रोहित निषाद ने छठ पर्व पर दी देशवासियों को शुभकामनाएँ, कहा- मातृ शक्ति और आस्था का पर्व है

भारत की लोक संस्कृति में छठ पर्व का एक अद्वितीय स्थान है। इस पर्व में श्रद्धा, आस्था और शुद्धता की त्रिवेणी बहती है। बिहार, पूर्वांचल, झारखंड और नेपाल के तराई इलाकों में तो यह पर्व लोक जीवन का उत्सव बन चुका है। इस अवसर पर भोजपुरी संगीत जगत के लोकप्रिय गायक रोहित निषाद ने अपने गृह नगर गोरखपुर से देश और विदेश में बसे सभी भारतीयों को छठ पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। गोरखपुर स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए रोहित निषाद ने कहा कि छठ महापर्व हमारे लोक जीवन की आत्मा है। उन्होंने कहा— “छठ पूजा हमें यह सिखाती है कि प्रकृति, सूर्य और जल ही जीवन का आधार हैं। इस पर्व में माताएँ और बहनें अपने परिवार के सुख-समृद्धि और संतानों की दीर्घायु के लिए उपवास रखती हैं, यह मातृ शक्ति की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। उन्होंने आगे कहा कि आज जब आधुनिकता के दौर में लोग अपनी जड़ों से दूर जा रहे हैं, ऐसे में छठ पर्व हमें अपनी मिट्टी, अपनी संस्कृति और अपने लोगों से जोड़ता है।

रोहित निषाद ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष भी छठ पूजा पर एक विशेष भोजपुरी भक्ति गीत “छठ मईया से नयनवा लागल” रिलीज़ किया है, जो यूट्यूब पर लाखों लोगों द्वारा देखा जा चुका है। इस गीत में उन्होंने लोक वाद्य यंत्रों का प्रयोग कर पारंपरिक छठ गीतों की आत्मा को आधुनिक संगीत से जोड़ने की कोशिश की है। भोजपुरी गायक रोहित निषाद पिछले एक दशक से भोजपुरी लोक संगीत को नई दिशा देने में जुटे हैं। वे खुद गोरखपुर के ग्रामीण अंचल से ताल्लुक रखते हैं, जहाँ उन्होंने बचपन में अपनी माँ को घाटों पर छठ का प्रसाद चढ़ाते हुए देखा। यही प्रेरणा आगे चलकर उनके गीतों की आत्मा बन गई। उन्होंने कहा— “मैं अपने गीतों के माध्यम से छठ की महिमा, लोक परंपराओं और परिवार की एकता को दिखाने का प्रयास करता हूँ। छठ केवल पूजा नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता का उत्सव है। रोहित ने यह भी बताया कि वे हर साल गोरखपुर के रामगढ़ताल और राप्ती नदी घाट पर जाकर लोक कलाकारों के साथ मिलकर छठ गीत गाते हैं। उनके अनुसार, इस वर्ष वे “सूरज देवता अरघ दिहीं” नामक एक लाइव प्रस्तुति देने जा रहे हैं, जो गोरखपुर शहर के प्रमुख घाटों पर आयोजित होगी।

संगीत के अलावा रोहित निषाद समाज सेवा से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस बार उनके फैन क्लब ने छठ पर्व के अवसर पर घाटों की सफाई, दीप सज्जा और निःशुल्क प्रसाद वितरण की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा— “हमारे पूर्वजों ने हमेशा प्रकृति की पूजा की, इसलिए इस पर्व का पर्यावरणीय संदेश भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज जब नदियाँ और तालाब प्रदूषित हो रहे हैं, हमें अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।” रोहित निषाद ने लोगों से अपील की कि वे इस पर्व पर प्लास्टिक का प्रयोग न करें, और मिट्टी के दीपक, बांस के सूप और पारंपरिक सामग्रियों का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि इससे न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि स्थानीय कारीगरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहयोग मिलेगा। मीडिया से बातचीत के अंत में रोहित निषाद ने सभी देशवासियों, विशेषकर भोजपुरी समाज को छठ पर्व की शुभकामनाएँ देते हुए कहा— “सूर्य भगवान सबके जीवन में प्रकाश और ऊर्जा भरें, मातृ शक्ति को सुख, समृद्धि और संतोष प्रदान करें। हम सब अपने-अपने स्तर पर इस पर्व को पवित्रता और एकता के साथ मनाएँ। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आने वाले महीने में वे “छठ गाथा” नाम से एक डॉक्यूमेंट्री एल्बम रिलीज़ करने जा रहे हैं, जिसमें पूर्वांचल, बिहार और नेपाल के घाटों पर मनाए जाने वाले छठ पर्व की परंपराओं को दिखाया जाएगा। रोहित निषाद के इस पहल की सराहना करते हुए कई स्थानीय लोगों ने कहा कि ऐसे कलाकार ही लोक संस्कृति के असली संरक्षक हैं, जो न केवल संगीत बल्कि समाज को भी दिशा देते हैं।


