संवादाताः मुकेश साहनी‚घर तक एक्सप्रेस। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर निषाद युवा वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध समाजसेवी सुशिल चन्द साहनी एडवोकेट ने देशभर की बहनों एवं भाइयों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि यह भाई-बहन के रिश्ते में निहित स्नेह, विश्वास और सुरक्षा के वचन का प्रतीक है। यह पर्व भारतीय संस्कृति की उस अद्वितीय परंपरा को जीवंत रखता है, जिसमें रिश्तों का मूल्य केवल खून के रिश्तों तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय संबंधों में भी उतना ही पवित्र माना जाता है।
सुशिल चन्द साहनी ने अपने संदेश में कहा, “आज जब समाज में विभिन्न प्रकार की चुनौतियाँ सामने हैं, तब हमें रक्षाबंधन जैसे त्योहारों से प्रेरणा लेकर आपसी प्रेम, विश्वास और सहयोग को और मजबूत बनाना चाहिए।” उन्होंने विशेष रूप से बहनों से कहा कि वे शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी में आगे आएँ, क्योंकि यही भाई-बहन के रिश्ते को वास्तविक मजबूती देता है।
उन्होंने यह भी कहा कि निषाद युवा वाहिनी हमेशा समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करती रही है, और रक्षाबंधन का यह अवसर हमें याद दिलाता है कि हमें न केवल अपने परिवार बल्कि समाज की हर बहन-बेटी की सुरक्षा और सम्मान का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने संगठन के कार्यकर्ताओं से भी अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में रक्षाबंधन के दिन वृद्धाश्रम, अनाथालय और जरूरतमंद परिवारों में जाकर बहनों से राखी बंधवाएँ और उन्हें सुरक्षा का वचन दें। पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए साहनी ने कहा कि रक्षाबंधन सामाजिक सौहार्द का भी पर्व है, जो विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच आपसी प्रेम और एकता को बढ़ावा देता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई जगहों पर हिंदू बहनें मुस्लिम भाइयों को राखी बांधती हैं और मुस्लिम भाई अपनी बहनों को तोहफे देते हैं। यह परंपरा हमारे देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब की सबसे बड़ी पहचान है।
रक्षाबंधन का महत्व
रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति के उन प्रमुख पर्वों में से एक है, जो केवल धार्मिक महत्व ही नहीं बल्कि सामाजिक और भावनात्मक दृष्टि से भी बेहद खास है। यह पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जब मानसून अपनी पूरी रौनक पर होता है और प्रकृति हरियाली की चादर ओढ़े हुए होती है। इस दिन का महत्व केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं, बल्कि यह पूरे समाज में प्रेम, सुरक्षा और कर्तव्यबोध की भावना जगाता है।
रक्षाबंधन का शाब्दिक अर्थ है “सुरक्षा का बंधन”। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी या रक्षा सूत्र बांधती है, जो एक पवित्र धागा होता है। यह केवल सजावट का प्रतीक नहीं, बल्कि इसमें बहन का विश्वास, स्नेह और भाई के प्रति शुभकामनाएँ निहित होती हैं। बदले में भाई जीवनभर अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है — यह सुरक्षा केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि भावनात्मक, सामाजिक और नैतिक भी होती है।
इतिहास में रक्षाबंधन के कई उदाहरण मिलते हैं। राजपूत रानियों से लेकर साधारण गृहिणियों तक, इस पर्व ने समय-समय पर समाज में भाईचारे और सुरक्षा के संकल्प को जीवित रखा है। एक प्रसिद्ध उदाहरण रानी कर्णावती और मुगल सम्राट हुमायूं का है, जिसमें राखी ने धर्म और राजनीति की सीमाएं पार कर मानवता का संदेश दिया।
आज के समय में भी रक्षाबंधन अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि रिश्ते केवल रक्त-संबंधों से नहीं, बल्कि विश्वास और प्रेम से बनते और निभते हैं।
निषाद युवा वाहिनी की गतिविधियां
निषाद युवा वाहिनी एक सक्रिय सामाजिक संगठन है, जो लंबे समय से समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा में जुटा हुआ है। इस संगठन की गतिविधियां केवल राजनीति या आंदोलन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
- सामाजिक न्याय के क्षेत्र में कार्य
संगठन लगातार इस बात पर जोर देता है कि समाज में हर व्यक्ति को समान अवसर और अधिकार मिलें। चाहे बात दलित, पिछड़े, मछुआरा, निषाद, या किसी भी वंचित वर्ग की हो, संगठन उनकी समस्याओं को आवाज़ देने और सरकार तक पहुंचाने में अग्रणी भूमिका निभाता है। - शिक्षा के क्षेत्र में योगदान
निषाद युवा वाहिनी का मानना है कि शिक्षा ही वास्तविक सशक्तिकरण का आधार है। इसलिए संगठन विभिन्न ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में शिक्षा जागरूकता अभियान चलाता है, मुफ्त कोचिंग सेंटर स्थापित करता है और जरूरतमंद बच्चों को किताबें, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी उपलब्ध कराता है। - स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को देखते हुए संगठन समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर आयोजित करता है, जिसमें मुफ्त जांच और दवाइयों की व्यवस्था की जाती है। महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य संबंधी विशेष जरूरतों पर खास ध्यान दिया जाता है। - राष्ट्रीय एकता और भाईचारे के कार्यक्रम
संगठन विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच सौहार्द बनाए रखने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल प्रतियोगिताएं और त्यौहारों पर विशेष आयोजन करता है। जैसे रक्षाबंधन, होली, दीपावली, ईद आदि पर सामाजिक मेल-मिलाप के कार्यक्रम आयोजित कर राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया जाता है।
रिपोर्ट : मुकेश साहनी : GT Express न्यूज़ डेस्क | AN Next Media Network Private Limited
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