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भोजपुरी समाज ने पूरी दुनिया में फैलाया छठ पर्व का प्रकाश: लखनऊ में छठी मइया के जयकारों से गूंजा माहौल

संपादक: Ghar Tak Express News | प्रकाशित: 28 अक्टूबर 2025, 12:01 अपराह्न
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छठ पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि यह आस्था, आत्मशुद्धि और लोक-कल्याण का पर्व है। यह त्योहार सूर्यदेव और छठी मइया की पूजा के माध्यम से मानव जीवन में अनुशासन, शुद्धता और निस्वार्थ भाव को जागृत करता है।
भोजपुरी समाज के लोग इस पर्व को न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी अत्यंत श्रद्धा और भव्यता से मनाते हैं — चाहे वह लंदन, दुबई, न्यूयॉर्क या मॉरीशस क्यों न हो

छठ पर्व का मुख्य उद्देश्य है — सूर्य देवता की आराधना और उनके जीवनदायी प्रकाश के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना।
भोर और सांझ के समय व्रतधारी महिलाएं नदियों, तालाबों या घाटों पर खड़े होकर अर्घ्य देती हैं।
यह पर्व चार दिनों तक चलता है और इसमें नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और भोरवा अर्घ्य जैसे चरण शामिल होते हैं।

इन चारों दिनों में स्वच्छता, संयम और श्रद्धा का पालन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
भोजपुरी समाज में यह पर्व एक जीवन शैली की तरह अपनाया गया है, जो व्यक्ति को प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा देता है।

राजधानी लखनऊ में इस बार भोजपुरी समाज द्वारा छठ पर्व का आयोजन अत्यंत भव्य रूप से किया गया।
गोमती नदी के घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया
कार्यक्रम में लोकगीतों, पारंपरिक पूजा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को छठमय बना दिया।

लखनऊ के विभिन्न इलाकों — गोमतीनगर, जानकीपुरम, आलमबाग, चारबाग और हजरतगंज — में छठ पर्व की तैयारियों की झलक हर जगह दिखाई दी।
भोजपुरी समाज के लोगों ने जय छठी मइया और “सूर्य देव की जय” के जयकारों से माहौल को भक्तिमय बना दिया।

छठ पर्व को वैश्विक पहचान दिलाने में भोजपुरी समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
आज पूरी दुनिया में जहाँ भी भोजपुरी प्रवासी रहते हैं, वहाँ छठ पर्व की झांकी और पूजा अनिवार्य रूप से की जाती है।
यह पर्व भोजपुरी संस्कृति, सभ्यता और पारिवारिक मूल्यों की जीवंत पहचान है।

भोजपुरी समाज के सामाजिक संगठनों ने लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में इस पर्व को स्वच्छता और सामुदायिक एकता से जोड़ते हुए मनाया।
कई स्थानों पर महिलाओं और युवाओं ने घाटों की सफाई, जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के संदेश भी दिए।

कार्यक्रम के दौरान सभी श्रद्धालुओं ने एक ही भाव से प्रार्थना की
छठी मइया सब पर कृपा करें, सबके घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे।”
लोगों ने कहा कि छठ पर्व केवल व्रत या पूजा नहीं, बल्कि यह मन की शुद्धि और समाज की एकता का संदेश देता है।

छठी मइया के गीतों से पूरा वातावरण गूंज उठा —

“कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए…”
“छठी मइया के आवे ना भूलिहऽ, हे सूरज देव!”

ये गीत केवल संगीत नहीं, बल्कि जनमानस की भावनाओं का संगीत हैं।

आज छठ पर्व केवल बिहार, उत्तर प्रदेश या झारखंड तक सीमित नहीं रहा।
भोजपुरी समाज ने इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
अमेरिका, कनाडा, मॉरीशस, फिजी, नेपाल और खाड़ी देशों में भी अब छठ पर्व बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।

विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह पर्व अपने रoots (जड़ों) से जुड़ने का माध्यम बन चुका है।
यह पर्व भारतीय संस्कृति की सॉफ्ट पावर (soft power) का सशक्त उदाहरण बन गया है, जो विश्व को भारतीय अध्यात्म, श्रद्धा और सह-अस्तित्व का संदेश देता है।

छठ पर्व की सबसे बड़ी खूबी है — सामाजिक समानता और एकता का भाव
इसमें अमीर-गरीब, जाति या धर्म का कोई भेदभाव नहीं होता।
हर कोई एक साथ जल में खड़ा होकर सूर्य देवता को अर्घ्य देता है।
यही दृश्य भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता (Unity in Diversity) की झलक प्रस्तुत करता है।

लखनऊ जैसे महानगर में यह एक सांस्कृतिक संगम बन चुका है, जहाँ सभी समुदाय एक साथ मिलकर छठ पर्व की भव्यता का आनंद लेते हैं।