प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छठ महापर्व कि समापन पर दी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर 2025 (PIB Delhi):
देशभर में आस्था और विश्वास के सबसे पवित्र पर्वों में से एक छठ महापर्व आज संपन्न हो गया। चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत के समापन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने भगवान सूर्यदेव और छठी मइया की उपासना करने वाले सभी व्रतियों और श्रद्धालुओं के प्रति आदर व्यक्त किया और उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ (Twitter) पर साझा किया संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में Twitter) पर लिखा –
“भगवान सूर्यदेव को प्रातःकालीन अर्घ्य के साथ आज महापर्व छठ का शुभ समापन हुआ। चार दिवसीय इस अनुष्ठान के दौरान छठ पूजा की हमारी भव्य परंपरा के दिव्य दर्शन हुए।

प्रधानमंत्री के इस संदेश को लाखों लोगों ने साझा किया और देशभर में श्रद्धालुओं ने उनके इस भावपूर्ण संदेश का स्वागत किया। कई लोगों ने लिखा कि यह त्योहार भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं की गहराई को दर्शाता है।
चार दिवसीय आस्था का पर्व: छठ पूजा का महत्व
छठ महापर्व को सूर्य उपासना का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। यह पर्व मुख्यतः बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, नेपाल और दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के क्रम से संपन्न होता है।
- पहला दिन – नहाय खाय: श्रद्धालु इस दिन गंगा या किसी पवित्र जलाशय में स्नान कर शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं।
- दूसरा दिन – खरना: इस दिन उपवास करने वाले व्रती गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर संध्या के समय ग्रहण करते हैं।
- तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य: सूर्यदेव को डूबते सूर्य के समय अर्घ्य दिया जाता है। घाटों पर लाखों श्रद्धालु दीप प्रज्वलित करते हैं, जिससे वातावरण दिव्य और भव्य बन जाता है।
- चौथा दिन – उषा अर्घ्य: अंतिम दिन प्रातःकाल उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है। इसी के साथ परिवारों में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
देशभर में दिखी भक्ति की अद्भुत छटा
वाराणसी, पटना, दिल्ली, लखनऊ, रांची, मुंबई से लेकर कोलकाता तक घाटों और नदियों के किनारे भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाएं और पुरुष परंपरागत वेशभूषा में पूजा-अर्चना करते नजर आए।
पटना के गंगा घाटों से लेकर दिल्ली के यमुना तट तक दीपों की रोशनी और भक्ति संगीत की गूंज ने माहौल को आध्यात्मिक बना दिया।
देश के विभिन्न हिस्सों से कई राजनेताओं, कलाकारों और समाजसेवियों ने भी सोशल मीडिया पर छठ पर्व की शुभकामनाएं दीं।

सूर्यदेव की उपासना का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलू
छठ पूजा केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि इसका वैज्ञानिक और पर्यावरणीय महत्व भी गहरा है। सूर्य ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है और मानव जीवन के लिए आवश्यक है।
सूर्य को जल अर्पित करने से शरीर में विटामिन-D का संतुलन बना रहता है और मनोवैज्ञानिक रूप से व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इसके अलावा, घाटों की सफाई और जल संरक्षण की परंपरा भी छठ पूजा के दौरान देखने को मिलती है, जिससे यह पर्व स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बन जाता है।
प्रधानमंत्री ने भारतीय संस्कृति की ‘भव्य परंपरा’ का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में उन्होंने कहा कि छठ महापर्व भारत की लोक संस्कृति, एकता और समर्पण का उत्सव है। प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं की भक्ति की सराहना करते हुए कहा कि छठी मइया का आशीर्वाद सभी परिवारों को सुख, समृद्धि और प्रकाश से भर दे।
छठ पूजा की बढ़ती वैश्विक पहचान
आज के समय में छठ महापर्व की पहचान केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनियाभर में बसे भारतीय प्रवासियों के बीच भी इसका विशेष स्थान है।
अमेरिका, दुबई, लंदन, नेपाल, मॉरीशस और कनाडा जैसे देशों में भारतीय समुदाय इस पर्व को पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाते हैं।
विदेशों में भी सूर्यास्त के समय सूर्यदेव को अर्घ्य देने और लोकगीत गाने की परंपरा जीवित है, जो भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान को मजबूत बनाती है।
‘छठी मइया’ के जयकारों से गूंज उठा देश
पूरे देश में “छठी मइया की जय” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। महिलाएं पारंपरिक गीत गाते हुए पूजा कर रही थीं —
”ये लोकगीत न केवल भावनाओं को व्यक्त करते हैं बल्कि सामाजिक एकता और परिवार के प्रति समर्पण का संदेश भी देते हैं।


