गोरखपुर में ‘विचार परिवार कुटुंब स्नेह मिलन’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन — परिवारिक एकता, सांस्कृतिक गौरव

गोरखपुर, 22 अक्टूबर 2025 — गोरखपुर शहर आज एकता, संस्कृति और विचारों के अद्भुत संगम का साक्षी बना, जब ‘विचार परिवार कुटुंब स्नेह मिलन’ कार्यक्रम का आयोजन बड़े ही उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस आयोजन में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े बुद्धिजीवी, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, युवा, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य था — विचार परिवार के सभी सदस्यों को एक सूत्र में जोड़ना, समाज में आपसी स्नेह, सहयोग और राष्ट्रवादी चिंतन को सशक्त करना।
कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती और भारत माता की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा वंदे मातरम् की गूंज के साथ हुआ। मंच पर उपस्थित गणमान्य अतिथियों में प्रमुख विचारक, शिक्षाविद् और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. अशोक तिवारी, प्रसिद्ध शिक्षाविद् एवं समाजसेवी ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “विचार परिवार केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक जीवन दृष्टि है, जो व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित बनाती है।”

सांस्कृतिक प्रस्तुति और स्वागत गीत
शुरुआत में स्थानीय बालक-बालिकाओं द्वारा देशभक्ति गीत और लोक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। “भारत माँ तेरे चरणों में जीवन अर्पित करते जाएं” गीत पर बच्चों ने सभी उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। इस प्रस्तुति के माध्यम से गोरखपुर की सांस्कृतिक धरोहर और स्थानीय लोककला की झलक स्पष्ट दिखाई दी।
आयोजकों ने कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र से स्वागत किया।
विचार मंथन सत्र
‘विचार परिवार कुटुंब स्नेह मिलन’ का सबसे मुख्य आकर्षण रहा विचार मंथन सत्र, जिसमें समाज और राष्ट्र के सामने खड़ी चुनौतियों पर खुली चर्चा की गई। विषय था — “सशक्त समाज से सशक्त राष्ट्र का निर्माण”।
इस सत्र में वक्ताओं ने कहा कि परिवार, समाज और राष्ट्र – ये तीनों एक दूसरे के पूरक हैं। जब परिवार में संवाद, स्नेह और मूल्य आधारित शिक्षा का वातावरण होता है, तो समाज स्वाभाविक रूप से सशक्त होता है।
श्री मनोज पांडेय, कार्यक्रम संयोजक ने कहा – “हमें यह समझना होगा कि विचार परिवार का अर्थ है — हर व्यक्ति जो राष्ट्र और समाज के हित में सोचता है। हमारे बीच संवाद और स्नेह ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”
श्रीमती किरण मिश्रा, महिला शाखा प्रतिनिधि ने परिवार में महिला की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “महिला समाज की प्रथम शिक्षिका है। जब महिला संस्कारित होगी, तो परिवार संस्कारित होगा, और वही राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत नींव बनेगी।”

वरिष्ठ सदस्यों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान विचार परिवार के वरिष्ठ सदस्यों का सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। जिन सदस्यों ने वर्षों से समाज सेवा, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, गौ-सेवा, और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में योगदान दिया है, उन्हें स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
सम्मानित व्यक्तियों में श्री हरिशंकर अग्रवाल, डॉ. प्रतिभा पांडे, श्री जयप्रकाश मिश्र, सुश्री पुष्पा देवी, और श्री चंद्रेश त्रिपाठी शामिल रहे।
इन सभी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आज के समय में ऐसे आयोजनों की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा है, क्योंकि ये समाज में संवाद और आत्मीयता की भावना को पुनर्जीवित करते हैं।
युवा सत्र और प्रेरक वक्तव्य
युवा वर्ग के लिए एक अलग सत्र रखा गया, जिसमें “नवयुवक और राष्ट्र की दिशा” विषय पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने युवाओं से आग्रह किया कि वे सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों से बचते हुए समाज के सकारात्मक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
अभिषेक शुक्ला, युवा प्रकोष्ठ के संयोजक ने कहा — “भारत का भविष्य आज के युवाओं के हाथ में है। हमें अपने विचारों और कर्मों से यह साबित करना होगा कि हम केवल सपने देखने वाले नहीं, बल्कि उन्हें साकार करने वाले नागरिक हैं।”
सामूहिक पारिवारिक भोज
विचार परिवार स्नेह मिलन का एक और विशेष आकर्षण रहा सामूहिक पारिवारिक भोज। सभी उपस्थित लोग एक साथ पंक्तिबद्ध होकर बैठे और सादगीपूर्वक पारंपरिक भोजन ग्रहण किया। भोजन के दौरान आपसी बातचीत, हंसी-मजाक और अपनत्व का माहौल देखने लायक था। इस क्षण ने कार्यक्रम को सचमुच “कुटुंब मिलन” का रूप दे दिया।

संघटन और समाज सेवा पर जोर
अंतिम सत्र में वक्ताओं ने कहा कि विचार परिवार का उद्देश्य केवल बौद्धिक चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज सेवा, पर्यावरण, शिक्षा, और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान करता है।
डॉ. शशि प्रकाश तिवारी, वरिष्ठ विचारक ने कहा — “हमें अपनी जड़ों से जुड़ना होगा। जब हम परिवार के मूल्यों को समझेंगे, तब ही समाज को सही दिशा दे सकेंगे। विचार परिवार का विस्तार केवल गोरखपुर तक सीमित नहीं, बल्कि इसे पूरे पूर्वांचल तक फैलाना चाहिए।”


