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अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा: ट्रंप ने दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी, तेल बाजार में उछाल

संपादक: Arvind Kumar Sahani |प्रकाशित: 01 सितम्बर 2026, 12:14 पूर्वाह्न
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वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक महीने की अपेक्षाकृत शांति के बाद फिर बढ़ गया है। सोमवार, 31 अगस्त 2026 को अमेरिकी बलों ने ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों की ओर मिसाइलें दागीं। ताजा घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव की आशंका को फिर सामने ला दिया है।

Reuters के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि लारक द्वीप पर मौजूद लॉन्चरों का इस्तेमाल स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में समुद्री खदानें बिछाने की तैयारी में किया जा रहा था। अमेरिका ने इसे सीमित और सटीक कार्रवाई बताया। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही। जॉर्डन की सेना के अनुसार उसकी वायु रक्षा ने उसके हवाई क्षेत्र में दाखिल आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका जवाबी कार्रवाई कर सकता है। Reuters के मुताबिक ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान पर कड़ा प्रहार करेगा। वहीं एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने घटनाक्रम को सीमित टकराव बताते हुए चेतावनी दी कि दोबारा हमला होने पर तेहरान की प्रतिक्रिया कड़ी हो सकती है।

इस सैन्य तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है। Reuters की बाजार रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 2.5 प्रतिशत बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI भी करीब 2.5 प्रतिशत चढ़ा। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में से एक है, इसलिए यहां किसी भी लंबे व्यवधान से कच्चे तेल की कीमतों और आयात पर निर्भर देशों की लागत पर असर पड़ सकता है।

भारत पर क्यों पड़ सकता है असर? भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। पश्चिम एशिया में लंबे समय तक तनाव रहने पर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेजी, माल ढुलाई लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि इस समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर भारत में ईंधन कीमतों पर तत्काल प्रभाव का कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा।

इस घटनाक्रम के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी संवाद और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया है। ऐसे में आने वाले घंटों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सैन्य टकराव सीमित रहता है या दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ता है।

स्रोत: Reuters, 31 अगस्त/1 सितंबर 2026; अन्य अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों से प्रमुख तथ्यों की पुष्टि।