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RBI का बड़ा कदम: 1 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचकर बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी खींचेगा

संपादक: Arvind Kumar Sahani |प्रकाशित: 12 सितम्बर 2026, 12:24 पूर्वाह्न
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नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने 11 सितंबर 2026 को 1 लाख करोड़ रुपये (करीब 10.47 अरब डॉलर) के सरकारी बॉन्ड खुले बाजार में बेचने की घोषणा की है। बिक्री तीन चरणों में होगी और इसकी शुरुआत 16 सितंबर से होगी।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब बैंकिंग व्यवस्था में तरलता काफी बढ़ गई है। विदेशी मुद्रा जुटाने की एक विशेष योजना के तहत बड़ी मात्रा में विदेशी पूंजी आने से रिजर्व बैंक के भंडार में तेज वृद्धि हुई है। अतिरिक्त नकदी के कारण अल्पकालिक ब्याज दरें नीति गलियारे की निचली सीमा से भी नीचे जाने लगी थीं, जिससे RBI को तरलता सोखने की जरूरत महसूस हुई।

तीन चरणों में होगी बॉन्ड बिक्री

RBI के मुताबिक कुल 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री तीन चरणों में की जाएगी। इसका उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त धन को धीरे-धीरे वापस खींचना है, ताकि मुद्रा बाजार में ब्याज दरों का संचालन मौद्रिक नीति के अनुरूप बना रहे।

तेल की महंगाई भी बड़ी चिंता

केंद्रीय बैंक का यह कदम ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा हुआ है। महंगा तेल भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें रहने पर महंगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है।

सरकार और बाजार पर क्या असर?

सरकारी बॉन्ड की बिक्री से बैंकिंग सिस्टम की अतिरिक्त नकदी घटेगी। इसके साथ बॉन्ड यील्ड पर भी असर पड़ सकता है और सरकार के लिए बाजार से उधारी की लागत बढ़ने की संभावना पर निवेशक नजर रखेंगे। हालांकि RBI का उद्देश्य बाजार में अचानक झटका देना नहीं, बल्कि अतिरिक्त तरलता को व्यवस्थित तरीके से सामान्य करना है।

RBI के पास और भी विकल्प

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि केंद्रीय बैंक जरूरत के अनुसार उपलब्ध अन्य साधनों का भी इस्तेमाल कर सकता है। इनमें विदेशी मुद्रा स्वैप और दूसरे liquidity-management उपाय शामिल हैं।

महत्वपूर्ण: बॉन्ड बिक्री की घोषणा को ब्याज दरों में तत्काल बदलाव की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए। यह मुख्य रूप से बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त तरलता के प्रबंधन का कदम है। बाजार पर वास्तविक असर नीलामी, बॉन्ड यील्ड और बैंकिंग प्रणाली की आगे की नकदी स्थिति पर निर्भर करेगा।

यह रिपोर्ट उपलब्ध विश्वसनीय बाजार रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है।