इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन से मिले वैश्विक सीईओ स्वास्थ्य और शिक्षा में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका पर जोर

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 उपराष्ट्रपति से मुलाकात में उभरा एआई का भविष्य विज़न
नई दिल्ली।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 में भाग लेने वाले विभिन्न देशों और प्रतिष्ठित कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) तथा प्रतिनिधियों के एक समूह ने उपराष्ट्रपति भवन में भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के बदलते वैश्विक परिदृश्य उसके सामाजिक प्रभाव और भारत की भूमिका पर गंभीर चर्चा हुई बैठक का माहौल औपचारिक होने के बावजूद विचारों के आदान-प्रदान में खुलापन साफ दिखाई दिया। प्रतिनिधियों ने कहा कि एआई केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं है बल्कि यह आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था कार्य संस्कृति और रोजगार संरचना को गहराई से प्रभावित करने वाला परिवर्तनकारी माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई के कारण काम करने के तरीके निर्णय लेने की प्रक्रिया और सेवाओं की डिलीवरी में बुनियादी बदलाव आ रहा है।

वैश्विक कार्य परिदृश्य में एआई की भूमिका
प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि दुनिया भर में कंपनियां एआई आधारित समाधान अपना रही हैं। इससे उत्पादकता में वृद्धि हो रही है लागत कम हो रही है और सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो रही है। डेटा विश्लेषण स्वचालन और पूर्वानुमान आधारित निर्णय प्रणाली ने व्यवसायों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारत जैसे युवा और तेजी से विकसित हो रहे देश के लिए एआई एक बड़ा अवसर है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक का उपयोग मानवता के हित में होना चाहिए और इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को एआई के क्षेत्र में नैतिकता पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता देनी होगी।
स्वास्थ्य सेवा में परिवर्तन की संभावना
बैठक के दौरान स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एआई की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने बताया कि एआई आधारित डायग्नोस्टिक सिस्टम रोगों की प्रारंभिक पहचान में मदद कर रहे हैं। मेडिकल इमेजिंग रोग पूर्वानुमान और व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करने में एआई बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। भारत जैसे देश में जहाँ बड़ी आबादी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण है एआई दूरदराज के क्षेत्रों तक विशेषज्ञ सेवाएं पहुंचाने में मदद कर सकता है। टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म के साथ एआई का संयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार सकता है।
शिक्षा में नई संभावनाएं
शिक्षा क्षेत्र में भी एआई के प्रभाव को लेकर प्रतिनिधियों ने विस्तृत चर्चा की। एआई आधारित लर्निंग प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों की सीखने की गति और समझ के स्तर के अनुसार सामग्री प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे व्यक्तिगत शिक्षा संभव हो पाती है। भारत की विशाल छात्र आबादी को ध्यान में रखते हुए यह तकनीक शिक्षकों की सहायता कर सकती है और शिक्षा को अधिक प्रभावी बना सकती है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि डिजिटल साक्षरता और तकनीकी कौशल को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है, ताकि युवा पीढ़ी एआई आधारित भविष्य के लिए तैयार हो सके।

रोजगार और कौशल विकास
एआई के कारण रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी गंभीर चर्चा हुई। कुछ पारंपरिक नौकरियों में बदलाव आ सकता है लेकिन साथ ही नई प्रकार की नौकरियों का सृजन भी होगा। डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा और एआई नैतिकता जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ रही है। प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करें। स्किल अपग्रेडेशन और रिस्किलिंग पर जोर देकर युवाओं को भविष्य के रोजगार बाजार के लिए तैयार किया जा सकता है।
भारत की विशेष स्थिति
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि भारत एआई आधारित नवाचार और तैनाती के लिए अनुकूल स्थिति में है। देश के पास बड़ी डिजिटल आबादी मजबूत आईटी उद्योग और स्टार्टअप इकोसिस्टम है। साथ ही सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और विभिन्न प्रौद्योगिकी मिशनों के माध्यम से तकनीकी विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रतिनिधियों ने माना कि भारत बड़े पैमाने पर एआई समाधान लागू करने की क्षमता रखता है। यहाँ डेटा की उपलब्धता तकनीकी प्रतिभा और नवाचार की संस्कृति मिलकर एआई के लिए मजबूत आधार तैयार करती है।

