संपादकः मुकेश साहनी घर तक एक्सप्रेस न्युज। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज भारत के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से विशेष मुलाकात की। यह मुलाकात न केवल भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों का प्रतीक बनी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अंतरिक्ष विज्ञान में प्रेरणा देने वाली घटना के रूप में भी दर्ज हो गई। प्रधानमंत्री ने श्री शुक्ला के साथ अंतरिक्ष में उनके अनुभवों, मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम “गगनयान” और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारत की प्रगति जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा – “शुभांशु शुक्ला के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई। हमने अंतरिक्ष में उनके अनुभवों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति के साथ-साथ भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन सहित कई विषयों पर चर्चा की। भारत को उनकी उपलब्धि पर गर्व है।” श्री मोदी के इस संदेश के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अंतरिक्ष यात्री शुक्ला को बधाइयाँ दीं और इसे राष्ट्र के लिए गौरव का क्षण बताया।
शुभांशु शुक्ला भारत के उन चुनिंदा वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों में से एक हैं जिन्होंने अंतरिक्ष में जाकर देश का परचम फहराया। उनका यह अनुभव न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि यह भारत की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। शुक्ला ने प्रधानमंत्री को अंतरिक्ष में बिताए गए अपने दिनों के रोचक अनुभव साझा किए, जिसमें शून्य गुरुत्वाकर्षण में काम करना, अंतरिक्ष स्टेशन की गतिविधियाँ और धरती को अंतरिक्ष से देखने का अद्वितीय अनुभव शामिल रहा। प्रधानमंत्री और शुक्ला की बातचीत का एक अहम हिस्सा भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन पर केंद्रित रहा। गगनयान कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को स्वदेशी तकनीक के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजना है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर काम तेज़ी से चल रहा है और आने वाले वर्षों में इसके सफल प्रक्षेपण की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ने शुक्ला के अनुभवों को गगनयान मिशन के लिए मूल्यवान बताया और कहा कि यह देश की युवा पीढ़ी को विज्ञान और प्रौद्योगिकी की ओर आकर्षित करेगा।
एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और इसरो में प्रशिक्षण शुभांशु शुक्ला ने प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता हासिल की। उन्हें विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रति बचपन से ही गहरी रुचि थी। उच्च शिक्षा के दौरान ही उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान में करियर बनाने का निश्चय किया। बाद में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में उनका चयन हुआ, जहाँ उन्होंने कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण में शारीरिक फिटनेस, मानसिक संतुलन और अंतरिक्ष विज्ञान की गहन समझ शामिल रही। अंतरिक्ष में गए भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला उन चुनिंदा भारतीय वैज्ञानिकों में से एक हैं जिन्हें अंतरिक्ष में जाने का अवसर मिला। उनकी यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है। अंतरिक्ष यात्रा के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रयोग किए, जो भविष्य में मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रमों के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।
शून्य गुरुत्वाकर्षण में शोध कार्य उनकी विशेषता शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) की परिस्थितियों में शोध करना है। अंतरिक्ष में रहते हुए उन्होंने जैविक, भौतिक और रासायनिक प्रक्रियाओं पर प्रयोग किए। इन प्रयोगों से मिली जानकारियाँ चिकित्सा विज्ञान, तकनीकी विकास और अंतरिक्ष अभियानों में उपयोगी होंगी। शुक्ला का यह योगदान वैज्ञानिक समुदाय के लिए बहुमूल्य माना जा रहा है। युवाओं को विज्ञान की ओर आकर्षित करना शुभांशु शुक्ला का मानना है कि भारत का भविष्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नवाचारों में छिपा है। इसलिए वे लगातार युवाओं को प्रेरित करते हैं कि वे शोध और अंतरिक्ष विज्ञान की ओर रुझान बढ़ाएँ। उनकी उपलब्धि से देशभर के युवा छात्र-छात्राओं में उत्साह और जिज्ञासा की लहर दौड़ गई है। शुक्ला की यात्रा यह संदेश देती है कि मेहनत, लगन और समर्पण से कोई भी युवा अंतरिक्ष की ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है।
भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजना गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को स्वदेशी तकनीक से निर्मित अंतरिक्ष यान के जरिए अंतरिक्ष में भेजना है। यह मिशन भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला खड़ा करेगा जिन्होंने स्वयं के प्रयास से मानव को अंतरिक्ष में भेजा है। इसरो इस महत्वाकांक्षी मिशन का नेतृत्व भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) कर रहा है। इसरो पहले ही चंद्रयान और मंगलयान जैसी परियोजनाओं के जरिए अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी क्षमता सिद्ध कर चुका है। अब गगनयान के माध्यम से वह मानव मिशन की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है। इस मिशन के लिए इसरो के वैज्ञानिक और इंजीनियर दिन-रात काम कर रहे हैं।
स्वदेशी अंतरिक्ष यान और प्रक्षेपण प्रणाली गगनयान मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि इसकी स्वदेशी तकनीक होगी। इसमें भारत निर्मित क्रू मॉड्यूल और क्रू एस्केप सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही, जीएसएलवी मार्क-III (एलवीएम-3) प्रक्षेपण यान का उपयोग कर अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर की ऊँचाई तक भेजा जाएगा। मिशन से पहले अनक्रूड (बिना मानव वाले) प्रक्षेपण किए जा रहे हैं ताकि सभी तकनीकी पहलुओं की पूरी जाँच हो सके। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम गगनयान मिशन केवल विज्ञान और तकनीक की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में भी एक ऐतिहासिक कदम है। इससे भारत की वैश्विक पहचान एक उभरती अंतरिक्ष शक्ति के रूप में और मजबूत होगी। साथ ही, यह मिशन देश के युवाओं को विज्ञान और अनुसंधान में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का कद ऊँचा होगा और भविष्य में अंतरिक्ष सहयोग के नए अवसर खुलेंगे।
Source : PIB | रिपोर्ट : मुकेश साहनी : GT Express न्यूज़ डेस्क |
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