नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में देशभर के मधुमेह विशेषज्ञों का जमावड़ा जमा हुआ जब रिसर्च सोसाइटी फॉर स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (आरएसएसडीआई) के 53वें स्थापना दिवस समारोह का आयोजन हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, जो स्वयं एक विख्यात एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हैं ने युवाओं में बढ़ते टाइप-2 डायबिटीज मेलिटस की रोकथाम के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान की घोषणा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मोटापा
डॉ. सिंह ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को आज भी विश्व की मधुमेह राजधानी कहा जाना चिंताजनक है। उन्होंने कहा हमारे देश में हर तीसरा भारतीय किसी न किसी चयापचय संबंधी विकार से ग्रस्त है। यह समय है कि हम इलाज के बजाय रोकथाम को प्राथमिकता दें। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मोटापा कम करने के राष्ट्रीय आह्वान को भी दोहराया और कहा कि फैटी लिवर आंत की चर्बी और मोटापे से जुड़ी अन्य बीमारियों से बचने का सबसे बड़ा हथियार जन-जागरूकता और जीवनशैली में सुधार है।
आरएसएसडीआई वैज्ञानिक संगठन
आरएसएसडीआई का यह वार्षिक आयोजन इस वर्ष विशेष महत्व का था, क्योंकि इस अवसर पर 1972 में संगठन की स्थापना के बाद से उसकी यात्रा की समीक्षा की गई। 20 संस्थापक सदस्यों से शुरू होकर आज यह संस्था एक वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त वैज्ञानिक संगठन बन चुकी है। समारोह में आरएसएसडीआई के सभी पूर्व अध्यक्ष, वरिष्ठ संरक्षक और देशभर से आए विद्वान डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने आरएसएसडीआई के प्रथम अध्यक्ष प्रो. डॉ. एम.एम. आहूजा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संगठन ने मधुमेह की रोकथाम और प्रबंधन पर राष्ट्रीय संवाद को आकार दिया है। उन्होंने कहा, हमें ऐसे संस्थागत ढांचे की जरूरत है, जहां शोध के परिणाम उच्च जोखिम वाले समूहों तक पहुंचें। उन्होंने विशेष रूप से “दिन में एक बार भोजन जैसी भ्रांतियों का खंडन किया और कहा कि मधुमेह रोगियों को भोजन की गुणवत्ता और मात्रा पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
भारतीय मधुमेह रोकथाम
समारोह के दौरान भारतीय मधुमेह रोकथाम अध्ययन (आईपीडीएस) के हालिया निष्कर्ष भी साझा किए गए। प्रोफेसर एसवी मधु के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में पाया गया कि योग का अभ्यास टाइप-2 मधुमेह की रोकथाम में अत्यंत प्रभावी है। डॉ. सिंह ने बताया कि यह निष्कर्ष केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जेपी नड्डा के हस्तक्षेप से स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्तुत किए जा चुके हैं। केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य जागरूकता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और जन स्वास्थ्य संदेश चिकित्सा प्रकाशनों से आगे बढ़कर आम जनता तक पहुंचे। उन्होंने कहा हमारे प्रयास केवल अकादमिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए। हमें संस्थागत स्तर पर राष्ट्रीय मधुमेह प्रतिक्रिया रणनीति को लागू करना होगा।
वैज्ञानिक शोध का मंच एवं टाइप-2 डायबिटीज
बैठक का संचालन पूर्व अध्यक्ष प्रो. एसवी मधु ने किया, जबकि मंच पर प्रो. पीवी राव, डॉ. विजय विश्वनाथन (अध्यक्ष, आरएसएसडीआई) और डॉ. संजय अग्रवाल (सचिव, आरएसएसडीआई) सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे। देशभर से आए विशेषज्ञों ने मधुमेह और मोटापे की रोकथाम के लिए भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श किया। संगठन की 53 वर्षीय यात्रा को रेखांकित करते हुए, वक्ताओं ने बताया कि प्रारंभिक वर्षों में आरएसएसडीआई के प्रकाशनों ने जो शैक्षणिक महत्व स्थापित किया था, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। अब यह संस्था केवल वैज्ञानिक शोध का मंच ही नहीं बल्कि नीति-निर्माण में भी एक महत्वपूर्ण परामर्शदाता के रूप में कार्य कर रही है। इस अवसर पर आरएसएसडीआई के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सदस्यों को सम्मानित भी किया गया। कई युवा शोधकर्ताओं को मधुमेह रोकथाम पर नवीनतम शोध कार्य प्रस्तुत करने का अवसर मिला। चर्चा का मुख्य केंद्र युवाओं में तेजी से बढ़ती टाइप-2 डायबिटीज को रोकने की रणनीति रहा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंत में कहा कि मधुमेह केवल एक चिकित्सा चुनौती नहीं, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी बड़ी समस्या बन चुका है। उन्होंने कहा हम मधुमेह का इलाज उसके होने से पहले ही कर लें। यही सबसे प्रभावी उपाय है।
Source : PIB
Leave a Reply