संवादाताः मुकेश साहनी‚घर तक एक्सप्रेस। राजस्थान के कृषि एवं उद्यानिकी विभाग ने खरीफ 2025 में किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराने के लिए जिलेवार आपूर्ति योजना को और सख्त व पारदर्शी बनाया है। कृषि विभाग के शासन सचिव राजन विशाल ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 1 लाख 70 हजार मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, जिसमें श्रीगंगानगर जिले में सर्वाधिक 18,777 एमटी स्टॉक मौजूद है। इसके अलावा जोधपुर में 12,971, टोंक में 11,900, नागौर में 8,851 और बारां में 8,583 एमटी यूरिया का भंडार है। जिन जिलों में कम उपलब्धता है, वहां आगामी 3-4 दिनों में अतिरिक्त आपूर्ति की जाएगी।
राजन विशाल ने बताया कि केंद्र सरकार से यूरिया और डीएपी का राज्यवार और कंपनीवार मासिक आवंटन किया जाता है। राज्य सरकार उस आवंटन और जिलों की मांग के आधार पर आपूर्ति योजना तैयार कर वितरण कराती है। अप्रैल से अगस्त तक केंद्र द्वारा स्वीकृत 8.82 लाख मीट्रिक टन यूरिया में से अब तक 6.97 लाख एमटी की आपूर्ति हो चुकी है,
कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अंकित सिफारिश के अनुसार संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित करने, उर्वरकों का समान वितरण सुनिश्चित करने और वितरण में अनियमितता पर रोक लगाने के लिए जिला अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। विभाग के अनुसार, खरीफ सीजन में पिछले तीन वर्षों में (अप्रैल-अगस्त) औसतन 9.39 लाख एमटी यूरिया की खपत हुई है।
डीएपी की स्थिति पर बात करते हुए आयुक्त कृषि चिन्मयी गोपाल ने बताया कि खरीफ 2025 में केंद्र ने अप्रैल से अगस्त तक 4.75 लाख एमटी डीएपी का आवंटन किया था, जिसमें से 2.73 लाख एमटी की आपूर्ति पूरी हो चुकी है। इसके अलावा वैकल्पिक उर्वरक एनपीके की 1.23 लाख एमटी और एसएसपी की 1.60 लाख एमटी आपूर्ति भी हो चुकी है।
राज्य में इस वर्ष 16.12 लाख हेक्टेयर अधिक बुवाई हुई है। विशेषकर मक्का में 6%, धान में 15% और कपास में 25% अधिक बुवाई दर्ज की गई है, जिसके चलते यूरिया की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लगातार वर्षा के कारण फसलों की वृद्धि तेज़ हुई और किसानों ने समय-समय पर खाद की मांग बढ़ाई।
यूरिया की कालाबजारी, टैगिंग, जमाखोरी, डायवर्जन और गैर-कृषि कार्य में उपयोग पर रोक लगाने के लिए विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। खरीफ 2025 में अब तक 39 आदान विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित, 9 लाइसेंस रद्द किए गए हैं। 65 स्थानों पर उर्वरकों की जब्ती, और उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के उल्लंघन पर 44 एफआईआर दर्ज कराई गई हैं।
राज्य की सीमाओं से लगते जिलों — उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और पंजाब — में चेक पोस्ट स्थापित कर यूरिया डायवर्जन पर निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा, प्लाईवुड, रेजिन, डेफ, पॉलिमर्स जैसी निर्माण इकाइयों में यूरिया के गैर-कृषि उपयोग की आशंका के चलते राज्य स्तरीय टीमों ने छापेमारी की।
राजस्थान के कृषि विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश में कुल 1.70 लाख मीट्रिक टन (एमटी) यूरिया का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें सर्वाधिक भंडार श्रीगंगानगर जिले में दर्ज किया गया है, जहां 18,777 एमटी यूरिया मौजूद है। यह जिला न केवल प्रदेश का प्रमुख सिंचित क्षेत्र है, बल्कि खरीफ सीजन में उर्वरक खपत में भी शीर्ष पर रहता है।
रिपोर्ट : मुकेश साहनी : GT Express न्यूज़ डेस्क | AN Next Media Network Private Limited
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