राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में जनजातीय गौरव दिवस समारोह में दर्ज कराई गरिमामयी उपस्थिति

अंबिकापुर में ऐतिहासिक पल राष्ट्रपति मुर्मु की उपस्थिति से जनजातीय गौरव दिवस चमका
छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में आज का दिन इतिहास में दर्ज हो गया जब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने जनजातीय गौरव दिवस समारोह में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। यह आयोजन छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर आयोजित किया गया था जिसमें हजारों की संख्या में जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि, छात्र, कलाकार और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत को सम्मान देना उसे अधिक व्यापक स्तर पर पहचान दिलाना और जनजातीय समाज के योगदान को राष्ट्रीय धारा में सशक्त रूप से प्रस्तुत करना था।
जनजातीय इतिहास को लोकतंत्र की जननी बताया
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत के इतिहास में जनजातीय समुदायों का योगदान अत्यंत गौरवशाली और प्रेरणादायक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में बताया कि भारत का लोकतांत्रिक चरित्र सिर्फ आधुनिक संवैधानिक ढांचे से नहीं बल्कि प्राचीन गणराज्यों और जनजातीय परंपराओं से भी समृद्ध हुआ है। उन्होंने बस्तर के मुरिया दरबार का उदाहरण देते हुए कहा कि यह जनजातीय समाज की वह विरासत है जिसे आदिम लोकतांत्रिक संस्था के रूप में जाना जाता है।
राष्ट्रपति ने कहा— जनजातीय परंपराएँ हमें सिखाती हैं कि सामूहिक निर्णय, परस्पर संवाद और समानता का भाव भारत के सामाजिक ताने-बाने में सदियों से मौजूद है।

छत्तीसगढ़ की जनजातीय जड़ों को विशेष महत्व
राष्ट्रपति मुर्मु ने बताया कि भारत के कई राज्यों में जनजातीय संस्कृति की जड़ें बेहद गहरी हैं — छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, राजस्थान और पूर्वोत्तर राज्यों में यह सांस्कृतिक विरासत आज भी जीवित है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 1 से 15 नवंबर तक मनाए गए ‘जनजातीय गौरव पखवाड़े की भी सराहना की और कहा कि जनजातीय नायकों और परंपराओं को सम्मान देना भारत की सांस्कृतिक एकता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय विकास योजनाओं का उल्लेख
राष्ट्रपति ने पिछले एक दशक में केंद्र सरकार द्वारा जनजातीय समुदायों के लिए चलाई जा रहीं योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके अनुसार—
1. धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान
गांधी जयंती 2024 पर शुरू हुए इस अभियान से 5 करोड़ से अधिक जनजातीय भाई-बहन लाभान्वित होंगे। यह कार्यक्रम गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और बुनियादी सुविधाओं की मजबूती पर केंद्रित है।
2. पीएम-जनमन अभियान (PVTG Development Mission)
वर्ष 2023 में 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) के विकास के लिए शुरू किया गया यह अभियान भारत के आदिवासी इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका लक्ष्य PVTG समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ना, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका में सुधार करना है।

आदि कर्मयोगी अभियान से नई ऊर्जा
राष्ट्रपति ने बताया कि भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर केंद्र सरकार ने आदि कर्मयोगी अभियान की शुरुआत की है।
इसमें — 20 लाख स्वयंसेवकों का एक राष्ट्रीय नेटवर्क बनाया जा रहा है, ये स्वयंसेवक गांव-गांव जाकर जनजातीय परिवारों को सरकारी लाभ, शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण योजनाओं से जोड़ेंगे। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि इस अभियान से जनजातीय समाज में विकास की यात्रा तेज होगी।
वामपंथी उग्रवाद पर सख्त रुख — विकास की मुख्यधारा में लौट रहे लोग
राष्ट्रपति मुर्मु ने एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाते हुए कहा कि देश में वामपंथी उग्रवाद का प्रभाव लगातार घट रहा है। विशेषकर छत्तीसगढ़ में लोग हिंसा छोड़कर विकास की मुख्यधारा में सम्मिलित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से आने वाले समय में उग्रवाद के पूर्ण उन्मूलन की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि खेल, शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने युवाओं को सकारात्मक दिशा दी है।

बस्तर ओलंपिक्स की सफलता का किया उल्लेख
राष्ट्रपति ने खुशी जताई कि हाल ही में आयोजित बस्तर ओलंपिक्स में 1,65,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
उन्होंने कहा— बस्तर के युवाओं ने जिस उत्साह के साथ पारंपरिक खेलों में भाग लिया वह भारतीय संस्कृति की जीवंतता का अद्भुत उदाहरण है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि जनजातीय युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा भविष्य में भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी।
जनजातीय महापुरुषों के आदर्शों पर चलने का आह्वान
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों — बिरसा मुंडा, रानी दुर्गावती, सिद्धो-कान्हू, टंट्या भील जैसे महानायकों ने भारत की आज़ादी में जो योगदान दिया वह हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर हम उनके आदर्शों त्याग और राष्ट्रभावना को अपनाएँ तो छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरा भारत सशक्त आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बन सकता है।


