लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राजस्व से जुड़े कामकाज को अधिक आसान और डिजिटल बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने तीन नई ऑनलाइन सेवाएं शुरू की हैं। इन सेवाओं के जरिए अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन, संयुक्त स्वामित्व वाली जमीन के विभाजन के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया और खतौनी रिकॉर्ड तक आसान पहुंच की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यह व्यवस्था शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 से लागू की गई।
नई डिजिटल सेवाओं का उद्देश्य उन प्रक्रियाओं को सरल बनाना है जिनके लिए नागरिकों को पहले तहसील या राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। खास तौर पर संयुक्त भूमि के बंटवारे से जुड़ी प्रक्रिया ग्रामीण परिवारों और सह-खातेदारों के लिए महत्वपूर्ण है। ऑनलाइन सुविधा बढ़ने से आवेदन की स्थिति पर नजर रखना और दस्तावेजी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना आसान हो सकता है।
EWS प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन सुविधा
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पात्र नागरिक अब EWS प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। यह प्रमाणपत्र शिक्षा और सरकारी सेवाओं में लागू आरक्षण तथा अन्य पात्रता प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऑनलाइन आवेदन की सुविधा से लोगों को आवेदन जमा करने के लिए बार-बार कार्यालय जाने की आवश्यकता कम हो सकती है।
संयुक्त जमीन के बंटवारे की प्रक्रिया भी डिजिटल
राजस्व विभाग ने संयुक्त स्वामित्व वाली जमीन के विभाजन के लिए भी ऑनलाइन सेवा शुरू की है। कई परिवारों में एक ही खाते में दर्ज भूमि के हिस्सों को अलग कराने की प्रक्रिया लंबे समय से राजस्व कार्यालयों से जुड़ी रही है। डिजिटल आवेदन की सुविधा इस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में कदम है। हालांकि, अंतिम निर्णय संबंधित राजस्व प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच के बाद ही होगा।
खतौनी रिकॉर्ड तक पहुंच होगी आसान
नई व्यवस्था में खतौनी रिकॉर्ड तक पहुंच को भी सरल बनाया गया है। खतौनी भूमि स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है। रिकॉर्ड की उपलब्धता और उसे देखने की प्रक्रिया आसान होने से जमीन से जुड़े मामलों में नागरिकों को जरूरी जानकारी जल्दी मिल सकेगी।
ग्रामीण नागरिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
उत्तर प्रदेश में भूमि और राजस्व से जुड़े काम बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों से जुड़े हैं। EWS प्रमाणपत्र और भूमि विभाजन जैसी सेवाओं को ऑनलाइन करने से समय और यात्रा की लागत कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही डिजिटल रिकॉर्ड से प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की संभावना है।
हालांकि, ऑनलाइन सुविधा शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि हर आवेदन स्वतः स्वीकृत हो जाएगा। पात्रता, दस्तावेजों की जांच और संबंधित राजस्व अधिकारियों की प्रक्रिया पहले की तरह आवश्यक रहेगी। नागरिकों को आवेदन करते समय केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल और विभागीय निर्देशों का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
फोकस कीवर्ड: यूपी EWS प्रमाणपत्र ऑनलाइन
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