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राष्ट्रपति ने IIT धनबाद दीक्षांत में छात्रों को दिया सफलता मंत्र(August 01, 2025)

संपादक: Ghar Tak Express News | प्रकाशित: 02 Aug 2025, 06:48 AM
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राष्ट्रपति ने आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के दीक्षांत समारोह की शोभा बढ़ाई

धनबाद, झारखंड:
भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने 31 जुलाई 2025 को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (इंडियन स्कूल ऑफ माइंस), धनबाद के 45वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया। यह समारोह न केवल संस्थान के लिए बल्कि पूरे राज्य और देश के लिए गर्व का क्षण था।

सम्मान और गरिमा का अवसर

दीक्षांत समारोह शिक्षा संस्थानों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर होता है, जहां विद्यार्थियों को उनकी वर्षों की मेहनत का सम्मान मिलता है। इस वर्ष का दीक्षांत समारोह और भी खास रहा क्योंकि इसमें देश की प्रथम नागरिक—राष्ट्रपति—मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

IIT (ISM) धनबाद का यह समारोह ऐतिहासिक बन गया क्योंकि राष्ट्रपति मुर्मू ने न केवल विद्यार्थियों को संबोधित किया, बल्कि तकनीकी शिक्षा की दिशा में भारत की अग्रणी भूमिका पर भी प्रकाश डाला।


राष्ट्रपति का उद्बोधन: प्रेरणा से भरपूर संदेश

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा:

“आईआईटी (आईएसएम) धनबाद की यह विरासत देश की ऊर्जा और खनन के क्षेत्र में उत्कृष्टता की मिसाल है। मुझे गर्व है कि यह संस्थान न केवल इंजीनियरिंग बल्कि नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट कार्य कर रहा है।”

उन्होंने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें अपने ज्ञान का उपयोग केवल रोजगार प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि समाज को बेहतर बनाने के लिए करना चाहिए।


शिक्षा और समाज के बीच सेतु की आवश्यकता

राष्ट्रपति ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली और समाज के बीच गहरे संबंध पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि:

  • “प्रौद्योगिकी केवल तकनीकी समाधान नहीं है, यह सामाजिक परिवर्तन का साधन भी है।”
  • “IIT जैसे संस्थानों से निकले विद्यार्थियों को गांवों, किसानों और वंचित वर्ग के लिए समाधान तैयार करने चाहिए।”

उनका यह संदेश विद्यार्थियों के लिए केवल शिक्षा का प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का प्रतीक था।


IIT (ISM) धनबाद की गौरवशाली विरासत

इस संस्थान की स्थापना 1926 में एक खनन संस्थान के रूप में हुई थी, जिसे बाद में 2006 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) का दर्जा प्राप्त हुआ। आज यह संस्थान न केवल खनन बल्कि कंप्यूटर विज्ञान, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, सिविल, और पेट्रोलियम इंजीनियरिंग जैसे अनेक क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

संस्थान की प्रगति और उसकी शोध गतिविधियों ने वैश्विक स्तर पर भी इसकी पहचान बनाई है। आज इसके छात्र विश्व की अग्रणी कंपनियों और अनुसंधान केंद्रों में कार्यरत हैं।

राष्ट्रपति का प्रेरणादायी भाषण

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने भाषण में कहा कि,

“IIT (ISM) धनबाद जैसे संस्थान केवल इंजीनियर नहीं बनाते, वे राष्ट्रनिर्माता तैयार करते हैं। आप सभी नवाचार, अनुसंधान और सामाजिक सेवा के माध्यम से देश को आत्मनिर्भर बना सकते हैं।”

उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे न केवल तकनीकी दक्षता में आगे बढ़ें बल्कि नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी पालन करें।

राष्ट्रपति ने ग्रामीण भारत, पर्यावरणीय संकट, ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल डिवाइड जैसे मुद्दों पर तकनीकी समाधान खोजने के लिए युवाओं को आगे आने का आह्वान किया।


IIT (ISM) धनबाद: तकनीकी शिक्षा की धरोहर

IIT (ISM) धनबाद की स्थापना 1926 में हुई थी, तब इसका उद्देश्य भारत के खनन क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना था। आज यह संस्थान देश के सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी संस्थानों में से एक बन चुका है और 2006 में इसे IIT का दर्जा दिया गया।

यह संस्थान निम्नलिखित क्षेत्रों में अग्रणी है:

  • खनन इंजीनियरिंग
  • पेट्रोलियम इंजीनियरिंग
  • अर्थ साइंस और पर्यावरणीय अनुसंधान
  • कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, और सिविल इंजीनियरिंग
  • AI, डाटा साइंस और स्टार्टअप इनोवेशन

दीक्षांत समारोह की मुख्य बातें

इस दीक्षांत समारोह में भारत के कोने-कोने से आए विद्यार्थियों को उनकी शिक्षा पूर्ण होने पर डिग्रियाँ प्रदान की गईं। समारोह में:

  • 1500 से अधिक स्नातक, परास्नातक और पीएच.डी. विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं।
  • 70+ छात्रों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया।
  • राष्ट्रपति द्वारा विशेष अतिथियों और शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
  • संस्थान के ‘तकनीकी नवाचार’, ‘ग्रीन एनर्जी रिसर्च’, और ‘एंटरप्रेन्योरशिप मॉडल्स’ की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

विद्यार्थियों की भावना: गर्व और जिम्मेदारी

समारोह में मौजूद विद्यार्थियों और उनके परिवारजनों के चेहरों पर गर्व और उत्साह साफ झलक रहा था। कंप्यूटर साइंस के छात्र अभिषेक राय ने कहा:

“राष्ट्रपति महोदय की उपस्थिति ने हमारे समारोह को ऐतिहासिक बना दिया। उनका भाषण हमारे करियर की दिशा तय करने में सहायक रहेगा।”

एक अन्य छात्रा नेहा सिन्हा ने कहा:

“मुझे गर्व है कि मैं ऐसे संस्थान से पढ़ी जहां से निकलने के बाद सिर्फ नौकरी नहीं, देश सेवा की भावना भी मिली।”


शिक्षकों और संस्थान की प्रतिक्रिया

संस्थान के निदेशक प्रोफेसर राजीव शेखर ने कहा:

“राष्ट्रपति महोदय का हमारे बीच आना संस्थान के लिए गौरव की बात है। हम भविष्य में तकनीकी शोध, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, और सामाजिक नवाचारों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”


दीक्षांत समारोह की झलकियाँ

इस अवसर पर विभिन्न संकायों से पासआउट होने वाले विद्यार्थियों को डिग्रियाँ और पदक प्रदान किए गए। कुलपति प्रो. राजीव शेखर ने संस्थान की प्रगति पर रिपोर्ट प्रस्तुत की। समारोह में निम्न मुख्य बिंदु देखने को मिले:

  • 1500+ छात्रों को डिग्री प्रदान की गई।
  • 70 स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदकों का वितरण।
  • विशिष्ट अतिथियों में कई उद्योगपति, पूर्व छात्र एवं शिक्षा विशेषज्ञ शामिल रहे।
  • संस्थान की शोध एवं नवाचार उपलब्धियों का प्रदर्शन।

राष्ट्रीय विकास में तकनीकी शिक्षा की भूमिका

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि आने वाला युग नवाचार का युग है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहभागी बनें।

“आपके विचार और तकनीकी क्षमताएं देश को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती हैं। आपको अपने ज्ञान का उपयोग समाज, पर्यावरण और आर्थिक विकास के लिए करना होगा।”


छात्रों की प्रतिक्रिया: प्रेरणा और संकल्प

दीक्षांत समारोह में भाग लेने वाले कई छात्रों ने राष्ट्रपति के संबोधन को जीवन का एक प्रेरक क्षण बताया। कंप्यूटर साइंस के छात्र आदित्य मिश्रा ने कहा:

“आज का दिन हमारे लिए अविस्मरणीय रहेगा। राष्ट्रपति जी का संबोधन केवल प्रेरणा नहीं, एक जिम्मेदारी का बोध कराता है।”

इसी तरह, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की छात्रा सौम्या सिंह ने कहा:

“हमने जो कुछ सीखा है, अब उसका उपयोग समाज और देश की सेवा में करना ही हमारा कर्तव्य है।”


आईआईटी (आईएसएम) का भविष्य: नवाचार की ओर बढ़ते कदम

संस्थान ने अगले पांच वर्षों के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप प्रस्तुत किया है, जिसमें अनुसंधान, उद्योग-सम्बंध, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और स्टार्टअप कल्चर को प्रमुखता दी गई है।

  • इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना: नवोदित उद्यमियों के लिए।
  • ग्रीन टेक्नोलॉजी पर विशेष शोध परियोजनाएं।
  • एआई, डीप लर्निंग, और क्वांटम कंप्यूटिंग में उन्नत पाठ्यक्रम।
  • मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च हब की योजना।

निष्कर्ष: शिक्षा से समाज सेवा तक

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति ने इस समारोह को ऐतिहासिक बना दिया। उनका संदेश केवल छात्रों के लिए नहीं, बल्कि पूरे शैक्षणिक जगत के लिए एक मार्गदर्शक सिद्ध हुआ।

IIT (ISM) धनबाद जैसी संस्थाएं भारत को तकनीकी महाशक्ति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। दीक्षांत समारोह केवल एक अंत नहीं, एक नई शुरुआत है—जिसमें छात्र समाज और राष्ट्र के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे।