राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने श्री के.आर. नारायणन को उनकी जयंती पर अर्पित की पुष्पांजलि

भारत के राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज, 27 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रपति भवन में भारतीय गणराज्य के पूर्व राष्ट्रपति श्री के.आर. नारायणन को उनकी जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने उनके योगदान और भारतीय लोकतंत्र को मजबूती देने में उनकी भूमिका को याद करते हुए उन्हें सम्मानित किया। श्री के.आर. नारायणन का कार्यकाल भारतीय राजनीति और प्रशासन में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, और उनका योगदान आज भी लोगों के दिलों में ताजा है।
श्री के.आर. नारायणन: एक महान नेता की जयंती
भारत के 10वें राष्ट्रपति श्री के.आर. नारायणन का जन्म 27 अक्टूबर 1920 को केरल राज्य के चोक्कमंगलम नामक स्थान पर हुआ था। उन्होंने भारतीय राजनीति, समाज और प्रशासन के क्षेत्र में अपने अद्वितीय योगदान के कारण एक स्थायी पहचान बनाई। उनके राष्ट्रपति बनने से पहले वे भारतीय विदेश सेवा में भी कार्यरत रहे और उन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का नाम रोशन किया।
श्री के.आर. नारायणन ने राष्ट्रपति के रूप में एक निर्विवाद नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया और भारतीय राजनीति में उच्च नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया। उनका कार्यकाल भारतीय गणराज्य के लिए कई दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण था, जिसमें उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों का पालन करते हुए हमेशा अपने कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता से निभाया। वे भारतीय संविधान के प्रति अपनी गहरी निष्ठा और सम्मान के लिए प्रसिद्ध थे।

आज के श्रद्धांजलि समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन को याद करते हुए कहा, “श्री के.आर. नारायणन भारतीय राजनीति के एक महान और प्रेरणादायक नेता थे, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भारत के संविधान को मजबूती से स्थापित किया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।” राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करना भारत के लोकतंत्र और नागरिकों के प्रति उनके योगदान को सम्मानित करने का एक तरीका है।
इस मौके पर राष्ट्रपति भवन के अन्य उच्च अधिकारी भी उपस्थित थे, जिन्होंने श्री के.आर. नारायणन के जीवन और कार्यों पर चर्चा की। उन्होंने उनकी समर्पण भावना, नैतिकता, और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को सराहा। श्री के.आर. नारायणन की जयंती पर आयोजित इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन भारतीय लोकतंत्र के प्रति उनके योगदान को याद करने के उद्देश्य से किया गया था।
श्री के.आर. नारायणन का राष्ट्रपति बनने से पहले का जीवन काफी संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक था। उनका शिक्षा जीवन भी उल्लेखनीय था, और उन्होंने कोचीन विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री प्राप्त की थी। उनके राजनीतिक विचारों में समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता की मजबूत धारा थी। वे भारतीय राजनीति में एक ऐसी पहचान बनाना चाहते थे, जिसमें सभी जाति, धर्म और भाषा के लोग समान रूप से समाहित हों।
राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए, जिनमें से एक प्रमुख घटना थी 1997 में बिहार में हुए मुख्यमंत्री चुनाव पर उनका निर्णय। यह निर्णय भारतीय लोकतंत्र में राष्ट्रपति के अधिकारों की सीमा को स्पष्ट करने में अहम साबित हुआ। उन्होंने भारतीय संविधान और संसद के प्रति अपनी निष्ठा को कई बार सिद्ध किया।
श्री के.आर. नारायणन के योगदान
- लोकतंत्र की मजबूती: श्री के.आर. नारायणन ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूती देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। वे हमेशा संविधान की रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने के पक्षधर रहे।
- सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष: उनका जीवन भारतीय समाज में समानता और सामाजिक न्याय की ओर प्रेरित करता था। उन्होंने हमेशा पिछड़े वर्गों और हाशिए पर रहने वाले लोगों के अधिकारों की बात की।
- भारत का अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक चेहरा: उनके कार्यकाल में भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी कूटनीतिक स्थिति को मजबूत किया। वे एक अनुभवी राजनयिक थे, और उन्होंने भारतीय विदेश नीति को प्रगति की दिशा में मार्गदर्शन किया।
श्री के.आर. नारायणन का जीवन भारतीय समाज और राजनीति में परिवर्तन का प्रतीक था। उनका कार्यकाल राष्ट्रपति के रूप में भारतीय राजनीति की महत्वपूर्ण धारा को प्रभावित करने वाला था। उनका सरल और निष्कलंक व्यक्तित्व आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। उनकी नीतियों ने भारतीय जनता के लिए कई नई संभावनाएं खोलीं, और उनके कार्यों ने भारतीय लोकतंत्र को और सशक्त किया।
उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करने का यह अवसर हमें यह याद दिलाता है कि सार्वजनिक सेवा और निष्ठा के बिना देश की प्रगति संभव नहीं हो सकती। श्री के.आर. नारायणन ने हमें यह सिखाया कि किसी भी देश के नागरिकों के बीच समानता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए हमें अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण दिखाना होगा।


