अपराधियों से भिड़ते हुए कई निर्दोषों की जान बचाई, सभी की आंखों को नम कर गई। इस अवसर पर उनके माता-पिता को मंच पर बुलाकर विशेष सम्मान दिया गया।

पुलिस बल: चुनौतियों से भरा जीवन

कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह भी उल्लेख किया कि पुलिस सेवा केवल एक नौकरी नहीं बल्कि एक सतत संघर्ष है। अपराध, आतंकवाद, साइबर क्राइम, और कानून-व्यवस्था की विभिन्न जटिलताओं से जूझते हुए पुलिसकर्मी अक्सर बिना किसी प्रशंसा के 24×7 सेवा में रहते हैं।

विशेषकर ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में कार्यरत पुलिस बल के समक्ष भौगोलिक, मानसिक और सामाजिक चुनौतियां कई गुना होती हैं, जिनका सामना वे पूरी ईमानदारी से करते हैं।

सशक्त पुलिस, सुरक्षित समाज: जनसहभागिता का आह्वान

कार्यक्रम के अंत में यह भी कहा गया कि समाज और पुलिस के बीच विश्वास की डोर को और अधिक मजबूत किया जाए। एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण प्रदेश की नींव तभी रखी जा सकती है जब जनसहभागिता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व तीनों को समान रूप से महत्व दिया जाए।

“कर्तव्य पथ पर प्राणोत्सर्ग करने वाले उत्तर प्रदेश पुलिस के वीर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि!”
— (वक्ता का वक्तव्य)

समापन: स्मृति से प्रेरणा तक

पुलिस स्मृति दिवस केवल अतीत को याद करने का दिन नहीं, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा लेने का अवसर है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि जब भी देश या राज्य पर संकट आया, हमारे पुलिसकर्मी डटकर खड़े हुए, और जब आवश्यकता पड़ी, तो उन्होंने हंसते-हंसते अपने प्राणों का बलिदान दिया।

उनके बलिदान को केवल श्रद्धांजलि से नहीं, बल्कि उनके परिवारों की देखभाल, उनके मूल्यों की रक्षा और उनके सपनों को पूरा कर ही सच्चा सम्मान दिया जा सकता है।